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एलिवेटेड रोड के लूप में मुआवजा की कहानी, पोल खुली तो वापिस लिया दोषी कौन, इस पर चुप्पी

ग्वालियर-एलीवेटेड रोड के लूप निर्माण के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। गोलेपुरा के सर्वे नंबर-202 की जमीन के अधिग्रहण में एक पक्ष को 40 लाख 63 हजार 350 रुपए का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। बाद में आपत्ति और जांच के बाद यह राशि वापस सरकारी खाते में जमा करा ली गई, लेकिन भुगतान में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हो सकी है।
गोलेपुरा में 665 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जहां करीब 20 दुकानें बनी हुई हैं। अन्य प्रकरणों की तरह यहां भी संयुक्त टीम ने सर्वे और मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर मुआवजा अवॉर्ड जारी किया था। इसी दौरान विवेक गुप्ता को 36.20 वर्गमीटर भूमि और संपत्ति के एवज में भुगतान किया गया।
तहसीलदार की भूमिका पर उठे सवाल
जांच में पीडब्ल्यूडी के उपयंत्री, निगम के क्षेत्रीय अधिकारी, पटवारी और राजस्व निरीक्षक को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना है। वरिष्ठ अफसरों का मानना है कि मुआवजा प्रक्रिया में तहसीलदार की भूमिका भी अहम रही। अब लश्कर एसडीएम से पूछा है कि मामले से जुड़े तहसीलदार का नाम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया गया।
3.61 हेक्टेयर भूमि चाहिए
कुल 3.61 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की जानी है।
पहला चरण: छह गांवों की 1.90 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा।
दूसरा चरण: चार क्षेत्रों की 1.72 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी।
भूमि अधिग्रहण इसलिए
13.3 किमी लंबा एलीवेटेड रोड बनाया जा रहा है।
10.48 किमी लंबा लूप, 552 पिलर तैयार होंगे।
परियोजना लागत करीब 1373 करोड़ रुपए।
प्रोजेक्ट 2 चरणों में पूरा होगा।
8 हेक्टेयर भूमि की जरूरत।
भुगतान पर 5 लोगों की आपत्ति, तब जांच
कुछ समय बाद 5 लोगों ने भुगतान पर आपत्ति दर्ज कराई तो नायब तहसीलदार स्तर पर जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी। जांच में सामने आया कि विवेक गुप्ता के खाते में 40.63 लाख रुपए अतिरिक्त ट्रांसफर हो गए थे। तब राशि वापस लेने की कार्रवाई की और संबंधित पक्ष ने चेक द्वारा पूरी रकम सरकारी खाते में जमा करा दी।
किसने गड़बड़ी की, रिपोर्ट मांगी है
“अतिरिक्त भुगतान की पूरी राशि वापस जमा हो चुकी है। यह गड़बड़ी कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट एसडीएम से मांगी गई है।”
रुचिका चौहान, कलेक्टर

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