Newsमप्र छत्तीसगढ़राष्ट्रीय

भोजशाला के गर्भगृह में 6.27 बजे पर विराजी मां वाग्देवी, दिन भर हवन और अनुष्ठान चला

धार. ऐतिहासिक भोजशाला में रविवार की सुबह वह पल आया, जिसका 700 वर्षो का इंतजार हिन्दू समाज इंतजार कर रहा था। एएसआई के आदेश के बाद सुबह 6.27 बजे मां वाग्देवी के प्रतिकृति स्वरूप को गर्भगृह में स्थापित किया गया है।
मंत्रोच्चार, हवन और वास्तु पूजन के बीच पूरा परिसर मां सरस्वती और राजा भोज के जयकारों से गूंज उठा। मोतीबाग चौक स्थित ज्योति मंदिर से मैहर वाली माता की ज्योत और मां वाग्देवी की प्रतिकृति स्वरूप को सिर पर रखकर ढोल-बाजों के साथ भोजशाला लाया गया। जैसे ही मां का स्वरूप गर्भगृह तक पहुंचा, श्रद्धालु भावुक हो उठे। ढोल की थापर युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गो ने जमकर नृत्य किया।
केन्द्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर भी महिलाओं के साथ नृत्य करती नजर आयी। उन्होंने कहा है कि कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रतिमा को वापिस लाना संभव हो गया है। भोज उत्सव समिति के गोपालशर्मा का कहना है कि अभी मां की आत्मा स्थापित हुई है। अब लंदिन से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा लाकर भोजशाला में स्थापित की जायेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

hacklink satın al