शताब्दीपुरम की 2018 से खदानें बन्द, 6 खदानों के गड्डे राख से भरने खनिज विभाग ने मुख्यालय भेजा प्रस्ताव
ग्वालियर. जिसकी लाठी, उसकी भैंस……सह कहावत भाजपा नेता और अधिकारियों के गठजोड पर सटीक बैठ रही है। सरकार के बनाये नियमों की अधिकारी और भाजपा नेता धज्जियां उठा रहे है। इस बात की पुष्टि शहर में घनी आबादी वाले शताब्दीपुरम क्षेत्र में सटी काले पत्थर की खदानों के गड्डे पट्टाधारियों को भरवाने थे। लेकिन अभी तक अधिकारियों ने शासन के करोड़ों रूपये खर्च करके फ्लाइश (कोयले की राख)से इन्हें भरवाने का प्रस्ताव भोपाल मुख्यालय भेजा है।
न्ेताओं ने 12-13 वर्षो तक यहां अंधाधुंध तरीके से पत्थर का खनन किया। जब सरकार ने यह खदानें बंद की, तब पट्टा धारक इन खदरोंके 180 से 200 फीटठ तक गहरे गड्डों को ऐसे ही खुला छोड़कर चलते बने। जबकि उन्हें यहां गड्डे भरवाकर पौधरोपण भी करना था।
2018 में खदानें बन्द
शताब्दीपुरम से सटे मऊ, जमाहर, विक्रमपुर में 6 खदानों को अप्रैल 2018 में सील कर दिया था। हालांकि, पट्टाधारियों को शासन से 21 माह की अनुमति मिल गयी थी। लेकिन कलेक्टर स्तर पर अनुमति नहीं मिल पाने की वजह से खदानें सील ही रहीं।
6 वर्षो में गड्डे नहीं भरवा पाये अधिकारी, एनजीटी को नहीं दे रहे जवाब
पिछले वर्ष खनिज विभाग ने पट्टाधरियों की अवैध भंडारण के लिये लगभग 1.20 करोड़ रूप्ज्ञये के नोटिस थमाये थे और साथ ही आदेश दिये थे कि वह खदानों का भराव कराकर उन्हें समतल करायें। लेकिन पट्टाधरियों ने भराव नहीं कराया और विभाग ने भी कोई सख्ती नहीं की।
कुछ महीने पहले यह मामला एनजीटी में पहुंचा । जिसमें पर्यावरण के लिये खतरा बने हुए है। एनजीटी ने कलेक्टर, खनिज अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जबाव मांगा था। लेकिन अधिकारी जवाब नहीं दे पाये।
रामनिवास शर्मा की पत्नी मायादेवी शर्मा ने कहा-हमें गड्डं नहीं भरने थे वह तो खनिज विभाग वाले जाने।
खदान-श्याम शर्मा फोन किया लेकिन फोन बात नहीं हो पाई।
खदान- ब्रजेश शर्मा ने कहा है कि हमने बहुत पहले ही खदानें छोड़ दी है। वहां हमें अभी कुछ नहीं करना।
खदान-कुलदीप गौर इनकी अब मृत्यु हो चुकी है।
यह है नियम
मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के अध्याय 5 में लीज की शर्तो एवं खनिज विभाग के पट्टाधारी के बीच होने वाले अनुबंध के प्रारूप 7 में स्पष्ट उल्लेख है कि खदान बन्द करते समय पट्टाधारी द्वारा गड्डों को पूरी तरह भरकर समतल किया जायेगा और साथ ही उस स्थान पर पौधरोपण किया जायेगा।
हाईकोर्ट के सुझाव पर भी अमल नहीं
कचरा निष्पादन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए पिछले माह हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के जस्टिस रोहित आर्या ने कहा था कि खदानों के गड्डे अनुपयोगी कचरे से क्यों नहीं भर दिया जाता है। इसे न तो नगर निगम में गंभीरता से लिया और न खनिज विभाग ने इसके लिये कोई कवायद शुरू की।

