Author: Mahesh Jha

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अवैध रेत खनन रोकन में असफल TI निलंबित, सबलगढ थाना प्रभारी जांच पूरी होने तक रहेगी लाइन अटैच

मुरैना. एसपी धर्मराज मीणा ने सबलगढ़ थाना टीआई राजकुमारी परमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। टीआई पर अवैध रेत खनन रोकने, जुआ फड़ पर कार्यवाही करने में लापरवाही बरतने और प्रशासनिक अधिकारियों को सहयोग नही ंदेने के गंभीर आरोप है। निलंबन की इस कार्यवाही के बाद उन्हें पुलिस लाइन में अटैच कर दिया है। जिला प्रशासन और पुलिस इस वक्त अवैध रेत उत्खनन व परिवहन को रोकने के लिये संयुक्त रूप से सख्त अभियान चला रहे हैं। इसके बावजूद सबलगढऋ थाना इलाके में माफियाओं पर कार्यवाही का आंकड़ा बेहद कम रहा है। हाल ही में शहर के अन्दर अवैध रेत परिवजन करते वाहनों के कुछ वीडियो सामने आये थे। इसके अलावा, सबलगढ़ किले पर सरेआम जुआ खेलने का एक वीडियो भी सामने आया था। लेकिन स्थानीय पुलिस ने इन मामलों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
प्रशासनिक अधिकारियों के असहयोग का आरोप
एसपी धर्मराज मीणा को सबलगढ़ थाना टीआई की लगतार शिकायतें मिल रही थी। अवैध गतिविधियों पर नरमी बरतने के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्यवाही के बीच टीआई पर प्रशासनिक अधिकारियों को पर्याप्त सहयोग न देने की भी शिकायत है।
लगातार मिल रही इन्हीं गभीर शिकायतों और ड्यूटी में लापरवाही को देखते हुए एसपी ने यह सख्त कदम उठाया है। एसपी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि थाना प्रभारी राजकुमारी परमार को कार्यवाही के प्रति उदासीनता बरतने पर निलंबित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक इस पूरे मामले की विभागीय जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक टीआई पुलिस लाइन में ही अटैच रहेगी।

 

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कलेक्टर-एसपी ने देर रात चंबल के कुल्हाड़ा घाट पर मारा छापा, रेत माफियाओं में हड़कंप

मुरैना. चंबल नदी से रेत के अवैध खनन एवं अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अधिकारी रतजगा कर रहे है। कलेक्टर-एसपी कभी रात में हाईवे पर वाहनों की चेकिंग करवा रहे है तो कभी चंबल के घाटों पर पहुंच रहे है। बीती रात 2 बजे कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड और एसपी धर्मराज मीना नगरा थाना क्षेत्र के कुल्हाडा घाट पर पहुंचे। इससे पहले अंबाह के कुथियाना घाट का निरीक्षण किया।
औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर जांगिड अवैध रेत खनन गतिविधियों, रेत परिवहन व्यवस्था, सुरक्षा मानकों तथा शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के पालन की जानकारी घाट पर तैनात वनटीम व पुलिस बल से ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि खनन कार्य पूरी पारदर्शिता एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किए जाएं तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
एसपी धर्मराज मीणा ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि रेत घाटों एवं परिवहन मार्गों पर नियमित निगरानी रखी जाए तथा अवैध परिवहन, ओवरलोडिंग एवं नियमों के उल्लंघन के मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन एवं पुलिस का संयुक्त अमला लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर कानून व्यवस्था एवं खनिज नियमों के पालन को सुनिश्चित करेगा।

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जीवाजी विश्वविद्यालय कार्य परिषद की 4 घंटे चली बैठक में कई अहम निर्णय, गेस्ट फैकल्टी मानदेय वृद्धि पर बनेगी समिति

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य की अध्यक्षता में कार्य परिषद (EC) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कुलसचिव राजीव मिश्रा सहित कार्य परिषद के सदस्य उपस्थित रहे। विभिन्न प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद कई अहम निर्णयों को मंजूरी प्रदान की गई।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी का मानदेय बढ़ाने का रहा। इस संबंध में सदस्यों ने वर्तमान मानदेय को अपर्याप्त बताते हुए वृद्धि की आवश्यकता पर जोर दिया। विस्तृत अध्ययन एवं सुझाव प्रस्तुत करने के लिए दो दिनों के भीतर एक समिति गठित करने का निर्णय लिया। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आगामी बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत संचालित कुछ महाविद्यालयों के स्थानांतरण से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। सदस्यों ने संबंधित कॉलेजों की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इस विषय पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने का निर्णय लिया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में स्थित गेस्ट हाउस के नवीनीकरण (रिनोवेशन) को भी कार्य परिषद की स्वीकृति मिल गई। लंबे समय से गेस्ट हाउस के आधुनिकीकरण और सुविधाओं के विस्तार की मांग की जा रही थी। स्वीकृति मिलने के बाद भवन में आवश्यक मरम्मत, सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाएं विकसित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
बैठक में विश्वविद्यालय के प्रमुख सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों के केंद्र गालव सभागार की स्थिति पर भी चर्चा हुई। परिषद ने सभागार में एयर कंडीशनिंग सिस्टम, प्रकाश व्यवस्था तथा कुर्सियों की मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों को मंजूरी प्रदान की। अधिकारियों का मानना है कि इन कार्यों के पूरा होने के बाद सभागार में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
ईसी सदस्य के प्रस्ताव विरोध में कुलगुरू
28 अप्रैल को कार्य-परिषद की बैठक में बिंदु क्रमांक 20 पर किये जा रहे संशोधन पर ईसी सदस्य प्रदीप शर्मा ने आपत्ति दर्ज कराई है। जबकि बिंदु क्रमांक 20 में संशोधन के प्रस्ताव लाया गया था। इसमें बाहरी व्यक्ति का नाम बतौर एक्सपर्ट जोड़ने का मामला था। इसमें अधिनियम 1973 की कंडिका 1 (5) सरासर उल्लंघन बताया गया है। यह प्रस्ताव कार्य परिषद के सदस्य प्रदीप शर्मा द्वारा लाया गया था।
भवन समिति का गठन
अध्यक्ष ’कुलगुरू, सदस्य -कलेक्टर, नगर निगम के अधीक्षण यंत्री, पीडब्ल्यूडी से अधीक्षण यंत्री, पीडब्ल्यूडी के कार्यपालनयंत्री, सदस्य -कुलसचिव, कार्य परिषद् द्वारा नामित किये 2 ईसी सदस्य, सदस्य- विश्वविद्यालय यंत्री और पदेन सचिव आदि को शामिल किया गया है।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में बीएससी कॉलेज से संबंधित छात्रों को राहत दी गई। परिषद ने निर्णय लिया कि जिन विद्यार्थियों ने फीस अथवा अन्य भुगतान बैंकिंग माध्यम से किए हैं, उन्हें बैंक स्टेटमेंट के आधार पर भुगतान का प्रमाण मानते हुए आवश्यक मान्यता प्रदान की जाएगी। इससे उन छात्रों को राहत मिलेगी जिनके पास भुगतान की अन्य रसीदें उपलब्ध नहीं हैं।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के विकास कार्यों, वित्तीय मामलों, शैक्षणिक गतिविधियों और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। सदस्यों ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्य परिषद की बैठक में ईसी सदस्य प्रदीप शर्मा, मनु, रितु नामधारी, प्रमोद सक्सेना, प्रो. महापात्रा, गणेश दुबे, प्रो. बापट सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों को विश्वविद्यालय के विकास और छात्रों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी जीरो हुई, 22% से 30% मिलाने पर टैक्स नहीं लगेगा

नई दिल्ली. केंद्र सरकार 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगी। ई20, यानी 20 प्रतिशत एथनॉल मिले पेट्रोल पर कोई राहत नहीं दी गई है। केंद्र सरकार ने देश में क्रूड ऑयल, यानी कच्चे तेल के एम्पोर्ट को कम करने और क्लीन एनर्जी को बढावा देने के लिए यह कदम उठाया है।
पेट्रोल में 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिला होगा
भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर पेट्रोल में हाई लेवल एथेनॉल ब्लेंडिंग को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त कर दिया है। इसके तहत जिस पेट्रोल में 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिला होगा उस पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। इस टैक्स छूट के दायरे में पेट्रोल के चार नए वेरिएंट्स- ई22, ई25, ई27 और ई30 शामिल होंगे। यह पहली बार है जब सरकार ने ई20 से ऊपर के ब्लेंड्स के लिए इतने बडे फाइनेंशियल सपोर्ट, यानी फिस्कल इंसेंटिव देने की घोषणा की है।
क्या होता है एथेनॉल
एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाडियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सडे आलू कसावा और सडी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किय जा सकता है।

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भैंस खरीदने के लिये दोस्त के घर गई 55 लाख रूपये की चोरी, लड़की वालों पर शक, 17 दिन बाद खुला चोरी का राज

मुरैना. नंदपुरा गांव में एक सेवानिवृत्त फौजी के घर से 55 लाख रूपये की चोरी का मामला सामने आया था। मामले का सबसे चौकाने वाला पहलू यह है कि चोरी का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि फौजी का जिगरी दोस्त निकाला है। उसने सिर्फ एक लाख रूपये की भैंस खरीदने के लालच में एक शातिर इमानी गैंग से दोस्त के घर की मुखबिरी कर दी। देवगंढ़ थाना पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता (दोस्त) समेत गैंग के 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से चोरी का पूरा सामान भी बरामद कर लिया गया है।

मुरैना पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे 55 लाख का सामान भी बरामद कर लिया है। - Dainik Bhaskar
क्या है मामला
सेवानिवृत्त फौजी विष्णु सिकरबार के बेटे (जो स्वयं सेना में हैं) के लिये 22 मई को भिंड से लड़की वाले रिश्ता लेकर आये थे। सुबह 11 -5 बजे तक घर में मेहमान नवाजी और चर्चा का दौर चला। मेहमानों के जाने के लगभग 1 घंटे के बाद जब फौजी विष्णु सिकरवार भीतर गये तो उन्हें अपनी लायसेंसी बन्दूक गायब मिली। जब पूरे घर की तलाशी ली गयी तो उनके होश उड़ गये। घर में मायके आयी उनकी 2 विवाहित बेटियों के गहने, बक्से और लगभग 1.50 लाख नगद गायब थे। छत पर जाने पर पीछे के खेत में टूटे हुए सूटकेस पड़े मिले। दिनदहाड़े हुई इस चोरी से गांव में यह अफवाह फैल गयी। लड़की वालों ने परिवार को सम्मोहित कर चोरी की है।
पुलिस जांच में खुला राज, दिन में नहीं, रात में हुई थी चोरी
मामले की जांच कर रहे एसपी धर्मराज मीणा को मुखबिर से सूचना मिली कि इस वारदात के पीछे 32 हजार रुपए के इनामी बदमाश रामस्वरूप उर्फ स्वरूपा गुर्जर का हाथ हो सकता है। पुलिस ने जब स्वरूपा को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरी कहानी ही बदल गई। पता चला कि चोरी 22 मई को दिन में नहीं, बल्कि 21 मई की रात को ही हो चुकी थी। परिवार के लोग रात में कूलर चलाकर सो रहे थे, तभी चोर खेतों के रास्ते छत से होते हुए घर में घुसे और माल समेटकर फरार हो गए। दिन में तो सिर्फ उसका पता चला था, जिसके कारण लड़की वालों पर गलत शक गया।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि इस पूरी कहानी का असली सूत्रधार फौजी का दोस्त रामप्रकाश उर्फ रम्पा सिकरवार था। कुछ दिन पहले इनामी बदमाश स्वरूपा के बेटे के जन्मदिन की पार्टी थी। वहां रम्पा ने कहा कि उसे भैंस खरीदने के लिए 1 लाख रुपए की जरूरत है।
शातिर चोर स्वरूपा ने रम्पा के सामने प्रस्ताव रखा कि अगर वह किसी बड़े घर की सटीक जानकारी (टिप) देगा तो उसे 1 लाख रुपए मिलेंगे। लालच में आकर रम्पा ने अपने ही फौजी दोस्त के घर का पूरा राज खोल दिया कि उसकी दोनों बेटियां गहनों के साथ मायके आई हुई हैं।

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RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पत्नी की सर्जरी और बच्चों की देखभाल का आधार पर मांगी जमानत, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

जबलपुर. आरटीओ में तैनात रहे करोड़पति पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई की गयी थी। अस्थाई जमानत (टेम्प्रेररी बेल) आवेदन पर सुनबाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरखित रख लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि इस पर एक-दो दिन में फैसला आ सकता है। सौरभ शर्मा ने पत्नी की सर्जरी और बच्चों की देखभाल का हवाला देते हुए जमानत अर्जी दायर की है। आपको बता दें कि सौरभ शर्मा प्रदेश के बहुचर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लॉड्रिंग मामले के मुख्य आरोपी है।
गर्मियों की छुट्टियों के बीच जस्टिल विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले कि जिला अदालत और हाईकोर्ट दोनों ही सौरभ शर्मा की नियमित जमानत यचिकाये खारिज कर चुके हैं। इस बार सौरभ शर्मा ने पत्नी दिव्या तिवारी की सर्जरी और 2 बच्चों की देखभाल का आधार बनाकर 60 दिन की अस्थाई जमानत की मांग की है। इससे पहले जबलपुर हाईकोर्ट में 108 करोड़ रूपये की संपत्ति, 51 किलो सोना और मनी लॉड्रिंग से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अब हाईकोर्ट में दायर 60 दिन की अस्थाई जमानत याचिका पर फैसला आना बाकी है।
बच्चों की देखभाल और पत्नी की सर्जरी का आधार बनाकर मांगी जमानत
सौरभ शर्मा ने अपनी जमानत याचिका में कहा गया है कि उसकी पत्नी दिव्या तिवारी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है। याचिका के अनुसार,उसे डिविएटे डनेजल सेप्टम क्रॉनिक साइनसिस्टम और नॉक संबंधी जटिल समस्या है। जिसके चलते डॉक्टर ने फंक्शनल एंडोस्कोपी साइनस सर्जरी की सलाह दी है। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के बाद भी देखभाल के लिये पति की मौजूदगी आवश्यक है। जमानत याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि उसके 2 नाबालिग बच्चे अमीर और सुबीर तरह से अपने माता-पिता पर ही निर्वाह है। पत्नी के अस्पताल में भर्ती रहने और सर्जरी के बाद रिकवरी के दौरान बच्चों की देखभाल करने वाला कोई अन्य जिम्मेदार सदस्य नहीं है। इस मानवीय आधार पर उसे 60 दिन की अस्थाई जमानत दी जाये।
ईडी ने परिवार और करीबी लोगों के नाम पर संपत्तियां होने का किया दावा
ईडी के मुताबिक, चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल और रोहित तिवारी जैसी हस्तियां उसकी कंपनियों से जुड़ी है। पत्नी दिव्या तिवारी, मां उमा शर्मा, सास रेखा तिवारी और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर जमीन, कंपनियां, स्कूल, प्रोजेक्ट, पेट्रोल पंप और अन्य संपत्तियां होने का दावा जांच एजेंटीयों ने किया है, ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब कथित तौर पर पूरा आर्थिक साम्राज्य इतने लोगों के सहारे संचालित हो रहा था, तो पत्नी के इलाज और बच्चों की देखभाल के लिए सौरभ शर्मा को आखिर क्यों जमानत अर्जी दायर करनी पड़ रही है।

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8th Pay Commission-8वें वेतन आयोग से पहले मिलने अनुमान DA Hike

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार के कर्मचारी-पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन इसके तहत कितनी सैलरी बढ़ेगी और कब तक खातों में आयेगी। इसे लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं हो पायी है। इस दौरान महंगाई के आंकड़ों में ऐसी संभावनायें बढ़ती दिखाई दे रही है। 8वें वेतन पे से पहले केन्द्रीय कर्मचारियों को जुलाई से महंगाई भत्ते में वृद्धि का तोहफा मिल सकता है।
मिलेगी राहत
एक ओर जहां लाखों केन्द्रीय कर्मचारी 8th Pay Commission के तहत वेतन में बड़े संशोधन की सिफारिशों लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं इस इंतजार के बीच उन्हें महंगाई भत्ते में वृद्धि के रूप् में एक छोटी, लेकिन तत्काल राहत मिल सकती है। श्रम ब्यूरो द्वारा जारी नये महंगाई के आंकड़ों ने इस उम्मीद को और मजबूत किया है। 8th Pay Commission के सामने कर्मचारी संघ यह तर्क मजबूती के साथ रख रहे है कि महंगाई के चलते बढ़ती कीमतों ने जीवन यापन की लागत को लगातार बढ़ाने का काम किया है और खर्च करने की शक्ति कमजोर हुई है।
DA Hike 3%  मिल सकता है
केन्द्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 60% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। ताजा कैलकुलेशन के आधार पर देखें तो यह 63% हो सकता है। यानी कि 3प्रतिशत DA Hike  की उम्मीद है हालांकि अंतिम दर मई-जून 2026 के लिये AICPI-IW के आंकड़ों और उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी पर निर्भर करेगी।
8th Pay Commission से कर्मचारियों की डिमांड
कई कर्मचारी संगठनों ने तर्क दिया है कि बढ़ती महंगाई औरे जीवन यापन के बढ़ते खर्चो केलिये वेतन में अहम संशोधन की आवश्यकता है। 8th Pay Commission के सामने रखी गयी है। प्रमुख मांगों में हाई फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन में संशोधन, महंगाई भत्ता का मूल वेतन में विलय और मजबूत पेंशन सुरक्षा शामिल है। कुछ कर्मचारी यूनियनों ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है। गौरतलब है कि वेतन और पेंशन को लेकर चर्चा जारी रहने के बीच, 8वें वेतन आयोग ने ज्ञापन प्रस्तुत करने की अंतिम समय सीमा को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। आयोग ने यह भी कहा है कि ज्ञापन सिर्फ उसकी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा किये जाने चाहिये औरा हार्डकॉपी, भौतिक दस्तावेज, ईमेल या पीडीएफ पर विचार नहीं किया जायेगा।

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भाजपा के इशारे पर मीनाक्षी का नामांकन निरस्त करने, लोकतंत्र की हत्या करने के विरोध में कांग्रेस का शांतिपूर्ण उपवास एवं सत्याग्रह में

ग्वालियर -मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर कांग्रेस अध्यक्ष सुरेन्द्र यादव के निर्देश पर शहर जिला कांग्रेस कमेटी ग्वालियर द्वारा फूलबाग स्थित गांधी उद्यान में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष हाथ पर काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण उपवास, सत्याग्रह एवं धरना प्रदर्शन आयोजित कर भाजपा सरकार द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या के विरुद्ध जोरदार विरोध दर्ज कराया गया।
धरना-उपवास को संबोधित करते हुए कांग्रेसजनों ने कहा कि मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जिस प्रकार निरस्त किया गया है, वह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि भाजपा द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र है। भाजपा के दबाव और प्रभाव में लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया है। भाजपा के इशारे पर यह कार्यवाही लोकतंत्र पर सीधा हमला और सीट चोरी है।
जब भाजपा राजनीतिक रूप से कांग्रेस का मुकाबला नहीं कर पा रही है, तब वह संवैधानिक संस्थाओं को अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति का माध्यम बनाने में लगी हुई है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज देश में विपक्षी नेताओं को चुनावी मैदान से बाहर करने के लिए तकनीकी बहानों और प्रशासनिक दबाव का सहारा लिया जा रहा है। भाजपा का यह कृत्य न केवल लोकतंत्र के लिए घातक है बल्कि संविधान की आत्मा पर भी कुठाराघात है।
भाजपा का जन्म ही सत्ता प्राप्ति की राजनीति से हुआ है, वह लोकतंत्र की गरिमा को कभी नहीं समझ सकती। भाजपा विपक्ष को समाप्त करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और संविधान की मूल भावना को कुचलने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। लेकिन कांग्रेस पार्टी देश की जनता के साथ मिलकर इस तानाशाही मानसिकता का लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करेगी।

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ग्वालियर में ड्रग लाइसेंस में सेटिंग और रिश्वतखोरी के आरोप, प्रशासन खामोश

ग्वालियर. शहर में ड्रग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खडे हो गए है। ड्रग लाइसेंस बनवाने के नाम पर ड्रग इंस्पेक्टर से सांठगांठ और रिश्वतखोरी के दावों का मामला उजागर होने के बाद भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मामले में ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी का नाम सामने आने के बाद बावजूद जांच और जवाबदेही को लेकर चुप्पी बनी हुई है।
27 हजार रुपये ड्रग इंस्पेक्टर के लिए
जानकारी के अनुसार पडताल में सामने आया कि मेडिकल स्टोर का ड्रग लाइसेंस बनवाने के लिए सक्रिय दलाल खुलेआम अधिकारियों से सेटिंग होने का दावा कर रहे है। जांच के दौरान मनोज मंगवानी नामक व्यक्ति ने ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी से सीधी सांठगांठ होने की बात कही थी। उसने दावा किया कि लाइसेंस बनवाने का कुल खर्च 61 हजार रुपये आएगा जिसमें 27 हजार रुपये कथित तौर पर ड्रग इंस्पेक्टर के लिए और 28 हजार रुपये फार्मासिस्ट की व्यवस्था के लिए और 6 हजार रुपये आवेदन शुल्क के रूप में लिए जाएंगे।
पूरा मामला अधिकारियों तक पहुंचा
जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है। लाइसेंस बनवाने के नाम पर अवैध वसूली और अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बावजूद अब तक न तो किसी दलाल पर कार्रवाई हुई है और न ही मामले की औपचारिक जांच शुरू की गई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है।
कार्यालय से भी दूर हैं ड्रग इंस्पेक्टर
सूत्रों के अनुसार, विवाद सामने आने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी इन दिनों ग्वालियर कार्यालय में नियमित रूप से नहीं बैठ रहे हैं। अब सवाल यह है कि इतने गंभीर खुलासे के बाद भी जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने से क्यों बच रहे हैं और लाइसेंस प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कब होगी।

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सबसे लंबे समय तक PM रहने का रिकॉर्ड नरेंद्र मोदी के नाम

नेहरू 4398 दिन रहे, मोदी को 4399 हो गए
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी के नाम आज बुधवार को एक और रिकॉर्ड दर्ज हो गया। यह रिकॉर्ड इसलिए काफी अहम है क्योंकि भारत जैसे देश में, जहां जनता चुनाव पर सरकार पलट देती है, ऐसे हालात में देश की जनता ने 3 बार BJP को सरकार चलाने का मौका दिया और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया। देश में अभी तक सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू के नाम था। नेहरू 4398 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे थे, पर मोदी ने प्रधानमंत्री रहते हुए आज 4399 दिन पूरे कर लिए और अभी उनके 3 साल का कार्यकाल शेष है।
अंतर यह है
नेहरू जब पहली बार प्रधानमंत्री बने थे तो उन्हें जनता ने नहीं चुना था। उन्हें अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के वक्त प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। पर मोदी जब पहली बार प्रधानमंत्री बने तो जनता ने उन्हें गुजरात से सीधे दिल्ली भेजा। प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने से पहले मोदी 3 बार लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे।इतिहास रचने के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जनसेवा ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है। उन्होंने कहा कि विनम्रता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ निरंतर कार्य करने वाला व्यक्ति ही जनता का विश्वास अर्जित कर सकता है। उन्होंने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया।
हर मोर्चे पर फतह
मोदी ने अपने बूते पर 3 बार सिर्फ दिल्ली में ही सरकार नहीं बनाई, उन राज्यों में भी भगवा फहराया जहां माना जा रहा था कि BJP जड़ें तक नहीं जमा पाएगी। ताजा उदाहरण पश्चिम बंगाल है, तो इससे पहले 30 साल बाद UP में 2017 में वापसी की थी। दिल्ली भी वापस ली तो ओडिशा में भी लंबे समय बाद BJP की सरकार बनी। पूर्वोत्तर में तो सिर्फ बीजेपी ही नजर आती है। आज देश के 22 राज्यों में बीजेपी/एनडीए की सरकार है।
आगे अग्निपरीक्षा
मोदी ने सबसे लंबे समय तक PM  रहने का रिकॉर्ड तो अपने नाम कर लिया। इससे यह भी तय है कि इस रिकॉर्ड तक पहुंचना अब किसी नेता के लिए ख्वाब से कम नहीं होगा। पर आने वाले समय में मोदी को कड़ी परीक्षा से गुजरना है। भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। भारत की जीडीपी को वहां पहुंचाना है जहां भारत, जर्मनी-अमेरिका को टक्कर दे सके। मोदी विकसित भारत के विजन को लेकर पहले ही आगे बढ़ चुके हैं। यह सब चुनौतियां तब हैं जब खाड़ी युद्ध के चलते दुनिया भर के देशों की आर्थिक हालत प्रभावित हो रही है।
दिल्ली में आज जश्न
मोदी सरकार के आज ही 12 साल पूरे हुए।
इस मौके पर भारत मंडपम में एक बैठक रखी गई है।
इसमें एनडीए शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री के अलावा एनडीए के 35 सहयोगी दलों के 75 वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
इस बैठक में विकसित भारत के सपने पर मंथन होगा।
रोड मैप तैयार किया जाएगा।

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