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महाराष्ट्र के मारूति मंदिर की छत गिरने से 30-40 घायल

परभणी. महाराष्ट्र के परभणी जिले में यशवाड़ी देवस्थान में हनुमान जी के मारूति मंदिर के हॉल की अचानक छत गिरने से 30-40 श्रद्धालु घाय लो गये है। शुरूआती रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ लोगों की मौत होने की खबर आ रही है। लेकिन इसकी अभी फिलहाल पुष्टि नहीं हो पायी है। शनिवार होने की वजह से मंदिर में कीर्तन और महाप्रसाद लेने के लिये भी ड़ थी। पुलिस और स्थानी प्रशासन घटनास्थल पर बचाव अभियान चला रहे है। घायलों को अस्पतला पहुंचाया जा रहा है।

हादसे की तस्वीरें…

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सभा मंडप के मलबे में करीब 30 से 40 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।  हादसे में कई श्रद्धालुओं के घायल होने की खबर है। जबकि कुछ लोगों की मौत की भी आशंका व्यक्त की जा रही है।  हालांकि मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए. बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है।

खबर अपडेट हो रही है

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने किये पीताम्बरा पीठ में की पूजा अर्चना, आम श्रद्धालुओं के डेढ़ घंटे तक प्रवेश रहा बंद

दतिया में राज्य की सुख-समृद्धि के लिये सीएम योगी आदित्यनाथ ने मां बगलामुखी की पूजा अर्चना की
दतिया. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शनिवार की सुबह 10.15 बजे विशेष विमान से दतिया हवाई पट्टी पहुंचे। यहां से वह सीधे विश्व प्रसिद्ध पीताम्बरा पीठ पहुंचे। जहां उन्होंने मां बगलामुखी और महाभारत कालीन वनखंडेश्वर महादेव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की है। दर्शन के बाद वह सड़क मार्ग से झांसी के लिये रवाना हो गये। जहां वह 1500 करोड़ रूपये के विकास कार्यो का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन को लेकर पीताम्बरा पीठ परिसर में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किये गये थे। वीआईपी मूवमेंट के चलते मंदिर परिसर को लगीाग डेढ़ घंटे तक आम श्रद्धालुओ के लिये पूरी तरह से बंद रखा गया। इस बीच न केवल दर्शनार्थियों बल्कि कई पंडा-पुजारियों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गयी थी। योगी आदित्यनाथ लगभग 15 मिनट तक पीताम्बरा पीठ में मौजूद रहें। उन्होंने विधि-विधान से मां बगलामुखी की पूजा कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की है। दर्शन के दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की टीम मुस्तैद रहीं। वहीं, काफी देर से बाहर इंतजार कर रहे कुछ श्रद्धालुओं ने एंट्री रोके जाने की इस व्यवस्था पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की।
श्रद्धालुओं ने किया 1 घंटे इंतजार
ग्वालियर से दर्शन के लिये आये दुर्गेश भार्गव ने बताया है कि उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया। वजह पूछने पर बताया गया कि यूपी के सीएम के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था लागू की गयी है। वहीं एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि तेज धूप से बचने के लिये वह सुबह ही माता के दर्शन के पहुंची थी। लेकिन उन्हें भी लगभग 1 घंटे तक इंतजार करना पड़ा है और बाद में मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गयी।

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एक IAS की सेवा समाप्त, 2 IAS ओर PCS सहित 12 पर गिरी गाज, 54 करोड़ की डील ने हिला दिया पूरी नौकरशाही को

देहरादून. उत्तराखंड की नौकरशाही में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि एक जमीन खरीद के मामले में प्रशासनिक तंत्र की इतनी बड़ी परतें उधेड़ दी हों। एक आईएएस अफसर बर्खास्तगी की संस्तुति, 2 आईएएस और एक पीसीएस अफसर के खिलाफ कठोर कार्यवाही, कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन और मुकदमें की तलवार लटकी हैं।
लगभग 14 करोड़ रूपये कीमत बताई जा रही है। भूमि का 54 करोड़ रूपये में खरीदने के आरोपों से यह मामला शुरू हुआ था। सीएम पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने जिस सख्ती के साथ कार्यवाही की है। उसने सचिवालय से लेकर जिलों तक एक स्पष्ट संदेश पहुंचाया है। सरकारी धन से जुड़े मामलों में अभी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।
कैसे खुलासा हुआ मामले का
अप्रैल 2025 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गयी एक भूमि खरीद अचानक सुर्खियों में आ गया। आरोप लगा है कि जिस जमीन की वास्तविक कीमत करीब 14 करोड़ रूपये के आसपास थी। उसे लगभग 54 करोड़ रूपये में खरीद लिया गया। प्रकरण सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक सवाल उठने लगे। आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया? क्या जमीन की वास्तविक जरूरत थी। क्या खरीद प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप् थी? इन सवालों के जवाब तलाशने केलिये सीएम पुष्करसिंह धामी ने शासन में सचिव रणवीर चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
सस्पेंशन से लेकर बर्खास्तगी तक
मामला सामने आने के बाद सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर कमेन्द्र सिंह, नगर आयुक्त वरूण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को निलंबित कर दिया था। उस वक्त भी इस कार्यवाही अभूतपूर्व माना गया था। लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही का दायरा और बढ़ गया। अब मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं है। बल्कि तक आईएएस अधिकारी की सेवा समाप्ति की संस्तुति तक पहुंच गया है।
अब केंद्र सरकार की भूमिका अहम
चूंकि मामला अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में केंद्र सरकार की भी भूमिका रहेगी. राज्य सरकार ने दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को प्रस्ताव भेजने का फैसला किया है।  इसके बाद केंद्रीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा   है। कुछ बड़े अधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।  सरकार का दावा है कि चाहे अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि सरकारी धन के उपयोग में अनियमितता या नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो कार्रवाई तय है।

 

 

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KMJ चिटफंड की प्रॉपर्टियों की नीलामी पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इंकार

ग्वालियर. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर बेंच ने चिटफंड कम्पनी केएमजे लैंड एंड डवलपर्स इंडिया लिमिटेड की संपत्तियों की ई-नीलामी पर रोक लगाने मना कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले से कम्पनी द्वारा ठगे गये हजारों निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। जो सालों से अपनी जमा राशि पाने का इंतजार कर रहे है। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया है कि कंपनी की सपित्तयों की ई-नीलामी की प्रक्रिया बिना किसी रूकावट के जारी रहेगी। हालांकि कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि नीलामी से मिलने वाली पूरी राशि एक राष्ट्रीयकृत बैंक के एस्क्रो अकाउंट में जमा कराई जाये और हाईकोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति या संस्था को राशि वितरित नहीं की जायेे।
क्या है पूरा मामला
यह मामला विशेष न्यायालय (निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम) ग्वालियर के 17 सितंबर 2022 के आदेश से जुड़ा है। विशेष न्यायालय ने राज्य सरकार और प्रशासन को निर्देश दिया था कि केएमजे कंपनी की संपत्तियों को कुर्क कर उनकी नीलामी की जाए और उससे प्राप्त राशि निवेशकों में वितरित की जाए।
इस आदेश को चुनौती देते हुए भूरेलाल और अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि कंपनी के खिलाफ SEBI का अंतरिम आदेश प्रभावी है और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में कंपनी को बंद करने की प्रक्रिया लंबित है। ऐसे में ई-नीलामी पर रोक लगाई जानी चाहिए।
धनराशि की सुरक्षा हाईकोर्ट सख्त
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि नीलामी से प्राप्त पूरी राशि एस्क्रो अकाउंट में सुरक्षित रखी जायेगी। इस धनराशि का वितरण तभी होगा। जब होईकोर्ट इसकी अनुमति देगा। इससे निवेशकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। गौरतलब है कि केएमजे चिटफंड कम्पनी पर निवेशकों से करोडों रूपये एकत्र करने और बाद में राशि वापिस नहीं करने के आरोप लगे हैं। मामले में वर्षो से कानूनी कार्यवाही चल रही है। बड़ी संख्या में निवेशक अपने पैसे की वापिसी का इंतजार कर रहे है।

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एलिवेटेड रोड के लूप में मुआवजा की कहानी, पोल खुली तो वापिस लिया दोषी कौन, इस पर चुप्पी

ग्वालियर-एलीवेटेड रोड के लूप निर्माण के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। गोलेपुरा के सर्वे नंबर-202 की जमीन के अधिग्रहण में एक पक्ष को 40 लाख 63 हजार 350 रुपए का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। बाद में आपत्ति और जांच के बाद यह राशि वापस सरकारी खाते में जमा करा ली गई, लेकिन भुगतान में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हो सकी है।
गोलेपुरा में 665 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जहां करीब 20 दुकानें बनी हुई हैं। अन्य प्रकरणों की तरह यहां भी संयुक्त टीम ने सर्वे और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर मुआवजा अवॉर्ड जारी किया था। इसी दौरान विवेक गुप्ता को 36.20 वर्गमीटर भूमि और संपत्ति के एवज में भुगतान किया गया।
तहसीलदार की भूमिका पर उठे सवाल
जांच में पीडब्ल्यूडी के उपयंत्री, निगम के क्षेत्रीय अधिकारी, पटवारी और राजस्व निरीक्षक को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना है। वरिष्ठ अफसरों का मानना है कि मुआवजा प्रक्रिया में तहसीलदार की भूमिका भी अहम रही। अब लश्कर एसडीएम से पूछा है कि मामले से जुड़े तहसीलदार का नाम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया।
3.61 हेक्टेयर भूमि चाहिए
कुल 3.61 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की जानी है।
पहला चरण: छह गांवों की 1.90 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा।
दूसरा चरण: चार क्षेत्रों की 1.72 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी।
भूमि अधिग्रहण इसलिए
13.3 किमी लंबा एलीवेटेड रोड बनाया जा रहा है।
10.48 किमी लंबा लूप, 552 पिलर तैयार होंगे।
परियोजना लागत करीब 1373 करोड़ रुपए।
प्रोजेक्ट 2 चरणों में पूरा होगा।
8 हेक्टेयर भूमि की जरूरत।
भुगतान पर 5 लोगों की आपत्ति, तब जांच
कुछ समय बाद 5 लोगों ने भुगतान पर आपत्ति दर्ज कराई तो नायब तहसीलदार स्तर पर जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी। जांच में सामने आया कि विवेक गुप्ता के खाते में 40.63 लाख रुपए अतिरिक्त ट्रांसफर हो गए थे। तब राशि वापस लेने की कार्रवाई की और संबंधित पक्ष ने चेक द्वारा पूरी रकम सरकारी खाते में जमा करा दी।
किसने गड़बड़ी की, रिपोर्ट मांगी है
“अतिरिक्त भुगतान की पूरी राशि वापस जमा हो चुकी है। यह गड़बड़ी कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट एसडीएम से मांगी गई है।”
रुचिका चौहान, कलेक्टर

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ग्वालियर में एलिवेटेड रोड निर्माण के कारण बदले गए रूट में पहले ही दिन लगा भीषण जाम

ग्वालियर. एलिवेटेड रोड निर्माण के चलते फूलबाग चौराहे से गुरूद्वारा तक के मार्ग पर ट्रैफिक अगले दो महीने के लिए बंद कर दिया गया है और वैकल्पिक रास्तों से वाहनों को निकाला जा रहा है। शुक्रवार को इस व्यवस्था का पहला दिन था इसलिए कइ लोगों को पता ही नहीं था। यही कारण था पहले ही दिन लोग सीधे गुरूद्वारा मार्ग तक पहुंचे फिर यहां से वाहनों को वापस मोडना पडा। इसके चलते इस पूरे रूट पर ट्रैफिक व्यवस्था मार्ग तक पहुंचे फिर यहां से वाहनों को वापस मोडना पडा। इसके चलते इस पूरे रूट पर ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई और वाहन रेंग-रेंगकर चले। ट्रैफिक पुलिस भी सिर्फ एडवाइजरी जारी करने तक ही सीमित रही और चौराहों से नदारद रही। जब जाम लगने लगा तब पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
लक्ष्मीबाई समाधि से वाहनों की आवाजाही रोकी गइ
गुरूद्वारा से रास्ता बंद कर दिया गया है, वहीं रेलवे स्टेशन की तरफ से आने वाले वाहनों के लिए लक्ष्मीबाई समाधि से वाहनों की आवाजाही रोकी गई है। नदीगेट से मोती तबेला तिराहे से वाहन सीधे जा रहे थे। यहां से वापस लौट रहे थे। यहां कई वाहन जब आगे नहीं जा सके तो शिंदे की छावनी की तरफ घुस गए इससे जाम लगने लगा। सुबह यहां न तो ट्रैफिक पुलिस थी और न ही इंदरगंज थाने का फोर्स लगा था।
जब जाम लगने लगा तो दारोगा और आरक्षक पहुंचे फिर पुलिस द्वारा मोती तबेला तिराहे पर स्टॉपर लगा दिया गया जिससे वाहन गुरूद्वारा की ओर न जा सकें। इसके बाद वाहन चालक सडक के दूसरी तरफ से गुरूद्वारे की तरफ जाने लगे। यहां कुछ कार व लोडिंग वाहन गलत दिशा में प्रवेश कर गए।
यहां से वापस आना संभव नहीं था इसलिए शिंदे की छावनी वाले रास्ते पर फिर गलत दिश में घुसे। यहां से नौगजा रोड होते हुए पडाव की तरफ जाने के लिए वाहन चालक गलत दिशा में प्रवेश कर गए और आमने-सामने फंस गए। अर्जी वाले गणेश मंदिर के सामने से लेकर शिंदे की छावनी तिराहे तक जाम लगा। गलत दिशा में प्रवेश करने वाले वाहन चालकों को पुलिसकर्मियों ने समझाइश देकर लौटाया।

 

 

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MP में कैंसर की दवाएं 50% तक महंगी

भोपाल. मध्य प्रदेश में अब कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इससे एक कीमो का खर्च 2 से 3 हजार रुपए ज्यादा लगेगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन के दाम बढ़ा दिए हैं। एक्सपर्ट की माने तो यह दोनों दवाएं ओवरी, फेफड़े, स्तन, सिर-गर्दन समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में उपयोग होती हैं। कई मरीजों को 4 से 6 या उससे अधिक कीमो साइकिल लगती हैं, ऐसे में पूरे इलाज पर हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, कंपनियों ने दवाओं का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, लेकिन करीब एक महीने मांग अनुरूप सप्लाई करने में लगेगा। दूसरी ओर, शहर के कैंसर अस्पतालों में कीमो की दवाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। युद्ध के चलते सप्लाई चैन बाधित हुई थी। घाटे के चलते दवा कंपनियों ने प्रोडक्शन पूरी तरह बंद कर दिया था।


7 प्रकारों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं महंगी हुई
पेट्रोल-डीजल और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी खबरें इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। इसने भारत में कैंसर के इलाज को भी मुश्किल बना दिया है। स्थिति ऐसी है कि कैंसर के 7 प्रमुख प्रकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कमी से हर 100 में से करीब 70 मरीज प्रभावित हो सकते हैं।

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अलापुर बांध-विभागीय अधिकारी ही दोषी है डूब इलाके में 100 मकान बनते रहे और अधिकारी अनदेखी करते रहे, अधिकारियों के परिजनों के नाम प्लॉट है

ग्वालियर. मानसून दस्तक देने वाला है। अगर बरसात पिछले वर्ष की तरह हुई तो शहर के आसपास के बांध लबालध होना तय है। इसके बाद भी अभी तक प्रशासन ने बांध में बनी कॉलोनियों को लेकर कोई प्लानिंग नहीं की है। यही वजह है कि शहर के पास अलापुर बांध की कॉलोनी में 100 से ज्यादा मकानों में निवास कर रहे परिवारों के लिये फिर से खतरा पैदा हो सकता है। पिछले साल अलापुरा बांध के डूब इलाके में 70 हेक्टर जमीन और उस पर बने मकानों में बांध का ओवरफ्लो पानी भर गया था। ऐसा बांधबनने के 22 साल के बाद हुआ था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने जमीन के मुआवजे के लिये 410 करोड़ रूपये का प्रस्ता शासन के पास भेजा था जिस अभी को निर्णय नहीं हो पाया है।
इस बांध की स्थिति को जल संसाधन विभाग ने मानसून पहले निरीक्षण रिपोर्ट में ठीक बतायास है। बांध में कहीं कोई टूट-फूट नहीं यानी की पानी भरने के लिये उपयुक्त है। लेकिन पानी ओवरफ्लो हुआ तो डूब इलाके के निवासियों का क्या हो इस पर कोई विचार नहीं किया है।
इन गांव की यह जमीन डूब क्षेत्र में
अलापुर -10.64 हेक्टे.
हबीपुर – 25.72 हेक्टे.
भाटखेड़ी – 22.59 हेक्टे.
दंगियापुरा – 8.78 हेक्टे.
बरऊआ (पिछोर) 2.90 हेक्टेयर
1987 में योजना बनी थी और 2004 में बांघ बना था
अलापुर बांध बनाने की परियोजना 1987 में बनी थ्राी। अलापुर बांध के लिये 2000 में जमीन अधिग्रहण व भुगतान की प्रक्रिया पूरी हुई और 2004 में बांध बनकर तैयार हुआ था। बांध के लिये 30 प्रतिशत जमीन का पूर्ण भुगतान किया गया था। जबकि 70 प्रतिशत जमीन का शासन ने 80प्रतिशत भुगतान किया गया था। 70 हेक्टर जमीन का पूर्ण भुगतान नहीं होने से यह जमीन विभाग के नाम पर नहीं चढ़ सही।
80% भुगतान के बाद भी बनते गये डूब क्षेत्र में बनते गये मकान
डूब इलाके की जमीन पर 80प्रतिशत भुगतान केबाद भी खेतों प्लॉटिंग कर मकान बनते रहे। इसके लिये जल संसाधन विभाग की अनदेखी और मिलीभगत से मकान बने है। सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जल संसाधन के विभाग के अधिकारी जेब गर्म करके कॉलोनी बसाने के लिये एनओसी दी है। आज भी आप प्लॉट खरीदने जाये तो कॉलोनाइजर आपको एनसीओ दिखाते है। इसके बाद ही प्लॉट की रजिस्ट्री हो पाती है। इन अवैध कॉलोनियों में विभागीय अधिकारियों के परिजनों के नाम प्लॉट है। इसकी गहनता से जांच हो इसका खुलासा हो सकता है। यही वजह है कि डूब इलाके में आज भी प्लॉटिंग हो रही है। लेकिन जल संसाधन से लेकर प्रशासन व नगरनिगम किसी भी विभाग के अधिकारी ने जमीन का 80 प्रतिशत पैसा लेने वाले लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं की है। अब जब समस्या खड़ी हो गयी है तब नये-नये बहाने बना रहे है।
बांध बनने के समय 9 से 15 लाख थी गाइड लाइन
अलापुर बांध की डूब क्षेत्र की जमीन अधिग्रहित करने के प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2002 में 5 गांवों में जमीन की गाइड लाइन 9 से 15 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर तक की थी। यह गाइड लाइन वर्तमान में बढ़कर 1.25 करोड़ रुपए से 4 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई। अब इसी क्षेत्र में 100 से अधिक मकान भी बन गए हैं। अलापुर बांध के डूब क्षेत्र के पांच गांव की जमीन 70 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा वितरण के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक मंजूरी के बाद इस जमीन के नए मालिकों का सर्वे कराया जाएगा। जिस समय बांध बनकर तैयार हुआ उस समय डूब क्षेत्र के ‌खेत थे और अब वहां पर खेतो‌ं में प्लॉट काटकर मकान बन गए हैं।

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ग्वालियर में 5 हजार की रिश्वत लेते पकड़ाई पटवारी

ग्वालियर. लोकायुक्त पुलिस ने ग्वालियर में शुक्रवार शाम तहसील तानसेन के हल्का गूंधारा मे पदस्थ महिला पटवारी रेखा शाक्य को किसान से रिश्वत की दूसरी किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पटवारी जमीन के सीमांकन और नामांतरण दाखिल-खारिज की फाइल आगे बढाने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रही थी। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है, साथ ही संबंधित विभाग को भ्रष्ट पटवारी पर कार्रवाई के लिए लिखा है।
15000 रुपए की रिश्वत मांग रही थी
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा ने बताया कि सिरसौद मुरार निवासी मंशाराम ने 16 जून 2026 को लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में एक लिखित श्किायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि ग्राम गूंधारा में उसकी बहन गुड्डी की जमीन का सीमांकन होना था। उसकी पत्नी सावित्रीबाई के नाम पर जमीन का नामांतरण होना था। इस कार्य को करने के एवज में हल्का पटवारी रेखा शाक्य पत्नी कृष्णकांत शाक्य लगातार चक्कर कटवा रही थी और 15000 रुपए की रिश्वत मांग रही थी।
शिकायत मिलते ही लोकायुक्त एसपी ने मामले की सत्यता जांचने के लिए प्राथमिक सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान जब पीड़ित मंशाराम पटवारी से मिला, तो आरोपी रेखा शाक्य ने सौदेबाजी करते हुए शिकायतकर्ता से एडवांस के रूप में 3,500 रुपए ले लिए। वॉयस रिकॉर्डर और लोकायुक्त की जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि शत-प्रतिशत सही पाई गई, जिसके बाद शुक्रवार को ट्रैप की रणनीति तैयार की गई।

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MP में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, फाइनल पेमेंट की व्यवस्था बदली

भोपाल. सेवानिवृत्त या मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों को किए जाने वाले अंतिम भुगतान की व्यवस्था में प्रदेश सरकार ने परिवर्तन किया है। अब अंतिम भुगतान के प्रकरणों के निराकरण के लिए कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन प्र्रक्रिया निर्धारित की गई है। संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा को भुगतान सहित अन्य सभी प्रक्रियाओं के लिए अधिकृत किया गया है।
भविष्य निधि कटौती का सत्यापन और समय-सीमा
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी द्वारा जारी किए गए निर्देश के अनुसार भविष्य निधि कटौती का विवरण कर्मचारी प्रति माह कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली के माध्यम से देख सकेंगे। कोई गडबडी नजर आने पर अभ्यावेदन आहरण एवं संवितरण अधिकारी को देंग। सेवानिवृत्ति से चार माह पूर्व जब अंशदान की कटौती बंद कर दी जाती है तब कर्मचारी ब्याज की गणना का सत्यापन करेंगे। चार माह पहले ही अपना अंतिम भुगतान आवेदन प्रस्तुत करेंगे।
बैंक खाते में बदलाव पर रोक व ओटीपी की सुरक्षा
ऑनलाइन आवेदन जमा होने और वास्तविक भुगतान प्राप्त होने तक अपने वेतन से संबद्ध बैंक खाते में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन रने की अनुमति नहीं रहेगी। ऑनलाइन आवेदन के समय ओटीपी प्राप्त होगा, जिसे सुरक्षित रखने का दायित्व कर्मचारी का होगा। कर्मचारी से प्राप्त आवेदन का मिलान विभाग में संधारित निधि की पासबुक एवं सेवा पुस्तिका से होगा और उसकी प्रविष्टि कराई जाएगी। सत्यापित पृष्ठों को स्कैन कर कोषालयीन कंप्यूटर प्रणाली पर अपलोड किया जाएगा।
छह माह के वेतन वाले खाते में ही ट्रांसफर होगी राशि
आहरण एवं संवितरण अधिकारी से प्राप्त प्रकरणों का परीक्षण करने के बाद संचालक पेंशन के द्वारा भुगतान संबंधी आदेश जारी किए जाएंगे। भुगतान की राशि सीधे कर्मचारियों के उसी खाते में अंतरित की जाएगी, जहां सेवानिवृत्ति से पूर्व निरंतर छह माह का वेतन जमा किया गया हो।
कर्मचारी की मृत्यु होने पर भुगतान के नियम
कर्मचारियों की मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित कार्यालय द्वारा नाम, जन्मतिथि, बैंक खाते का सत्यापन किया जाएगा। विवरण अपूर्ण होने पर स्वजन से जानकारी प्राप्त कर उसे अद्यतन किया जाएगा। नामांकित व्यक्ति के बैंक खाते में भुगतान होगा। नामांकित व्यक्ति के अल्पायु होने पर वैध संरक्षक के साथ संयुक्त बैंक खाते में राशि जमा कराई जाएगी।

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