बिना OGW  के पहलगाम हमला संभव नहीं था

नई दिल्ली. पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में आतंकियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिये जांच एजेंसियों ने अलग -अलग जिलों में ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) की तलाश तेज कर दी है। जांच एजेंसियों ने त्राल और अनंतनाग के विभिन्न इलाकों से कई ओजीडब्ल्यू को हिरासत में लिया गया है। यह वही इलाके है। जहां से आतंकियों को खाने-पीने की चीजें और रहने की जगह और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी जाती है।
साउथ कश्मीर में एक ऐसे ओजीडब्ल्यू से बातचीत की। उसने कैमरे पर पहली बार कबूल किया कि कैसे वह आतंकियों के इशारे पर महीनों तक उनके काम करता रहा है। जिसमें उनके लिये खाना पहुंचाना, मूवमेंट में मदद करना और सबसे अहम, फौज की तैनाती की जानकारी देना शामिल था। ओजीडब्ल्यू ने स्वीकार किया कि बिना ओवर ग्राउंड वर्कर के बिना कहीं भी हमला नहीं किया जा सकता है। क्योंकि हमले के लिये इलाके की जानकारी होना जरूरी है।
कैसे तैयार होते ओजीडब्ल्यू
ओजीडब्ल्यू ने बताया कि यह काम किसी पर भरोसा कर चुनने से शुरू होता है। आतंकी अपने सर्किल से ऐसा युवक चुनता है जो मानसिक रूप् से तैयार हो। डरता न हो और उनकी मदद कर सकें । हमें कहा जाता था कि जो बोला जाये, वह हर हाल में करना है। युवक ने बताया है कि ओजीडब्ल्यू, सेना और पुलिस की मौजूदगी की खबर आतंकियों तक पहुंचाते हैं ताकि वह सही समय पर हमला कर सकें।
ओजीडब्ल्यू में पहलगाम अटैक की भूमिका
उसने साफ कहा है कि ओजीडब्ल्यू के बिना कोई भी आतंकी हमला संभवन नहीं है। पहलगाम अटैक की प्लानिंग में भी ओजीडब्ल्यू की भूमिका रहीं होगी। उसने बताया कि कैसे 5-6 ओजीडब्ल्यू पहले से इलाके में मौजूद रहते हैं। आतंकियों को टूरिस्ट मूवमेंट, फोर्स डिप्लॉयमेंट और रास्तों की जानकारी देते हैं।
ब्रेनवॉश और फिर भर्ती
इस ओजीडब्ल्यू का दावा है कि 2015 में एक पाकिस्तानी आतंकी ने सोशल मीडिया के जरिये संपर्क किया और बीबीएम जैसे एन्क्रिप्टेड एप के जरिये लगातार संपर्क में रहा। धीरे-धीरे उसे आतंकी गतिविधियों से जोड़ा गया। पहले खाना पहुंचाने का काम मिला और फिर हथियार, फिर ग्रेनेड अटैल का काम मिला। उसने बताया कि वह एक बार पकड़ा गया। नाबालिग होने की वजह सजा कम हुई और आज वह जेल से छूटने की के बाद पछताता है। ओजीडब्ल्यू ने बताया कि कश्मीर के जंगलों में छिपे आतंकी जमीन के नीचे हाइडआउट बनाकर रहते हैं। वहां वह 2-3 दिन का खाना लेकर जाते है। और जरूरत पड़ी तो ओजीडब्ल्यू मदद करने पहुंच जाते हैं।

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