MP में खुले प्रमोशन के रास्ते, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन रहेंगे
भोपाल. पिछले 9 वर्षो से मध्यप्रदेश में बन्द पदोन्नतियों की राह विधि एवं विधाई विभाग ने खोल दी है। विभाग ने 125 से अधिक कर्मचारियों को विभागीय भर्ती नियम के अनुसार वरिष्ठताक्रम में 1 जनवरी 2024 से पदोन्नति के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी दे दिया। इसमें महाधिवक्ता कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल है।
यह पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण को लेकर विचाराधीन प्रकरण में पारित होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। इसी प्रक्रिया के आधार पर अब अन्य विभागों में भी सशर्त पदोन्नति दी जा सकती है। इसकी ही मांग कर्मचारी काफी समय से कर रहे थे।
पदोन्नति के लिये बनाई मंत्री समिति
उधर, सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि सरकार पदोन्नति का रास्ता निकालने को लेकर गंभीर है और काफी समय से प्रयास भी चल रहे हैं। मंत्री समिति भी बनाई गयी और विधिक परामर्श भी लिया गया। कर्मचारी संगठनों से भी चर्चा की लेकिनि एक राय नहीं बन पाई। अब सभी परिस्थितियों को देखते हुए आगामी कदम उठाये जायेंगे।
बढ़ा हुआ वेतन भी मिल जायेगा
उधर, मंत्रालय अधिकारी -कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने बताया है कि पदोन्नति का सबसे बेहतर विकल्प समयमान -वेतनमान देकर पदनाम दे दिया जाये तो सारी समस्या ही समाप्त हो जायेगी। इससे बढ़ा हुआ वेतन भी मिल जायेगा और पदनाम भी बदल जायेगा।
बिना प्रमोशन के ही हजारों कर्मचारी हो गये रिटायर
हजारों कर्मचारी बिना प्रमोशन पाये ही रिटायर हो गये। इसका रास्ता निकालने का सरकार ने बहुत प्रयास किया पर कभी एक राय नहीं बन पायी। इस दौरान विधि एवं विधायी विभाग के कर्मचारियों ने पदोन्नति न मिलने पर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति में आरक्षण नियम निरस्त हुए है न कि विभागीय भर्ती नियम। मई 2016 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण नियम 2002 को निरस्त कर दिया था। सरकार ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जहां मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों का मामला विचाराधीन है इस वजह से पदोन्नतियां बन्द थे।

