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संगीत विश्वविद्यालय में गुरूपूर्णिमा कला उत्सव-2021 का ऑनलाईन आयोजन संपन्न

ग्वालियर. राजामानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा 23 जुलाई शुक्रवार को गुरूपूर्णिमा कला उत्सव-2021 का ऑलाईन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पं. साहित्यकुमार नाहर सहित समस्त शिक्षकगण अपने विद्यार्थियों के साथ संगीत, नृत्य, नाट्य एवं ललित कला विधाओं की प्रस्तुतियॉं दीं। कार्यक्रम का आयोजन तानसेन सभागार से विश्वविद्यालय के फेस बुक पेज पर लाईव किय गया।
गूरूपूर्णिमा कला उत्सव का प्रारंभ विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण से हुआ जिसमें माननीय कुलपति, शिक्षकगणों एवं कर्मचारियों ने पौधारोपण किया। सांगीतिक प्रस्तुतियों का प्रारंभ मां सरस्वती की माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। दीप प्रज्जवलन के पश्चात् संगीत संकाय के छात्रों शशांक शिवहरे, शुभम बहादुर एवं निखिल शर्मा ने गुरूवंदना ‘‘गुरू बिन कौन बताये बाट’’ प्रस्तुत की। तबला संगति संजय राठौर एवं हार्मोनियम संगति विवेक जैन ने की। गुरू वंदना के पश्चात् डॉ. सुनील पावगी ने गुरू पूर्णिमा के संबंध में अपने विचार व्यक्त किये तत्पश्चात् कुलपति प्रो. साहित्यकुमार नाहर का उद्बोधन हुआ जिसमें आपने सभी को गुरू पूर्णिमा पर्व की शुभकामनाएॅं देते हुए के संगीत में गुरू शिष्य परम्परा के महत्व को बताया। प्रथम प्रस्तुति में डॉ. पारूल दीक्षित ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। आपने राग जौनपुरी में तीनताल में निबद्ध मध्य लय छोटा ख्याल ‘‘प्यारे कन्हाई न मारो कंकरिया‘‘ प्रस्तुत किया। अपने कार्यक्रम का समापन आपने द्रुत लय तीनताल में निबद्ध तराने से किया। आपके साथ आपकी शिष्या कु. प्रज्ञा श्री शर्मा ने गायन में सहयोग किया। तबला संगति विकास विपट, हार्मोनियम संगति विवेक जैन, एवं तानपुरा संगति शशांक शिवहरे तथा श्रृजल गुप्ता ने की। द्वितीय प्रस्तुति में डॉ. सुनील पावगी ने हवाईयन गिटार पर राग बिलासखानी तोडी में मध्य लय गत प्रस्तुत की आपके साथ तबला संगति हितेष मिश्र ने की। आपके वादन में आपके शिष्य साहिल एवं अमन कुमार वर्मा ने साथ दिया। तृतीय प्रस्तुत के पश्चात् श्री मनीष करवड़े ने एकल तबला वादन प्रस्तुत किया। आपने ताल तीनताल में त्रिस्त्र जाति का कायदा, टुकडे, चक्रदार, फरमाईशी रचनाएॅं प्रस्तुत कीं। आपके साथ आपके शिष्य श्री प्रान्त साहू ने तबला एकल वादन में साथ दिया। लहरा संगति श्री अब्दुल हमीद खान ने की। तबला एकल वादन के पश्चात् विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. पं. साहित्य कुमार नाहर ने सितार वादन प्रस्तुत किया जिसमें आपने राग मिश्र भैरवी में दादरा में निबद्ध बंदिश प्रस्तुत की।

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