मलकीत सिंह की पहल पर गर्मी का धान छोड़ मूंग अपनाने वाले छोटे किसानों की करेंगे निःशुल्क मदद
ग्वालियर – ग्राम दौलतपुर (चीनौर) के एक प्रगतिशील किसान मलकीत सिंह ने खेती की पारंपरिक पद्धति को बदलते हुए जल संरक्षण और सामाजिक सरोकार की एक नई मिसाल पेश की है। गिरते भू-जल स्तर को लेकर जागरूक मलकीत सिंह ने न केवल स्वयं अधिक पानी वाली फसल का त्याग किया है, बल्कि वे अन्य साथी किसानों को भी इसके लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
चीनौर तहसील के जो भी छोटे किसान अपनी 2 एकड़ तक की जमीन पर धान की खेती छोड़कर मूंग की बुआई करना चाहते हैं, उन्हें मैं अपनी सुपर सीडर मशीन बुआई के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराऊंगा। इसके लिए किसानों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।
धान के बदले मूंग का विकल्प
विगत 5 वर्षों से लगातार गर्मियों के सीजन में धान (पैडी) की खेती करने वाले श्री मलकीत सिंह ने इस वर्ष पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता के हित में एक बड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने इस बार धान की जगह ‘मूंग’ की बुआई करने का फैसला किया है। मूंग की फसल कम पानी में तैयार हो जाती है और इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है।
आधुनिक तकनीक से खेती को बढ़ावा
सुपर सीडर मशीन के माध्यम से बुआई करने से समय और लागत दोनों की बचत होती है। श्री मलकीत सिंह की इस पहल का उद्देश्य छोटे किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करना और उन्हें कम पानी वाली फसलों की ओर मोड़ना है, ताकि क्षेत्र का जल स्तर सुरक्षित रह सके।

