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कोलकाता में निर्माणाधीन गोदम ढहने में 5 की मौत, 5-55 लोगों के दबने की संभावना, 4 रेस्क्यू में बचाया

हादसा तारातला इलाके में ब्रेस ब्रिज के पास ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर हुआ है। - Dainik Bhaskar

कोलकाता. दक्षिण कोलकाता क तारातला ट्रांसपोर्ट डिपो के पास बुधवार की दोपहर 1.30 बजे निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक गिर गया है। घटना में अभी तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। 50-55 लोगों के दबे होने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार आी 4 लोगों का रेस्क्यू किया गया है।

Kolkata taratala
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के समय गोदाम में कांक्रीट ढलाई का काम चल रहा था। पुलिस के अनुसार रेस्क्यू में कोलकाता पुलिस, डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप, सिविल डिफेंस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज और सेना भी जुटी है। मलबे और लोहे की रॉड का हटाने के लिये क्रेन मंगाई गयी है। गैस कटर से लोहे की छड़ों को काटा जा रहा है। मलबे में दबे मजदूरों-कर्मचारियों की चीखें भी सुनाई दे रही है। उनके जल्द से जल्द रेस्क्यू के प्रयास जारी है।

कैसे हुआ हादसा, होगी जांच- इंद्रनील खान

इंद्रनील खान ने कहा है कि, ‘हम हादसे के कारणों और किसी भी तरह की गड़बड़ी की जांच भी करेंगे, लेकिन अभी हमारी प्राथमिकता लोगों को बचाना है.’ शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कोलकाता नगर आयुक्त स्मिता पांडे भी घटनास्थल पर पहुंचीं, जबकि भाजपा नेता राकेश सिंह इससे पहले ही वहां का दौरा कर चुके थे. पिछले छह से सात महीनों से गोदाम का निर्माण कार्य चल रहा था. यह ज़मीन बेहेरा ब्रदर्स कंस्ट्रक्शन के शंभू बेहेरा की है, जबकि इस प्रोजेक्ट को डिवेलप असगर खान कर रहे थे. असगर खान का इलाके में दबदबा बताया जाता है. सामने आ रहा है कि इमारत के बनाए जाने में सुरक्षा मानकों और सुरक्षित निर्माण के तौर-तरीकों का पालन नहीं किया गया था. इन दावों पर आगे की जांच की जा रही है.

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बुरे फंसे CM, क्या मंत्री बनने के बाद व्यापार कर सकते हैं नेता, सीएम के घर वाले भी नहीं कर सकते यह काम

नई दिल्ली. मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव जमीन सौदों को लेकर फंस गये हैं। दरअसल, एक अंग्रेजी अखबार में आरोप लगाया है कि सीएम मोहन यादव और उनके परिवार के लोगों ने सरकारी योजनओं का लाभ उठाने के लिये बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी है। इसके बाद मंत्रियों की संपत्ति से जुड़े नियमों पर बात हो रही है। ऐसे में जानते है कि आखिर नेता को मंत्री बनने के बाद किन नियमों का पालन करना होता है। वह अपने बिजनेस में किन बातों का ध्यान रखना होता है।
सरकार जारी कोड ऑफ कंडक्ट के मुताबिक राज्य में सभी मंत्रियों का सीएम और केन्द्रीय मंत्रियों को प्रधानमंत्री को हर साल संपत्ति की जानकारी देनी होती है। वहीं मुख्यमंत्रियों को जानकारी पीएम या गृहमंत्री को देनी होती है। मंत्रियों की ओर अचल संपत्ति, शेचर और डिबेंचर नगद, ज्वेलरी की अनुमानित जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही मंत्री बनने के बाद उसे अपने व्यापार के संचालन, प्रबंधन से अपने सभी रिलेशन खत्म करने लेने चाहिये। जब तक कोई व्यक्ति मंत्री रहता है तो उसे हर वर्ष 31 अगस्त तक प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को पिछले फायनेंशियल ईयर के लिये अपनी संपत्तियों और देनदारियों की जानकारी देनी होगी।
साथ ही मंत्री को प्रबंधन मेंअपनी हिस्सेदारी को ट्रांसफर कर देना चाहिये। लेकिन वह अपने पति या पत्नी को को नहीं होना चाहिये। अगर कोई ऐसा व्यापार है। जिसमें सरकार के साथ मिलकर काम करना हो या फिर लायसेंस, परमिट, पट्टा, कोटा टेंडर जैसा काम है तो उससे स्वयं को दूर कर लेना चाहिये। इसके अलावा सरकार से कोई अचल संपत्ति खरीदने या सरकार को कोई अचल संपत्ति बेचने से परहेज करना होगा। अगर कोई संपत्ति सामान्य प्रक्रिया से अधिग्रहित किया जाती है तो अलग बात है। मंत्री बनने के बाद कोई भी व्यापार शुरू करने या नये व्यापार में शामिल करने से बचना चाहिये।
क्या नहीं कर सकते परिवार वाले
उनके परिवार के लोग भी ऐसा व्यापार ना करें, जो सरकार से जुड़ा हो या फिर परमिट, लायसेंस, पट्टों आदि से जुड़ा ना हो, अगर कोई परिवार का कोई सदस्य कोई अन्य व्यवसाय स्थापित करता है या उसके संचालन एवं प्रबंधन में शामिल होता है तो मंत्री को इसकी जानकारी पीएम और सीएम को देनी होगी।
मंत्री को क्या नहीं करना चाहिए?
– स्वयं या अपने परिवार के किसी सदस्य के माध्यम से किसी भी उद्देश्य के लिए, चाहे वह राजनीतिक, धर्मार्थ या अन्य कोई उद्देश्य हो, कोई योगदान (चंदा) स्वीकार नहीं करना चाहिए।   किसी पंजीकृत संस्था, धर्मार्थ निकाय, किसी सार्वजनिक प्राधिकरण की ओर से मान्यता प्राप्त संस्थान या किसी राजनीतिक दल के लिए कोई धनराशि अथवा चेक उसे प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे उस संगठन को भेज देना चाहिए जिसके लिए वह निर्धारित है। धन जुटाने की किसी गतिविधि से स्वयं को नहीं जोड़ना चाहिए. साथ ही केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के मंत्री और उनके पार्टनर पीएम की बिना स्वीकृति के भारत या विदेश में किसी विदेशी सरकार या किसी विदेशी संगठन के अधीन काम नहीं कर सकते।  अगर कोई पहले से है तो उसकी जानकारी देनी होगी. किसी भी विदेशी मिशन में रोजगार पूर्ण प्रतिबंधित होना चाहिए।
विदेश में मिलने वाले गिफ्ट को लेकर क्या है नियम?
कोई मंत्री विदेश यात्रा के दौरान या भारत में विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से उपहार प्राप्त कर सकता है। ऐसे उपहार दो कैटेगरी में आते हैं। पहली कैटेगरी में वे उपहार शामिल होंगे, जो प्रतीकात्मक प्रकृति के हों, जैसे तलवार, पोशाक आदि. ये अपने पास रख सकता है। दूसरी कैटगरी में वे उपहार शामिल होंगे जो प्रतीकात्मक प्रकृति के नहीं हैं। अगर किसी गिफ्ट का मूल्य 5,000 रुपये से कम है, तो मंत्री उसे अपने पास रख सकता है। ज्यादा है तो सरकार को देना होगा।
गिफ्ट को लेकर क्या है नियम?
किसी मंत्री को निकट संबंधियों से प्राप्त उपहारों को छोड़कर कोई मूल्यवान उपहार स्वीकार नहीं करना चाहिए। न ही उसके परिवार के किसी सदस्य को ऐसे किसी व्यक्ति से कोई उपहार स्वीकार करना चाहिए जिसके साथ मंत्री के आधिकारिक संबंध या लेन-देन हों। मंत्री को ऐसा कोई लोन नहीं लेना चाहिए और न ही अपने परिवार के किसी सदस्य को ऐसा लोन लेने की अनुमति देनी चाहिए। जिसकी प्रकृति ऐसी हो कि उससे उसके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में असुविधा उत्पन्न हो या उस पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो।

 

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रिटायर्ड लेडी ऑफिसर से 33 दिन में डेढ़ करोड़ की ठगी, मनी लॉड्रिंग का आरोप लगाकर 4 राज्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई राशि

ग्वालियर. स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन महिला से साइबर ठगों ने एक करोड़ 57 लाख 90 हजार रूपये ठग लिये है। ठगों ने 69 वर्षीय मीनाक्षी नाखरे को टेलीकॉम डिपार्टमेंट, दिल्ली का आईपीएस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बनकर फोन किया था। उन्होंने मीनाक्षी से कहा कि आप नाम से रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर से मनी लॉडिंªग और गैन कानूनी काम हो रहे है। इससे 6.80 करोड़ रूपये का अवैध ट्रांजेक्शन किया गया है। 2 घंटे में आपको दिल्ली आना होगा नही ंतो गिरफ्तार कर लिया जायेगा।

इसके बाद केस से चाने के नाम पर 33 दिन में 4 राज्यों के 10 से अधिक शहरों में डेढ़ करोड से अधिक की रकम ट्रांसफर करवा ली। ट्रांजेक्शन फर्जी कम्पनियों के बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से कराया गया। महिला की शिकायत पर मंगलवार को पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ठगों ने जिन खातों पैसा लिय वह खाते फ्रीज
सीएसपी रॉबिन जैन ने बताया है कि ठगों द्वारा महिला लैब टैक्नीशियन जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाये गये उन खातों को फ्रीज कर दिया गया है जल्द पैसे वापिस कराने की कार्यवाही की जा रही है और जल्दी ही ठग भी पुलिस हिरासत में होंगे।

बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग की बात कही
मीनाक्षी पति रमेश नाखरे ग्वालियर के सरदार पाटनकर साहब का बाड़ा में रहती हैं। क्राइम ब्रांच में की गई शिकायत में मीनाक्षी ने बताया कि 10 मई 2026 को उनके पास नए नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली टेलीकॉम डिपार्टमेंट का अधिकारी अशोक गुप्ता बताया। उसने कहा- आपके नाम से एक और बैंक खाता चल रहा है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी काम हो रहे हैं।मीनाक्षी ने कहा कि यह मोबाइल नंबर मेरा नहीं है। इस पर अशोक बोला- ऐसा है तो आपको कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन दो घंटे में आपको दिल्ली आना होगा नहीं तो आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मीनाक्षी ने खुद को बार-बार निर्दोष बताया तो अशोक दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारी से उनकी बात कराने को तैयार हो गया। अशोक ने मीनाक्षी के 35 वर्षीय बेटे अनुभव नाखरे के नंबर पर वीडियो कॉल किया। इसके बैकग्राउंड में दिल्ली पुलिस का लोगो और सरकारी दफ्तर जैसी सेटिंग थी। सामने दिल्ली पुलिस की यूनिफॉर्म पहने बैठे शख्स ने खुद को आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया।
सुनील ने कहा कि ICICI बैंक का मैनेजर संदीप कुमार गिरफ्तार हुआ है। उसके पास से मीनाक्षी के नाम की फर्जी पासबुक मिली है। इस खाते से 6.80 करोड़ रुपए का अवैध लेनदेन हुआ है। इसके ऐवज में मीनाक्षी को 68 लाख रुपए कमीशन मिला है। मीनाक्षी ने कहा कि वे किसी संदीप कुमार को नहीं जानती हैं और न ही उन्होंने कोई बैंक खाता बेचा है।
एनओसी का झांसा देकर हुए गायब
पैसे ट्रांसफर होने के बाद 11 जून 2026 को ठगों ने मीनाक्षी से कहा- आपके सारे ट्रांजेक्शन क्लियर हो गए हैं। आपकी क्लीन चिट वाली एनओसी 18 जून तक पोस्ट के माध्यम से आपके ग्वालियर वाले घर पहुंच जाएगी। 16 जून की रात साढ़े नौ बजे के बाद से ठगों के सभी फोन नंबर बंद हो गए। जब तय तारीख तक कोई एनओसी नहीं आई, तो मीनाक्षी को शक हुआ। उन्होंने नई दिल्ली जाकर बाराखंभा पुलिस स्टेशन में संपर्क किया, तब जाकर पता चला कि वे फ्रॉड का शिकार हो चुकी हैं।

 

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सिंधु नदी का पानी न मिलने से पाकिस्तान परेशान, LoC पर 35 ड्रोन यूनिट तैनात

नई दिल्ली. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु नदी का पानी रोका, तो पाकिस्तान की परेशानियां बढ़ गई हैं। पाकिस्तान ने यह मसला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भी लेकिन वहां भी इस पर कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद अब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भारत को जंग छेड़ने की धमकी दे रहे हैं। वहीं, आर्मी चीफ आसिम मुनीर जंग की साजिश रचने में जुटे हैं। नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना की 8 ब्रिगेड ने 35 एंटी ड्रोन यूनिट तैनात की हैं।
टारगेटिंग और सर्विलांस को तेज किया
पाकिस्तान ने एआई फेंसिंग भी की है। इसके तहत टारगेटिंग और सर्विलांस को तेज किया गया है। पाकिस्तान ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और काउंटर ड्रोन ग्रिड भी तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से जुड़ी अपनी सीमाओं से 5 बटालियन को इस महीने की शुरुआत में ही मूव कराकर एलओसी के रावलाकोट, कोटली और भीम्बर सेक्टर में तैनात किया है। इन्हीं जगहों से पाकिस्तान भारत में आतंकियों की घुसपैठ भी करता रहा है।
चीन 5वीं जेनरेशन का फाइटर जेट देगा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने पाकिस्तान को 36 मल्टी रोल जे-सीरीज फाइटर जेट की सप्लाई की है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी एफ-35 जेट का चीनी वर्जन जे-35 भी साल के अंत तक पाकिस्तान को मिलने वाला है। इस जेट की टेस्ट फ्लाइट्स हो चुकी हैं।

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एअर इंडिया का विमान PAK एयरस्पेस में घुसा, पाकिस्तान ने चेतावनी देकर लौटाया

अमृतसर. एअर इंडिया की एक फ्लाइट रात में रास्ता भटककर पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में जा घुसी। इसे पाकिस्तान की एयर ट्रैफिक अथॉरिटी ने चेतावनी देकर वापस भेजा। विमान ने दिल्ली से उड़ान भरी थी और इसे अमृतसर लैंड होना था। पाकिस्तान के एयर स्पेस से जब फ्लाइट लौटी तब तक अमृतसर एयरपोर्ट पर ट्रैफिक बढ़ गया था, ऐसे में इसे वापस दिल्ली भेज दिया गया। एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया है कि तकनीकी खराबी के कारण यह फ्लाइट रास्ता भटक गई थी। मामले की जांच की जा रही है।

एअर इंडिया का विमान पाकिस्तान एयरस्पेस में जाकर लौटा। - Dainik Bhaskar
पायलट को तब पता लगा, जब पाकिस्तान से चेतावनी मिलने लगी
एयरपोर्ट अथॉरिटी से मिली जानकारी के मुताबिक, एयरबस एआई -321 विमान ने रात 9 बजकर 18 मिनट पर दिल्ली से उड़ान भरी थी। यह विमान अपने तय समय से 3 मिनट देरी से उड़ा था। उड़ान के दौरान विमान में तकनीकी खराबी आई। विमान को रात 10 बजकर 30 मिनट पर अमृतसर में लैंड होना था, लेकिन यह रूट से भटक गया और पाकिस्तान के एयर स्पेस में जा घुसा। इस बात का पता पायलट को भी तब लगा, जब पाकिस्तान एयर ट्रैफिक अथॉरिटी से विमान को चेतावनी मिलने लगी।
अमृतसर वापस आया तब तक रनवे बिजी हो गया
इस घटना के तुरंत बाद पायलट ने विमान का रास्ता बदला और यू-टर्न लेकर वापस भारत के एयरस्पेस में आया। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। समय निकल जाने के बाद विमान अमृतसर की सीमा में पहुंचा, लेकिन ट्रैफिक बढ़ने से विमान को उतरने की परमिशन नहीं मिली। एयरपोर्ट कंट्रोल रूम से विमान को वापस दिल्ली जाने के निर्देश मिले। इसके बाद विमान वापस दिल्ली गया, जहां उसकी सुरक्षित लैंडिंग करवाई गई। करीब 2 घंटे बाद दोबारा अनुमति मिलने पर विमान ने अमृतसर के लिए फिर से उड़ान भरी और रात करीब 4 घंटे की देरी से 2 बजकर 20 मिनट पर अमृतसर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गया।

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जीवाजी यूनिवर्सिटी की रिव्यू पिटीशन खारिज, 7वें वेतनमान पर हाईकोर्ट की मुहर

ग्वालियर- जीवाजी यूनिवर्सिटी को स्थायी कर्मियों के 7वें वेतनमान मामले में हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने यूनिवर्सिटी की रिव्यू पिटीशन खारिज कर 12 नवंबर 2025 को पारित अपने उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें स्थायी कर्मियों को 7वें वेतन आयोग के अनुरूप संशोधित वेतनमान का लाभ देने के निर्देश दिए गए थे।
जस्टिस आशीष श्रोती की अदालत के समक्ष यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया कि याचिका दायर करने वाली कर्मचारी यूनियन मान्यता प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि स्वयं यूनिवर्सिटी ने यूनियन के चुनाव कराने के लिए चुनाव अधिकारी नियुक्त किया था। निर्वाचित पदाधिकारियों को मान्यता दी थी। ऐसे में यूनियन की प्रतिनिधिक क्षमता पर आपत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती।
यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि स्थायी कर्मियों को 7 अक्टूबर 2016 की नीति के तहत फिक्स वेतन दिया जा रहा है। इस पर अदालत ने लक्ष्मीनारायण मामले में खंडपीठ के फैसले का हवाला देते हुए दोहराया कि स्थायी कर्मियों को पूरे सेवाकाल तक एक निश्चित वेतन पर नहीं रखा जा सकता तथा वे संशोधित न्यूनतम वेतनमान और एरियर के हकदार हैं। सीनियर वकील बीपी सिंह ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों का पक्ष रखा है।

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प्राचार्य ने महिला शिक्षिका प्रायवेट पर मारे मुक्के, मुंह-सीने पर किया हमला

ग्वालियर. शासकीय कॉलेज के प्रभारी के प्राचार्य आदर्श पंडित पर महिला शिक्षक को पीटने के आरोप लगे है। एमएड प्रशिक्षण ले रही शिशिका का आरोप है कि कॉलेज परिसर में प्राचार्य ने पीटा है, मुंह, सीने और प्रायवेट पार्ट्स पर मुक्के मारने के अलावा बाल खींचे और कपड़े फाड़ने का प्रयास किया है।घटना के बीच शिक्षिका घायल होकर जमीन पर गिर गयी है। वह दर्द से तड़फती रहीं और हमले से मुंह से खून निकल रहा था। डायल-112 पर कॉल कर पुलिस का बुलायागया। घटना के बाद एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें शिक्षिका रोती हुई और घायल दिखाई दे रही है।
घटना सोमवार की दोपहर की बताई जा रही है। मंगलवार की शाम शिक्षिका अपने पति के साथ एसपी ऑफिस पहुंची और लिखित शिकायत देकर कार्यवाही की मांग की है। उनका कहना है कि थाने में केवल मारपीट का मामला दर्ज किया गया है। जबकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिये। आवेदन को एसपी ने हजीरा थाने प्रभारी को भेज दिया है।
ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर विवाद
शिक्षिका ने शिकायत में बताया कि वह शासन के निर्देशानुसार ऑनलाइन अटेंडेंस लगा रही थीं। उनके अनुसार, ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन प्रभारी प्राचार्य रजिस्टर में अटेंडेंस दर्ज कराने का दबाव बनाते थे।
शिक्षिका मुरैना जिले में माध्यमिक शिक्षक हैं। एमएड डिग्री के लिए उन्हें प्रशिक्षण लेना था, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने प्रशिक्षण देने से मना कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उसी कॉलेज में प्रशिक्षण की अनुमति मिली। इसी वजह से प्रभारी प्राचार्य नाराज हो गया।

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मल्टी लेवल कार पार्किंग मे डीवाटरिंग का कार्य जल्द से जल्द करे शुरु –निगमायुक्त

ग्वालियर – – नगर निगम आयुक्त ने मंगलवार को स्मार्ट सिटी के कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि मल्टीलेवल कार पार्किंग, सचिन तेन्दूलकर रोड सहित स्मार्ट सिटी के जो भी कार्य प्रगतिरत है उन्हे जल्द से जल्द पूर्ण कराया जाये वहीं उन्होने ओएंडएम पर दिये गयी परियोजनाओ की समीक्षा करते हुये जरुरी दिशा निर्देश दिये। बैठक मे अपर आयुक्त टी प्रतीक राव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में स्मार्ट सिटी द्वारा बनाई जा रही सचिन तेंदुलकर रोड, मल्टी लेवल कार पार्किंग, फसाड लाइटिंग, गेन्ट्री, कटोराताल पर लेजर शो सहित विभिन्न परियोजना के ओएंडएम व निविदा प्रक्रिया की समीक्षा की गई। स्मार्ट सिटी कार्यालय में आयोजित बैठक में नगर निगम आयुक्त ने मल्टी लेवल कार पार्किंग की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि डीवाटरिंग के लिए जो समय सारणी बनाई गई है उसके अनुसार डीवाटरिंग का कार्य शुरु किया जाये
वही निगमायुक्त ने सचिन तेंदुलकर रोड की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि रोड का निर्माण कार्य तेज गति से समय सीमा में पूर्ण करें और निर्माण के दौरान वह सभी प्रावधान करें जिससे आम लोगों को दिक्कत न हो। उन्होने संबंधित अधिकारियो को चेतावनी देते हुये कहा कि हर हाल मे जून माह के अंत तक एक तरफ की रोड को शुरु किया जाये और रोड की गुणवत्ता मे यदि कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये। निगमायुक्त मे समीक्षा के दौरान सचिन तेन्दूलकर रोड के सौंदर्यीकरण के प्रजेन्टेशन को भी देखा उन्होने सुझाव दिया कि सौंदर्यीकरण मे इस रोड के अनुरुप महान क्रिकट प्लेयर सचिन तेन्दूलकर से संबंधित जानकारीयो को शामिल किया जाये। निगमायुक्त ने बैठक मे स्मार्ट सिटी द्वारा निर्मित अन्य परियोजनाओ जैसे गेन्ट्री, फसाड लाइटिंग, कटोरा ताल म्यूजिकल फाउंटेन सहित अन्य परियोजनाओ के संचालन और प्रबंधन की समीक्षा करते हुये संबंधित अधिकारियो को जरुरी दिशा निर्देश दिये।

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MP में UCC की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री बोले- 90% से अधिक जनता पक्ष में

भोपाल. मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता देने की तैयारी के बीच इसका विरोध भी किया जाने लगा है। धार्मिक संगठनों के प्रमुख इसके खिलाफ हैं। धर्मगुरुओं का कहना है कि लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता समाज के हित में नहीं है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने यूसीसी में लिव इन के प्रविधान शामिल करने का विरोध किया है।
महिला आयोग और सुझावों की स्थिति
महिला आयोग की सदस्य साधना स्थापक का भी कहना है कि लिव इन रिलेशनशिप पर अलग से चर्चा होनी चाहिए। कम उम्र में बच्चे गलत निर्णय ले लेते हैं। इस मुद्दे पर अलग से समिति होनी चाहिए। एक सुझाव यह भी आया कि लिव इन रिलेशनशिप में रहना है तो 30 दिनों में रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
विधेयक के प्रारूप की समय-सीमा
इधर, समिति की तैयारी है कि 30 जून तक प्रक्रिया पूरी कर पांच जुलाई तक विधेयक का प्रारूप तैयार कर सरकार को सौंप दिया जाए। सरकार की मंशा 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में इसे प्रस्तुत करने की है। यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर धार्मिक सामाजिक संगठनों के अधिकतर प्रमुखों ने यूसीसी में मान्यता नहीं देने का सुझाव रखा है।
यूसीसी के पक्ष में हैं 90 प्रतिशत से अधिक नागरिक : मुख्यमंत्री
मंगलवार को मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए सभी जिलों में जनपरामर्श बैठकें हो चुकी हैं। राज्य स्तरीय परामर्श 22 जून को भोपाल में हुआ। इसमें सभी आयोगों, विभागों, राजनीतिक दलों और धर्मगुरुओं से पृथक-पृथक बैठकें आयोजित कर मत लिया गया।
लगभग 3.49 करोड़ एसएमएस यूसीसी के सुझाव आमंत्रित करने के लिए समग्र के हितग्राहियों को भेजे गए। नागरिकों के नौ लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, 90 प्रतिशत से भी अधिक नागरिक यूसीसी के पक्ष में हैं। अल्पसंख्यक समुदाय का भी बड़ी संख्या में समर्थन प्राप्त हुआ है। विधेयक के प्रारूप पर समिति द्वारा विधि विभाग के साथ साझा रूप से कार्य किया जा रहा है।

 

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MP में स्मार्ट मीटर से 20 प्रतिशत तक की छूट

भोपाल. राजधानी भोपाल में स्मार्ट मीटरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मई 2026 तक भोपाल के पांच बिजली वितरण संभागों में कुल 6.17 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से 4.50 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को टाइम आफ डे (टीओडी) योजना का लाभ भी मिल रहा है। मई माह में ही उपभोक्ताओं को 368.23 लाख रुपये यानी करीब 3.68 करोड़ रुपये की रिबेट दी गई।
सटीक बिलिंग और रीडिंग में सुधार
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अनुसार स्मार्ट मीटर में हर 15 मिनट में बिजली खपत का डेटा अपडेट होता है। इससे उपभोक्ता अपनी खपत को समझकर अनावश्यक बिजली उपयोग कम कर सकते हैं।
रियल टाइम डेटा उपलब्ध होने से मीटर रीडिंग के लिए कर्मचारियों के घर जाने की जरूरत नहीं रहती। निर्धारित तिथि पर बिल तैयार होकर उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर पहुंच जाता है। कंपनी का दावा है कि स्मार्ट मीटर से बिलिंग अधिक सटीक हुई है और रीडिंग में त्रुटियों की संभावना लगभग खत्म हो गई है।
टीओडी योजना से बिजली बिल में राहत
नए टैरिफ के तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को निर्धारित समय में बिजली का उपयोग करने पर टीओडी योजना के अंतर्गत बिजली दरों में 20 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। इससे उपभोक्ताओं को बिजली बिल कम करने में मदद मिल रही है और ऊर्जा संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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