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कॉम्बिंग गश्त के दौरान पुलिस ने बदमाशों गहरी नींद उठाया, 233 फरार वांरटी पकड़े, 296 लिस्टेड गुण्डे-हिस्ट्रीशीटरों को घर-घर पर किया चेक

ग्वालियर. रविवार -सोमवारी की दरमियानी रात पुलिस ने कॉम्बिंग गश्त के दौर शहर और देहात में एक साथ 50 से अधिक टीमें गश्त निकली। जगह-जगह पर चेकिंग लगाई गयी है। इस बीच पुलिस ने 233 फरार वारंटियों को पकड़ा है। इनमें से 122 स्थाई व 111 गिरफ्तारी वारंटी शामिल है। यह काफी समय से पुलिस को चकमा दे रहे थे।
कई बदमाश घर में चादर तानकर सो रहे 296 पुराने गुण्डे और हिस्ट्रीशीटर को पुलिस ने घर-घर जाकर चेक किया हे। पुलिस ने इनसे पूछताछ की है। पिछले कुछ वक्त से यह किसी घटना में शामिल तो नहीं है। जहां भी कोई संदिग्ध नजर आया है उसे तत्काल हवालात में पहुंचा दिया गया है। पूरी तसल्ली के बाद ही पुलिस पुलिस ने वापिस छोड़ा है। स्वयं एसएसपी धर्मवीर सिंह भी कम्बिग गश्त के दौरान सड़कों पर जायजा लेते नजर आये है।
गहरी नींद में जगाया बदमाशों को
लम्बे समय से चकमा दे रहे अपराधियों को पुलिस ने रविवार की रात सोते से जगाया। वह चादन तानकर सो रहे थे। अचानक पुलिस पहुंच गयी। इस बीच स्थाई व गिरफ्तारी वारंट की तामीली करायी गर्यी। वहीं पुराने गुण्डे व हिस्ट्रीशीटरों के घर के दरवाजे खटखटाकर उनसे पूछा कि वर्तमान में क्या गतिविधियां चल रही है। बदमाशों ने बतायाकि वह फिलहाल शांति से अपना जीवन यापन कर रहे है। पुलिस अधिकारियों ने हिदायत दी है कि इसी तरह से रहना और बदमाशी या अपराध करने का ख्याल आयेतो उसे दिमाग से निकाल देना। एसएसपी धर्मवीर सिंह की देखरेख में चले कॉम्बिंग गश्त के बीच तमाम थानों में अवैयध शराब, अवैध हथियार के प्रकरण दर्ज किये। कॉम्बिंग गश्त के बीच एएसपी विदिता डागर, अनु बनेीवाल, सुमन गुंर्जर, जयराज कुबेर, प्रशिक्षु मनोज कुमार ने अपने अधीनस्थ थाना प्रभारियों के साथ चेकिंग की।
आठ घंटे में 14 प्रकरण दर्ज किए
गश्त के दौरान पुलिस ने जिले में 122 स्थाई वारंट, 111 गिरफ्तारी वारंट तामील कराए गए। साथ ही 152 गुंडा एवं 144 हिस्ट्रीशीटरों को चेक किया। गश्त के दौरान अवैध शराब के थाना बिजौली में 2, हजीरा, पुरानी छावनी, ग्वालियर, कंपू, घाटीगांव एवं मोहना में 1-1 प्रकरण पंजीबद्ध किया गया और थाना डबरा में अवैध हथियार का 1 प्रकरण दर्ज किया गया। शहर एवं देहात के विभिन्न थानों में धारा 151 जाफौ के 7 एवं धारा 107/116 जाफौ के तहत 2 कार्यवाहियां की गई। गश्त के दौरान मॉनीटरिंग करते हुए एसएसपी ग्वलियर ने निर्देश दिए कि अपराधियों की धरपकड़ के साथ एटीएम, होटल, लॉज, धर्मशाला, वाहनों की चेकिंग की जाए। निर्देश मिलते ही पुलिस ने शहर व देहात क्षेत्रों में स्थित एटीएम को सबसे पहले जांचा और जब ठीक स्थिति मिली तो वाहनों की चेकिंग में जुट गई। गश्त के दौरान जेल से रिहा होकर आए आरोपियों को चेक किया गया।
अपराधी के लिए कोई जगह नहीं
एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने बताया कि जिले में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। पुलिस पूरी मुश्तैदी के साथ अपराधियों की धरपकड़ कर रही है।

 

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भदावना धाम- ग्वालियर के पास आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम

ग्वालियर के उटीला थाने से 6 किमी की दूरी पर है भदावना धाम है।
यहां पर भगवान भोलेनाथ का प्राचीन मंदिर है ।
यहां पर भोलेनाथ के मंदिर पूजा अर्चना करने आते हे।
ग्वालियर से 25-30 किमी की दूरी है।
यह एक अच्छा पिकनिक स्पॉट भी है।
ग्वालियरवासियों को यह जानना काफी जरूरी है जिससे लोग यहां पर देखने के लिये आये

ग्वालियर। शहर की भागदौड़ से दूर शांति और आध्यात्मिकता की तलाश कर रहे लोगों के लिए भदावना धाम एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रहा है। ग्वालियर जिले में उटीला थाने से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान भगवान भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। वहीं ग्वालियर शहर से इसकी दूरी करीब 25 से 30 किलोमीटर है, जिससे यहां पहुंचना काफी आसान है।
श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र हैभोलेनाथ का मंदिर 
भदावना धाम में स्थित भोलेनाथ का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां विराजमान शिवलिंग काफी प्राचीन है और यहां सच्चे मन से पूजा.अर्चना करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि आसपास के गांवों और ग्वालियर शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैंए खासकर सोमवार और सावन के महीने में यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है।
प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी लोगों को आकर्षित करता
यह स्थान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहींए बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी लोगों को आकर्षित करता है। हरियाली और शांत वातावरण के बीच स्थित भदावना धाम पिकनिक स्पॉट के रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। परिवार और दोस्तों के साथ सुकून भरे पल बिताने के लिए यह जगह उपयुक्त मानी जा रही है।
पवित्र स्थल के बारे में नहीं जानते हैं ग्वालियरवासी
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी भी बहुत से ग्वालियरवासी इस खूबसूरत और पवित्र स्थल के बारे में नहीं जानते हैं। यदि इस स्थान का सही तरीके से प्रचार.प्रसार किया जाए, तो यह पर्यटन के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। प्रशासन और पर्यटन विभाग के लिए भी यह एक अच्छा अवसर है कि भदावना धाम को विकसित कर यहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंए जिससे दूर.दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।  कुल मिलाकर, भदावना धाम आस्था, प्रकृति और सुकून का ऐसा संगम है, जिसे हर ग्वालियरवासी को एक बार जरूर देखना चाहिए।

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पार्षद अर्पणा पाटिल बीच सड़क पर धरना दे रही है, बसंतबिहार से लेकर चेतकपुरी की खस्ता सड़कों की हालत पर

ग्वालियर. सड़कों की दुर्दशा को लेकर क्षेत्रीय पार्षद बसंतबिहार से चेतकपुरी रोड़ का हाल आप देख सकते है। पार्षद कहना है कि सबसे ज्यादा एक्सीडेंट यही पर होते है। मैं अभी 10 दिन का समय दे रही है। फिर देखना क्या होता है किसी को भी शर्म नहीं आ रही है। कोई अधिकारी भी इस दिशा में काम करने के लिये तैयार नहीं है।

सड़क के गड्‌ढे में धरने पर बैठीं पार्षद अपर्णा पाटिल।
सड़क के गड्‌ढे में धरने पर बैठीं पार्षद अपर्णा पाटिल।
पार्षद अर्पणा पाटिल करीब एक घंटे सड़क पर बैठी रहीं।
पार्षद अर्पणा पाटिल करीब एक घंटे सड़क पर बैठी रहीं।

एक घंटे सड़क पर बैठी रहीं
नाराज पार्षद करीब एक घंटे सड़क पर गड्‌ढे में बैठी रहीं और उनके आसपास से वाहन निकलते रहे। इस दौरान कॉलोनी के रहवासी भी पार्षद के पास पहुंचे। रहवासियों ने इसे जायज मांग बताया और पार्षद के आंदोलन में साथ देने को कहा। पार्षद ने कहा कि कॉलोनी की सड़क खराब हालत में है। लोग यहां गिरकर चोटिल हो रहे हैं और नगर सरकार को चिंता ही नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई, फिर सड़क का निर्माण क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि वे नगर सरकार को सड़क के गड्‌ढे दिखाने के लिए सड़क पर धरने पर बैठी हैं।
कॉलोनी के शशिभूषण राय ने बताया कि यह सड़क दो वर्ष से खराब है। जिससे आए दिन एक्सीडेंट होते हैं। बाइक से निकलने वाले अकसर गिरकर चोटिल हो जाते हैं। वहीं सड़क से उड़ने वाली धूल से लोग परेशान हैं। निगम हर सुविधा पर टैक्स तो लेता है, फिर सुविधा देने में पीछे क्यों है। कॉलोनी के निवासी मुकेश राय ने बताया कि यहां पर स्थिति सबसे खराब है। यह ग्वालियर की सबसे पॉश कॉलोनी है और यहां से सबसे ज्यादा टैक्स जाता है। उसके बाद सड़क की स्थिति सबसे बेकार है दो साल से। सबसे खराब स्थिति है तो कम से कम प्रशासन से यह निवेदन है कि जल्दी से जल्दी इसका निराकरण करें और अच्छी से अच्छी सड़क बनाएं।

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गैस कंपनियों ने उपभोक्ताओं से की अपील, लौटा दें अपना ‘LPG कनेक्शन’

भोपाल. पेट्रोलियम-एलपीजी संकट के बीच अब आपूर्ति राहत देने लगी है। बीते दिन अवकाश होने के बावजूद जिले की 50 एजेंसियों से 8000 से अधिक सिलेंडर की डिलीवरी की गई। पूरे दिन में 12750 सिलेंडर की बुकिंग हुई। जिला नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, अधिकतम दो से तीन दिन में एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी का लक्ष्य तय है। एजेंसियों को छुट्टी के दिन भी खुलवाया जा रहा है। यदि कोई उपभोक्ता बुकिंग डीएसी के साथ एजेंसी पर सिलेंडर लेकर पहुंचता है तो उसे भी डिलीवरी देने का कहा गया है।
9 लाख लीटर पेट्रोल व 7.50 लाख लीटर डीजल की मांग
जिले में अब पेट्रोल पंपों से भी भीड़ खत्म हो गई है। पेट्रोल पंपों को मांग के अनुरूप पेट्रोलियम की आपूर्ति जारी है। रविवार को तीनों ऑयल कंपनियों के डिपो में 4900 किलोलीटर पेट्रोलियम का स्टॉक था। जिले में पेट्रोलियम की रोजाना मांग 1650 किलोलीटर से ये लगभग तीन गुना है। बीते दिनों पेट्रोल पंपों पर 40 फीसदी तक मांग बढ़ गई थी। हालांकि अब ये सामान्य है। गौरतलब है कि जिले में रोजाना 9 लाख लीटर पेट्रोल व 7.50 लाख लीटर डीजल की मांग बनी हुई है।
पीएनजी कंपनियां सीधे उपभोक्ताओं से संपर्क करने में जुट गई
एलपीजी गैस संकट के बीच अब पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) सप्लाई करने वाली कंपनियां सीधे उपभोक्ताओं से संपर्क करने में जुट गई हैं। कंपनियां कॉलोनियों और हाउसिंग सोसायटियों के पदाधिकारियों से फोन, मैसेज और अन्य माध्यमों से संपर्क कर रही हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

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31 मार्च से पहले पूरे कर लें ये काम, नहीं तो लगेगी ब्याज की भारी पेनल्टी

ग्वालियर. कैलेंडर बदलने के साथ ही नया वित्तीय वर्ष भी शुरू होने जा रहा है। ऐसे में करदाताओं और व्यापारियों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वित्तीय वर्ष के समापन से पहले कई जरूरी औपचारिकताएं पूरी करना आवश्यक है। जानकारी के लिए बता दें कि 31 मार्च टैक्सपेयर्स और कारोबारियों के लिए आखिरी और बेहद अहम तारीख है। यदि इस तारीख तक टैक्स और जीएसटी से जुड़े लंबित कार्य पूरे नहीं किए गए, तो 1 अप्रैल से आर्थिक दंड और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पर भारी पेनल्टी और अतिरिक्त शुल्क लग सकता है
कई लोग आखिरी समय तक अपने टैक्स रिटर्न, जीएसटी फाइलिंग, बकाया टैक्स भुगतान या अन्य जरूरी दस्तावेजी प्रक्रियाओं को टालते रहते हैं। लेकिन 31 मार्च के बाद इन कार्यों को पूरा करने पर भारी पेनल्टी और अतिरिक्त शुल्क लग सकता है। इसलिए विभाग की ओर से करदाताओं और व्यापारियों को समय रहते अपने सभी लंबित कार्य पूरे करने की सलाह दी जा रही है।
1 अप्रैल से नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू
इसी को ध्यान में रखते हुए आयकर विभाग ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है। महावीर जयंती के अवकाश के बावजूद आयकर विभाग के कई दफ्तर खुले रहेंगे, ताकि करदाता अपने जरूरी कार्य निपटा सकें। विभाग का उद्देश्य यह है कि अंतिम समय में आने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

 

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MP में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में किया संशोधन

जबलपुर. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मामले में एक नया आदेश पारित किया है। दो याचिकाओं को हाई कोर्ट से रिकाल कर लिया है और 52 मामले जो पिछली बार सुप्रीम कोर्ट में ही रह गए थे, ट्रांसफर आर्डर में दर्ज नहीं हुए थे, उनको हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में अंतिम बहस शुरू होगी।
सभी मामलों को मप्र शासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि हाई कोर्ट में ओबीसी आरक्षण के संबंध में विचार अधीन सभी मामलों को मध्य प्रदेश शासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग खंडपीठ के समक्ष पेंडिंग थे। इनमें से लगभग एक दर्जन मामले, जिनकी नियमित सुनवाई के लिए ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा बार-बार अनुरोध किया जा रहा था। 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सभी मामलों को हाई कोर्ट को वापस भेज दिया था।
रिव्यू याचिका दर्ज की गई
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर की स्किल थी कि सुप्रीम कोर्ट का 19 फरवरी का आदेश त्रुटिपूर्ण है और त्रुटि सुधार के लिए दीपक कुमार पटेल के नाम से एक रिव्यू याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा विस्तृत सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित अपने आदेश 19 फरवरी 2026 में संशोधन कर 52 प्रकरण, जो मध्य प्रदेश शासन द्वारा ट्रांसफर कराए गए थे। उनको भी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिया गया है और दो विशेष अनुमत याचिकाएं जो पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट को वापस की गई थी, उनमें से दो एसएलपी जिनमे दीपक कुमार पटेल विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन व हरिशंकर बरोदिया विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन को अपने समक्ष सुनवाई हेतु वापस रिकॉल कर लिए गए हैं। शेष आदेश दिनांक 19 फरवरी यथावत रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर आज 30 मार्च 2026 को अपलोड किया गया। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा उन समस्त मामलों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दो सुनवाई नियत हैं।

 

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ग्वालियर में फर्जी सिम नेटवर्क का खुलासा, ऑपरेशन FACE में पहली बड़ी कार्रवाई

ग्वालियर. शहर में फर्जी सिम कार्ड के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यहां एक पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) शॉप संचालक ने एक ही व्यक्ति के आधार और फोटो का इस्तेमाल कर सैकड़ों लोगों के नाम पर फर्जी सिम कार्ड जारी कर दिए। मामले का खुलासा तब हुआ, जब जिस व्यक्ति की फोटो सिम फॉर्म में लगाई जा रही थी, वह खुद पुलिस के पास पहुंच गया। पुलिस को आशंका है कि इन फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी में किया गया होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के खुलासे के बाद कई साइबर फ्रॉड मामलों की कड़ियां जुड़ सकती हैं।
आरोपी उमेश ने अपने साथी आशीष को लालच देकर शामिल किया
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी उमेश कुशवाह (निवासी गिरवाई, मूल रूप से भिंड) ने अपने साथी आशीष नागर को लालच देकर इस काम में शामिल किया था। आशीष का काम ग्राहकों की जगह खुद की फोटो लगाकर सिम एक्टिवेट करना था। इसके बदले उसे हर सिम पर करीब 500 रुपए मिलते थे, जबकि आरोपी एक सिम के लिए एक से डेढ़ हजार रुपए तक वसूलता था। जांच के दौरान पता चला कि मुख्य आरोपी को पुलिस कार्रवाई की भनक लग गई थी। उसने इंस्टाग्राम मैसेंजर के जरिए अपने साथी आशीष को मैसेज भेजकर अंडरग्राउंड होने की सलाह दी। इसी तरीके से सैकड़ों सिम एक ही फोटो और आधार के जरिए फर्जी दस्तावेज बनाकर एक्टिव कर दिए गए।
ग्वालियर में पहली बड़ी कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन फेशियल ऑथेंटिकेशन कम्प्लायंस इंफाेर्समेंट के तहत यह ग्वालियर में पहली बड़ी कार्रवाई है। झांसी रोड थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
पुलिस का कहना और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं
पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। जांच आगे बढ़ने पर फर्जी सिम नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अफसरों की मानें तो यह फर्जी सिम नेटवर्क का खुलासा होने के बाद कई ऑनलाइन फ्रॉड में इन सिम कार्ड्स का उपयोग होना सामने आएगा।

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मौत के बाद आया प्रमोशन का आदेश, कर्मचारी के परिवार को 2002 मिला पदोन्नति फायदा, हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी मृत्यु के साथ समाप्त नहीं होते

ग्वालियर. एक अहम खबर सामने आयी है कि जहां हाईकोर्ट की एकलपीठ ने एक बड़े फैसले में न्याय की मिसाल पेश की है। हाईकोर्ट ने सीनियर एग्रीकल्चर डवलपमेंट अधिकारी रहे डॉ. राधाकृष्ण शर्मा को 2002 से प्रमोशन देने का आदेश दिया है। अहम बात यह हैकि डॉ. शर्मा अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अधिकारी व्यक्ति के साथ समाप्त नहीं होते है। दरअसल, डॉ. राधाकृष्ण शर्मा अपने जूनियर अधिकारियों से वरिष्ठ थे।लेकिन साल 2002 में जब पदोन्तियां हुई, तो उनके जूनियर को पदोन्नति मिल गयी थी। जबकि उनकी पदोन्नति रोक दी गयी। विभाग ने इसके पीछे वजह बताई कि एक लंबित आपराधिक मामला और उनकी गोपनीय रिपोर्ट यानी एसीआर, हालांकि बाद में डॉ. शर्मा उस आपराधिक मामले में बरी हो गये थे। फिर भी उन्हें पदोन्नति नहीं दी गयी।
18 वर्षो की कानूनी लड़ाई के बाद निधन
न्याय के लिये डॉ. शर्मा ने वर्ष 2008 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन अफसोस 18 साल लम्बी कानूनी लड़ाई के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके पुत्र रमन शर्मा ने इस केस को आगे बढ़ाया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा
अगर किसी कर्मचारी की पदोन्नति विभागीय गलती से रोकी जाती है, तो उसे पूरा लाभ मिलना चाहिए। “नो वर्क-नो पे” का सिद्धांत ऐसे मामलों में लागू नहीं होगा। बिना बताए गए एसीआर को पदोन्नति का आधार बनाना कानून के खिलाफ है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
कोर्ट का अंतिम आदेश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि डॉ. राधाकृष्ण शर्मा को 28 अक्टूबर 2002 से पदोन्नत माना जाए, उसी तारीख से सभी एरियर, वेतन, वरिष्ठता और अन्य लाभ दिए जाएं और यह पूरी राशि उनके परिवार को दी जाए। कोर्ट ने माना कि पदोन्नति न मिलना डॉ. शर्मा की गलती नहीं, बल्कि विभाग की लापरवाही थी। यह फैसला न केवल एक परिवार को न्याय देता है, बल्कि यह भी बताता है कि अधिकार कभी खत्म नहीं होते, चाहे इंसान इस दुनिया में रहे या नहीं।

Newsमप्र छत्तीसगढ़राष्ट्रीय

8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट 18 महीने में आयेगी-केन्द्रीय राज्यंमंत्री

नई दिल्ली. 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार ने एक बड़ा अपडेट जारी किया है। इससे लाखों कर्मचारियेां और पेंशनर्स के लिये सरकार ने 8वें वेतन आयोग का लेकर कुछ स्पष्टता के संकेत दिये है। लेकिन अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। संसद में केन्द्र सरकार ने बताया है कि कब तक 8वॉ वेतन आयोग लागू किया जा सकता है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा है कि सरकार 3 नवंबर 2025 को औपचारिक रूप से 8वें केन्द्रीय वेतन आयोग की स्थापना की थी।
उन्होंने आगे कहा है कि आयोग को केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते ओर पेंशन पर अपनी सिफारिशें रिपोर्ट पेश करने के लिये 18 माह का वक्त दियागया है। उन्होंने 8वें वेतन आयोग कब लागू होगा, इस सवाल का उत्तर देते हुए कहा है कि यह तभी पता चल पायेगा। जब रिपोर्ट पेश की जायेगी। उसे एक्सेप्ट किया जायेगा और इसके बाद तय हो सकेगा कि इस आयोग को कब से लागू किया जाये, खैर अभी आयोग इस पर रिपोर्ट तैयार करने में जुटा हुआ है। 8वेंतन आयोग को लेकर आयोग एक तरह से काम नहीं कर रहा है। यह अलग-अलग कैटेगरी से एक्टिव तरीके सुझाव पाने का प्रयास कर रहा है। माईगांव पोर्टल पर 18 तरह के सवाल अपलोड किये गये है। मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, कर्मचारी संगठनों, शिक्षाविद्ों और यहां तक कि लोगों में भी फीडबैक मांगा गया है। फीडवैक देने की अंतिम तारीख 31 मार्च है। सिर्फ ऑनलाइन तरीके से ही फीडबैक लिया जायेगा। वेतन का लेकर कहा गया है।
संशोधित वेतन का भुगतान भले ही बाद किया जायेगा। लेकिन इसका कैलकुलेशन 1 जनवरी 2026 से की जायेगी। इसी दिन से 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया है।
जिसमें पूर्व आयोग का कार्य और आज की अर्थव्‍यवस्‍था शामिल है।  6वें वेतन आयोग के तहत करीब 40 फीसदी सैलरी बढ़ी थी, जबकि 7वें वेतन आयोग के तहत 23 से 25 फीसदी के आपास बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसमें 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर है। इसी बात पर 8वां वेतन आयोग के तहत भी सैलरी निर्भर करती है।  एक्‍सपर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अनुमान है, अंतिम फैसला कई आंकड़ों पर निर्भर करता है। उन्‍होंने समझाया कि 8वें आयोग के लिए ज्‍यादातर अनुमानां में 20 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कही गई है, जिसमें फिटमेंट फैक्‍टर 2.4 से 3 के बीच और बेसिक सैलरी शामिल है।  लेकिन अंतिम आंकड़ा अगले 12 से 18 महीनों में महंगाई, टैक्‍स की उपलब्‍धता और राजनीतिक इच्‍छा पर निर्भर करता है।

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यति नरसिंहानंद बोले-गांधी समाज के लिय हैं जहर, गोडसे ने हत्या नहीं वध किया

ग्वालियर. जूना अखाड़े के डासना के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी रविवार को ग्वालियर आये। यहां वह हिन्दू महासभा कार्यालय पहुंचे और पत्रकारों से चर्चा की। इस बीच उन्होंने महात्मा गांधी को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा कि उन्हें समाज के लिये नुकसानदायक बताया और नाथूराम गोडसे द्वारा की गयी हत्या को वध करार दिया है।
नाथूराम गोडसे को बताया बलिदानी
पत्रकारों से चर्चा के बीच बताया यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा है कि उनके लिये यह सौभाग्य की बात है। वह अपने सहयोगी जयवीर भारद्वाज के निमंत्रण पर गोडसे से जुडे स्थल पर पहुंचे। वीर सावरकर की प्रतिमा को नमन किया। उन्होंने हिन्दू महासभा भवन आने को भी अपने लिये गौरवपूण्र बताया।
टगर हम सावरकर जी के सिद्धांतों पर नहीं चलेंगे तो सनातन धर्म बहुत जल्दी विनष्ट हो जायेगा। अमर बलिदानी पंडित नाथूराम गोडसे जी वह व्यक्ति थे। जिन्होंने सावरकर के बताये हुए रास्ते पर चल कर जैसे हजारों बलिदानियों ने हजारों क्रांतिकारियों ने सावरकर जी की बातों को माना है। उसी तरह से वीर विनायक सावरकर जी की बात को अमर बलिदानी पंडित नाथूराम गोड़से जी ने भी माना और गांधी का वध किया है।
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी बोले- गांधी समाज के लिए जहर
महामंडलेश्वर ने कहा कि यह स्वतंत्र भारत का पहला अमूल्य बलिदान था, जो सनातन धर्म की रक्षा के लिए दिया गया। उनके अनुसार, नाथूराम गोडसे एक विचार पुंज हैं और यदि सनातन धर्म व हिंदू समाज उनका सही मूल्यांकन नहीं करेगा, उन्हें नहीं समझेगा, तो हिंदू समाज बहुत जल्दी विनष्ट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गांधी समाज के लिए जहर हैं। उनके मुताबिक, गांधी और उनके जैसे नेता अपने लोगों को दूसरों के लिए धोखा देते हैं, जबकि नाथूराम गोडसे उस नस्तर की तरह हैं, जिससे उस कैंसर और जहर का इलाज किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्मियों की ओर से अब तक नाथूराम गोडसे के साथ जो हुआ, उसके लिए वे उनसे क्षमा प्रार्थी हैं।