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क्या भाजपा का मैनिफेस्टो है बिहार चुनाव का जीएसटी कट

नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव की राजनीति की तपिश के बीच मोदी सरकार ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की दरों में कटौती का फैसला किया है। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है छठ मईया की पूजा और दीवाली से पहले बिहार ही नहीं बल्कि देश को डब्ल धमाका मिलने जा रहा है। वित्तमंत्री ने बताया कि जीएसटी कट बिहार चुनाव में भाजपा मैनिफेस्टो है? इस पर वित्तमंत्री बोली कि यह बिहार नहीं, देश के 140 करोड़ लोगों का मैनिफिस्टो है। सरकार ने जीएसटी में बदलाव का फैसला बहुत ही सोच समझकर लिया गया है। वित्त मंत्री बोली कि जीएसटी का इतना बड़ा परिवर्तन और हर चीज में दामों में बदलाव करने के लिये इंडस्ट्री और ट्रेडर्स से बात कर रहे हैं कि वह रेट कट को सच मेंजनता तकपहुंचायें। क्योंकि कई सवाल उठ रहे हैं कि कम्पनियां रेट कट को जनता तक नहीं पहुंचाते हैं। कुछ न कुछ बहाने बनाकर पैसा बनाते रहते हैं और लोग को लाभ नहीं मिलता है। उस पर हम काम कर रहे है।
जीएसटी के दो स्लैब खत्म करने का लाभ बिहार में मिलेगा
निर्मला सीतारमण ने बताया है कि जीएसटी में बदलाव बहुत उम्मीद के साथ किया गया है। जो नवरात्रि से ही लोगों को खरीदारी पर दिखने लगेगा। उदाहरण के तौर पर 100 रूपये में पहले जो एक समान मिलता था। उसमें अब डबल समान खरीद सकता है। गुटखा-तम्बाकू के दाम बढ़ने से बिहार जैसे राज्यों को नुकसान होगा। उसकी भरपाई कैसे होगी। इसके जवाब में वित्तमंत्री ने कहा है कि बिहार कंज्यूमर स्टेट है। मैं उम्मीद रख रहीहूं। कि इस नवरात्रि के पहले दिन से ही जनता रेट कटौती के चलते अधिक समान खरीद सकेगी। बिहार जैसे राज्यों को इस कटौती और रीफॉर्म जीएसटी का लाभ मिलेगा। हम मॉनीटरिंग कर रहे है जो दाम किये गये है वह लोगों तक पहुंचे। इसके लिये हम लगातार इंडस्ट्री आदि से बातचीत कर रहे हैं। इस रेट कटौती का लाभ लोगों तक पहुंचे। लेकिन कम्पनियों ने भी हमें आश्वस्त किया है कि लोगों तक रेट कटौती का पूरा लाभ पहुंचेगा।
कांग्रेस पर वित्तमंत्री का निशाना
वित्तमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा हैकि जो लोग कभी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को गब्बर सिंह टैक्स कहकर उसका मजाक उड़ाते थे। वह अब सरकार के जीएसटी 2.0 सुधारों का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह बयान कांग्रेस नेताओं द्वारा यह कहने के बाद आया कि सुधारों कंे लिये अचानक यह कदम राहुल गांधी के प्रस्तावों के बाद उठाया गया है। जिन्होंने यह दावा किया है कि सरकार ने 9 साल तक इन प्रस्तावों का नजरअंदाज किया और उनके चुनाव प्रचार में वोट चोरी का आरोप लगाने के बाद ही कोई कदम उठाया। निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और पिछली सरकार पर भारी कर दर्रे लगाने का आरोप लगाया है जिससे व्यवसाईयों और उपभोक्ताओं दोनों का नुकसान हुआ। वित्तमंत्री ने कहा है कि मोदी सरकार का आम आदमी और उनकी आकांक्षाओं पर ध्यान और विपक्ष का दबाव नहीं, कर सुधारों का संभव बनाने का कारण बना है।

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1 जनवरी 2026 से लागू होगा 8th Pay Commission, केन्द्र सरकार ने दी एक और बड़ी खबर

नई दिल्ली. 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सरकार की तरफ से एक बड़ा अपडेट आया है। इसके लागू होने से केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्ते और पेंशन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इसे लागू करने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ा दिये है। और CPC  के गठन के लिये वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) प्रारंभिक चर्चायें शुरू कर दी है। संसद में मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने इससे जुड़ी जानकारी शेयर की है।
कब से लागू होगा 8वां वेतन आयोग
फिलहाल तक 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक सिफारिशें तैयार नहीं हुई है। लेकिन इनका क्रियान्वयन पूर्व आयोगों द्वारा निर्धारित पैटर्न के अनुसार ही किये जाने की उम्मीद जताई जा रही है। गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग(8th Pay Commission) का गठन फरवरी 2014 में किया गया था। लेकिन इसकी सिफारिशों को 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया था। ऐसे में कहा जा रहा है कि इसी टाइमलाइन को दोहराते हुए 8th Pay Commission  की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 की शुरूआत से लागू की जा सकती है।
वित्त राज्यमंत्री ने स्पष्ट की तस्वीर
PTI  की एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्रालय की तरफ से प्रमुख विभागों, मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ 8th Pay Commission के संबंध में परामर्श शुरू किये गये है। इनमें रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रश्क्षिण मंत्रालय सहित विभिन्न राज्य सरकारें शामिल है। लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने इसे लेकर पिक्चर साफ करते हुए कहा है कि सभी से इनपुट मांगे गये हैं। आयोग का औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इसके अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति कर दी जायेगी। हालांकि उन्होंनें साफ किया कि अभी तक किसी भी नाम की घोषणा नहीं की गयी है। पंकज चौधरी ने नये वेतन आयोग के लागू होने के सवाल पर आगे कहा है कि 8th Pay Commission  द्वारा सिफारिशें किये जाने और सरकार द्वारा इन्हें स्वीकार किये जाने के बाद ही इनका कार्यान्वयन किया जायेगा।
60 लाख कर्मचारी, 65 लाख पेंशनर्स को होगा लाभ
8th Pay Commission  लागू किये जाने से देशभर के लगभग 50 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख से अधिक पेंशनर्स को फायदा होगा। हालांकि जब तक नया वेतन आयोग अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं कर देता और सरकार की तरफ से इन्हें अप्रूवल नहीं दिया जाता है तब तक कर्मचारियों की सैलरी या फिर पेंशन स्ट्रक्चर में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि हर वर्ष में 2 बार होने वाले महंगाई भत्ते में बढ़ोत्तरी का फायदा मिलता रहेगा।
60%  तक पहुंच सकता महंगाई भत्ता
7th Pay Commission  लागू किये जाने वाले वर्ष 2016 में महंगाई भत्ता 0% था। लेकिन फिर यह बढ़ता हुआ जनवरी 2025 तक यह 55% पर पहुंच गया था। अब अनुमान के अनुसार जुलाई में अगर संभावित 3% DA  मिलता है तो भी यह आंकड़ा 58% तक पहुंच सकता है। वहीं जनवरी 2026 में अगली समीक्षा के बाद इसे 2% के लाभ के साथ 60%  पर पहुंचने का अनुमान है।

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जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया त्यागपत्र, स्वास्थ्य वजहों का दिया हवाला

नई दिल्ली. भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को संबोधित एक पत्र में स्वास्थ्य संबंधी वजहों और चिकित्सा सलाह का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत अपने इस्तीफ की घोषणा की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को संबोधित अपने पत्र में जगदीप धनखड़ ने लिखा स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए। मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिये धन्यवाद दिया और साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को भी उनके सहयोग और मार्गदर्शन के लिये आभार व्यक्त किया।
जगदीप धनखड़ ने 2022 में भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। 6 अगस्त, 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था. जगदीप धनखड़ को कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि मार्गरेट अल्वा को 182 वोट मिले थे। उपराष्ट्रपति बनने से पहले वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे. जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई, 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के स्कूल से ही पूरी की। इसके बाद स्कॉलरशिप हासिल करके चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल में पढ़ने चले गए. धनखड़ का नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयन हो गया था, लेकिन वह नहीं गए।

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बदल रही भारत की युद्धनीति, भारत दुश्मनों पर प्रहार के लिये फ्यूचर वेपंस पर कर रहा है काम

Future weapons and war strategy of India

नई दिल्ली. मई 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया को अपनी सैन्य ताकत और तकनीकी दमखम दिखा दिया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जबाव में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को बर्बाद कर दिया था। इस ऑपरेशन में स्वदेशी हथियारों, जैसे ब्रह्मोस मिसाइल, आकश डिफेंस सिस्टम और ड्रोन्स सिस्टम और ड्रोन्स ने कमाल कर दिखाया। यह तो बस शुरूआत थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी युद्ध योजनाओं को और मजबूत करने के लिये नये और शक्तिशाली हथियारों पर काम शुरू कर दिया है। भारत के यह नये हथियार क्या है। इनसे हमारी सेना कितनी ताकतवर हो रही है।
सबसे पहले, थोड़ा सा ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जान लें। अप्रेल 2025 में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 22 लोगों की हत्या कर दी। इसके जवाब में भारत ने 6-7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
भारतीय वायुसेना ने रॉफेल जेट्स ब्रह्मोस मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोन्स का उपयोग करे पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को तबाह करन दिया। 100 से अधिक आतंकी मारे गये। 11 पाकिस्तानी एयरबेस और रडार सिस्टम नष्ट हुए। सबसे खास बात, भारतीय सेना को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस ऑपरेशन ने न सिर्फ भारत की सैन्य ताकत दिखाई । बल्कि यह भी साफ कर दिया कि अब भारत आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है। पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों को देखते हुए भारत अब अपनी सेना को और अजेय बनाने के लिये नये हथियारों पर काम कर रहा है।
भारत के नये हथियार, क्या क्या है
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी सैन्य ताकत को कई गुना बढ़ाने का फैसला किया। डीआरडीओ भारतीय नौसेना और निजी कंपनियां मिलकर ऐसे हथियार बना रही है। जो भविष्य के युद्धों में गेम-चेंजर साबित होंगे।
प्राइम मिसाइलें-दुश्मनों के लिये खतरा बनेगी
लांग रेंज एंटी-शिप मिसाइल- डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने मिलकर एक ऐसी मिसाइल बनाई है। जिसे कैरियर किलर कहते हैं। यह मिसाइल समुद्र में 1 हजार किमी से अधिक दूरी पर दुश्मन के युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियर्स को नष्ट कर सकती है। इसे जाम करना नामुमकिन है।
ब्रह्मोस- यह हाइपरसोनिक मिसाइल है। इसकी रेंज 15 किमी है। यानी दिल्ली से इस्लामाबाद या दक्षिण चीन सागर तक के ठिकाने सेकेण्डों में नष्ट हो सकते हे। यह रडार से बच निकलती है। जिससे दुश्मन की डिफेेंस सिस्टम बेकार हो जाती है।

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रुद्रम-2 और रुद्रम-3: ये एंटी-रेडिएशन मिसाइलें हैं, जो दुश्मन के रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और कम्युनिकेशन सेंटर्स को तबाह करती हैं. इन्हें Su-30MKI और AMCA जैसे फाइटर जेट्स से दागा जा सकता है।
आकाश और QRSAM: आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जो 25 किलोमीटर तक दुश्मन के ड्रोन और विमानों को मार गिराती है. QRSAM (क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल) 30 किलोमीटर तक के खतरों को खत्म करती है. ऑपरेशन सिंदूर में इनका जलवा देखने को मिला।
2. युद्धपोत: समुद्र में भारत का दबदबा
नई पनडुब्बियां और युद्धपोत: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय नौसेना अपनी ताकत बढ़ा रही है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) को 1.06 लाख करोड़ रुपये का ठेका मिला है, जिसके तहत 3 नई स्कॉर्पीन पनडुब्बियां बनेंगी. ये 60% स्वदेशी तकनीक से बनेंगी और 6-8 साल में तैयार होंगी ।
INS विक्रांत और विशाखापट्टनम: भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत और युद्धपोत INS विशाखापट्टनम ड्रोन्स और मिसाइलों से लैस हैं. ये अरब सागर और हिंद महासागर में भारत की ताकत बढ़ा रहे है।
4000-5000 करोड़ का निवेश: MDL मुंबई में 10 एकड़ जमीन पर दो नए बेसिन बना रहा है। जहां बड़े युद्धपोत और पनडुब्बियां बनेंगी. इससे 2047 तक स्वदेशी नौसेना का सपना पूरा होगा ।

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3. रडार: दुश्मन की हर हरकत पर नजर
• स्वदेशी AESA ‘उत्तम’ रडार: ये रडार AMCA स्टेल्थ फाइटर जेट्स में लगेगा. ये दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को दूर से पकड़ लेता है. हालांकि, अभी इसकी प्रोडक्शन क्षमता 24 यूनिट्स प्रति साल है, लेकिन HAL और BEL इसे बढ़ाने पर काम कर रहे है।
• D4S एंटी-ड्रोन सिस्टम: ये सिस्टम ड्रोन्स को इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और लेजर से मार गिराता है. ऑपरेशन सिंदूर में इसने पाकिस्तान के 307 ड्रोन्स को पकड़ा और नष्ट किया है।
• AEW&C रडार: ये हवा में निगरानी रखने वाला रडार है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की सुपरसोनिक CM-400AKG मिसाइल को ट्रैक और नष्ट किया है।

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4. किलर ड्रोन्स: युद्ध का भविष्य
स्विफ्ट-के कामिकेज ड्रोन: बेंगलुरु की DRDO-ADE लैब में बन रहा ये ड्रोन 735 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ता है. स्टील्थ तकनीक की वजह से रडार इसे पकड़ नहीं पाते. ये दुश्मन के हवाई डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर सकता है।
MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन: भारत ने अमेरिका से 31 हंटर-किलर ड्रोन्स खरीदे हैं, जिनकी कीमत 32,000 करोड़ रुपये है. ये ड्रोन लद्दाख, अरुणाचल और हिंद महासागर में निगरानी और हमले के लिए तैनात होंगे ।
TAPAS-BH और वारहॉक: TAPAS-BH स्वदेशी निगरानी ड्रोन है, जो हिंद महासागर में तैनात है. वारहॉक AI-पावर्ड किलर ड्रोन है, जिसका लक्ष्य 2027 तक तैयार होना है।
लॉइटरिंग म्यूनिशन्स: ये आत्मघाती ड्रोन है। जो दुश्मन के ठिकानों पर मंडराते हैं. सटीक हमला करते हैं. ऑपरेशन सिंदूर में स्काईस्ट्राइकर ड्रोन्स ने कमाल दिखाया है।
5. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): स्मार्ट युद्ध
• AI-पावर्ड टैंक और ड्रोन: भारत AI से लैस टैंक और ड्रोन्स बना रहा है. वारहॉक ड्रोन में सेंसर-फ्यूजन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होगा, जो इसे और घातक बनाएगा ।
• रियल-टाइम निगरानी: AI की मदद से ड्रोन्स और सैटेलाइट्स रियल-टाइम में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते है। ऑपरेशन सिंदूर में ISRO की सैटेलाइट्स ने अहम रोल निभाया है।
• CLAWs लेजर डिफेंस: ये लेजर हथियार ड्रोन्स, माइक्रो मिसाइलों और मोर्टार को हवा में ही नष्ट कर देता है।
कैसे काम करते हैं ये हथियार?
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मिसाइलें: ब्रह्मोस-2 और रुद्रम मिसाइलें इतनी तेज हैं कि दुश्मन को रिएक्ट करने का मौका ही नहीं मिलता. ये रडार से बचती हैं. सटीक निशाना लगाती हैं. जैसे, ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस ने आतंकी ठिकानों को पलभर में तबाह कर दिया है।
युद्धपोत: INS विक्रांत जैसे विमानवाहक पोत ड्रोन्स और फाइटर जेट्स को समुद्र में ले जा सकते हैं. ये दुश्मन की नौसेना को दूर से ही खत्म कर सकते है।
रडार: ‘उत्तम’ और AEW&C रडार दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को सैकड़ों किलोमीटर दूर से पकड़ लेते हैं. ऑपरेशन सिंदूर में S-400 और D4S ने पाकिस्तान के ड्रोन्स और मिसाइलों को नाकाम कर दिया है।
ड्रोन्स: स्विफ्ट-के और MQ-9B जैसे ड्रोन्स निगरानी और हमले दोनों कर सकते हैं. ये इतने स्मार्ट हैं कि AI की मदद से खुद फैसले ले सकते है।
AI: ये तकनीक सेना को रियल-टाइम जानकारी देती है, जैसे दुश्मन कहां है, उसका हथियार क्या है. इससे हमारी सेना तेज और सटीक हमले कर सकती है।
क्यों जरूरी हैं ये नए हथियार?
ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि भारत अब आतंकवाद और दुश्मनों के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है। लेकिन पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की चुनौतियां कम नहीं हैं. चीन की सुपरसोनिक मिसाइलें और पाकिस्तान के ड्रोन्स भारत के लिए खतरा है।
सुरक्षा: ब्रह्मोस-2 और S-400 जैसे हथियार दुश्मन की किसी भी हरकत को पलटवार करने के लिए तैयार हैं.
आत्मनिर्भरता: भारत अब विदेशी हथियारों पर कम निर्भर है. स्विफ्ट-के, TAPAS-BH और आकाश जैसे हथियार ‘मेक इन इंडिया’ का हिस्सा है।
वैश्विक ताकत: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के हथियारों की डिमांड बढ़ी है. कतर, लेबनान और जापान जैसे देश भारत से मिसाइलें, रडार और बुलेटप्रूफ जैकेट्स खरीद रहे है।
भविष्य के युद्ध: ड्रोन्स, AI और लेजर हथियार भविष्य के युद्धों में गेम-चेंजर होंगे. भारत इनका इस्तेमाल करके दुनिया की टॉप सेनाओं में शामिल हो रहा है।
आगे क्या?
ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को एक नया आत्मविश्वास दिया है. अब सरकार और डीआरडीओ मिलकर रक्षा बजट को GDP का 2.5% करने की योजना बना रहे हैं. साथ ही…
• 87 MALE ड्रोन्स: भारत 20,000 करोड़ रुपये में 87 स्वदेशी ड्रोन्स खरीदेगा, जो पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर निगरानी करेंगे ।
• AMCA स्टील्थ फाइटर: पांचवीं पीढ़ी का ये फाइटर जेट 2030 तक तैयार होगा ।
• प्रोजेक्ट कुशा: ये स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 की तरह 350 KM तक के खतरों को रोकेगा ।
• रक्षा निर्यात: भारत का लक्ष्य 2024-25 तक 36,500 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात है। ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलें दुनिया में छा रही हैं।
तो, क्या भारत अब सुपरपावर है?
ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को बता दिया कि भारत अब सिर्फ जवाब देने वाला देश नहीं, बल्कि पहले से तैयार रहने वाला देश है. ब्रह्मोस, स्विफ्ट-के, S-400 और AI जैसे हथियार भारत को न सिर्फ सुरक्षित बनाएंगे, बल्कि वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में भी स्थापित करेंगे । अगली बार जब कोई दुश्मन भारत की तरफ आंख उठाएगा, तो उसे पता होगा कि भारत की सेना और उसके हथियार किसी भी चुनौती को पलटने के लिए तैयार है।. तो, तैयार हो जाइए एक ऐसे भारत के लिए, जो न सिर्फ अपनी रक्षा करेगा, बल्कि दुनिया को अपनी ताकत का अहसास भी कराएगा ।

 

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कैबिनेट के फैसले में पीएम धन-धान्य कृषि योजना के लिये मिले 24 हजार करोड़ और ग्रीन एनर्जी के लिये 27 हजार करोड़ रूपये खर्च करेगी मोदी सरकार

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार का हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश की कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को नयी दिशा देने वाले 3 बड़े फैसलों को मंजूरी दे दी गयी है। इनमें एक ओर जहां कृषि जिलों के समग्र्र विकास की योजना को स्वीकृति दी गयी। वहीं, दूसरी ओर रेन्वेबल एनर्जी में बड़े पैमान पर निवेश का रास्ता साफ किया गया है। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को 2025-26 से शुरू कर 6 वर्षो के लिये मंजूरी दी है। इसका टारगेट 100 कृषि जिलों का विकास करना है। यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिलों के कार्यक्रम से प्रेरित है। लेकिन यह खासतौर से कृषि और उससे जुड़े इलाकों पर केन्द्रित है।
एनटीपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिये 20 हजार करोड़ रूपये
कैबिनेट ने एनटीपीसी लिमिटेड रेन्वेबल एनर्जी इलाके में निवेश के लिये मौजूदा सीमा से ऊपर जाकर 20 हजार करोड़ रूप्ज्ञये तक निवेश की अनुमति दी है। यह निवेश एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एनजीईएल) और इसकी सहायक कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों के जरिये किया जायेगा। 2032 तक 60 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल की जा सके।
100 जिलों के लिए कृषि योजना को मंजूरी
कैबिनेट ने 24 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक खर्च वाली प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दी है. कैबिनेट ने बुधवार को 6 साल के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दे दी, जिसमें 24,000 करोड़ रुपये के वार्षिक परिव्यय के साथ 100 ज़िले शामिल होंगे. केंद्रीय बजट में घोषित यह कार्यक्रम 36 मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगा। वहीं, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने को बढ़ावा देगा।
एनएलसी इंडिया लिमिटेड को 7,000 करोड़ रुपये की मंजूरी
एनएलसीआईएल को भी 7,000 करोड़ रुपये के निवेश की विशेष छूट दी गई है, जो वह अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी NLC इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (NIRL) के जरिए रेन्वेबल एनर्जी प्रोजेक्ट में लगाएगी. इससे कंपनी को संचालन और वित्तीय लचीलापन मिलेगा।

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प्लास्टिक की पॉलीथिन में चाय पैक कराना बेहद खतरनाक, इससे हो सकती हैं गभीर बीमारियों का जोखिम

नई दिल्ली. क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस की सीट पर बैठे-बैठे बाहर टपरी से चाय मंगवाते है। गर्म-गर्मा चाय की सुड़की मारते हैं। यह देखने मे ंतो काफी अच्छी महसूस होती है। क्योंकि ऑफिस में आराम से सीट पर बैठकर एसी की ठंडी हवा में बाहर की अदरक वाली गर्म-गर्म चाय पीना किसे पसंद नहीं होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे आपकी सेहत पर काफी नुकसान पड़ सकता है। लेकिन बाहर की चाय पीने से कैसे आपकी सेहत बिगड़ सकती है। क्या आप भी यहीं सोच रहे हैं।
बाहर से जब आप चाय लेकर ऑफिस में आते हैं तो चाय वाले भैय्या आपको प्लास्टिक की पन्नी में चाय पैक करके देते हैं। खौलती हुई गर्म चाय को जब आप प्लास्टिक में रखते हैं तो इसमें माइक्रो प्लास्टिक के कण चाय के साथ आपके शरीर में चले जाते हैं। जिससे आपको हार्मोनल समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो पॉलीथिन और प्लास्टिक के कप में खतरनाक केमीकल्स जैसे थैलेट्स, बिस्फेनॉल ए (बीपीए) और स्टाइरीन मोनामर्स चाय में घुल सकते है। यह सभी केमीकल्स हाई टेम्परेचर को नहीं झेल सकती हैं। अगर आपकी चाय या खाने की कोई भी चीज 60 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म है तो इससे आपका खाना या चाय खराब हो सकती है।

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सिंगर राहुल फााजिलपुरिया पर प्राणघातक हमला, गुरूग्राम में की गयी राउंड फायरिंग

नई दिल्ली. हरियाणवी और बॉलीवुड सिंगर राहुल फाजिलपुरिया पर फायरिंग की जानकारी सामने आ रही है। गुरूग्राम के एसपीआर रोड पर अज्ञात बदमाशों ने इस बारदात को अंजाम दियाहै। इस हमले में राहत की बात यह है कि राहुल को गोली नहीं लगी है। पुलिस जांच में जुटी है।
बिजनेस घराने से संबंध रखने वाले फाजिलपुरिया सिंगर के साथ-रैंपर भी है। उन्हें हरियाणवी गानों को गाने के लिय जाना जात है। इसके अलावा उन्होंने हिन्दी फिलमों में भी गाने गाये है। उन्हें बॉलीबुड में फिल्म कपूर एंड संस के लड़की व्यूटीफुल गाने से खासी पहचान मिली है। इसके अलावा लाला लोरीख्, बिल्ली बिल्ली, 32 बोर, जिम्मी चू, मिलियन डॉलर, टू मैनी गर्ल, और हरियाणा रोडवेज समेत कई फेमस गाने गाये हैं। 32 बोर गाने में उन्हें एल्विश यादव के संग देखा गया था।

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छांगुर बाबा की कोठी गिराने का खर्च भी वसूलेगा प्रशासन, बुलडोजर से गिराई आलीशान को ध्वस्त किया था

बलरामपुर. उत्तरप्रदेश के बलरामपुर में जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की जिस आलीशान कोठी को प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त किया था। अब उस ध्वस्तीकरण का खर्चा भी छांगुर बाबा से वसूला जायेगा। बाबा की कोठी पर हुई ध्वस्तीकरण की इस कार्यवाही के बाद उस पर वसूली का नोटिस चस्पा किया गया जायेगा। सरकारी जमीन पर बनाये गये हिस्से के ध्वस्तीकरण में आये खर्च की वसूली उसी से की जायेगी।


आपको बता दें कि बलरामपुर जिला प्रशासन आज कोठी पर चस्पा वसूली का नोटिस करन जा रहा है। ध्वस्तीकरण में जेसीबी का खर्च, सुरक्षा में लगी पुलिसकर्मियों के 3 दिन का वेतन सहित अन्य खर्च शामिल है। जिसे छांगुर बाबा से वसूल किया जायेगा। यह रकम 8 लाख 55 हजार रूपये से अधिक है। गौरतलब है कि छांगुर बाबा की जिस कोठी एक -एक बड़े हिस्से को जमींदोज किया गया। वह किसी महल से कम नहीं थी। पूरी कोठी सीसीटीवी से लैस थी। इसमें प्रायवेट पावर प्लांट लगाया था। दर्जनों सोलर पैनज भी लगे थे और इतना ही नहीं बांउड्री पर कटीले तार बिछे थे।
कथित तौर पर इनमें करंट दौड़ता था। ताकि कोई कोठी के आसपास फटक न पाये। कोठी के अंदर ही एक सीक्रेट कंट्रोल रूम भी था। जिससे पूरे घर के सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जाती थी। यह कंट्रोल रूम बाबा के बेडरूम में था। अन्दर-बाहर आने-जाने वाले हर व्यक्ति की इसमें रिकॉर्डिंग होती थी।
उल्लेखनीय है कि यूपी पुलिस छांगुर बाबा, उसकी नजदीकी नीतू रोहिरा, नीतू के पति जलालुद्दीन और बाब के बेटे को पहले ही गिरफ्तार कर चकी है। शेष आरोपियों की तलाश जारी है। मामले में एटीएम और ईडी जांच में जुटी है। करोड़ों रूपयों की फंडिंग कीबात भी सामने आयी है। बाबा के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के संपर्क में होने के इनपुट मिले हैं।

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टेकऑफ के तत्काल बाद दोनों इंजन हो गये बंद, प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा

नई दिल्ली. अहमदाबाद में 12 जून को हुए एयर इंडिया के विमान हादसे को लेकर भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। इसमें पता चला है कि टेकऑफ के कुछ सेकंड ही बाद विमान के दोनों इंजन अचानक अपने-आप बंद हो गये थे। जिससे विमान गिरने की नौबत आ गयी।
AAIB  की 16 पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार विमान ने सुबह लगभग 8.08 बजे 180 नॉट्स की अधिकतम इंडिकेटेड एयरस्पीड हासिल की। इसके तत्काल बाद इंजन-1 और इंजन-2 के फ्यूल कट ऑफ स्विच (जो इंजन को ईधन भेजते हैं) रन से कटऑफ पोजिशन में चले गये और वह भी सिर्फ 1 सेकेंड के अंतराल पर जिससे इंजनों में ईधन आना बंद हो गया और दोनों इजन के एन1 और एन2 रोटेशन स्पीड तेजी से गिरने लगी।

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बिहार वोटर वेरीफिकेशन पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार, जारी रहेगा SIR

नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटरलिस्ट के विशेषगहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस बीच याचिकाकर्त्ताओं और चुनाव आयोग का पक्ष सुनने के बाद न्यायालय ने एसआईआर पर रोक लगाने से मना कर दिया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से कहा है कि दस्तावेजों की सूची अंतिम नहीं है। न्यायालय ने आयोग से प्रूफ के तौर पर आधार, वोटरकार्ड और राशन कार्ड को शामिल करने को कहा है जिसका आयोग ने विरोध किया तो सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि हम आपको रोक नहीं रहे हैं। हम आपसे कानून क तहत एक्ट करने के लिये कह रहे हैं। कोर्ट अब इस मामले पर 28 जुलाई को सुनवाई करेगां।
चुनाव आयोग पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में मान्यता न देने को लेकर चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाया है।  आयोग के वकील ने जवाब देते हुए कहा कि सिर्फ आधार कार्ड से नागरिकता साबित नहीं होता. इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर आप वोटर लिस्ट में किसी शख्स का नाम सिर्फ देश की नागरिकता साबित होने के आधार पर शामिल करेंगे तो फिर ये बड़ी कसौटी होगी। यह गृह मंत्रालय का काम है. आप उसमे मत जाइए. उसकी अपनी एक न्यायिक प्रक्रिया है. फिर आपकी इस कवायद का कोई औचित्य नहीं रहेगा. चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि आरपी एक्ट में भी नागरिकता का प्रावधान है। कोर्ट ने कहा कि आपको अगर यह करना है तो फिर इतनी देरी क्यों की।  यह चुनाव से ठीक पहले नहीं होना चाहिए।  सिंघवी ने दलील दी कि किसी को भी मतदाता सूची से बाहर करने की प्रक्रिया यह है कि मैं आऊंगा और किसी के खिलाफ अपनी आपत्ति का सबूत दूंगा. फिर चुनाव आयोग सुनवाई के लिए नोटिस जारी करेगा. लेकिन यहां सामूहिक रूप से चार से सात करोड़ लोगों को निलंबित कर दिया गया है कि यदि आप फॉर्म नहीं भरते हैं तो आप बाहर हो जाएंगे।  जब तक कि हम यह सत्यापित न कर लें कि आप उस मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं, जिसमें आप पहले से ही शामिल हैं।

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