होर्मुज के सहारे कब तक 30 वर्षो से अटका था पाइपलाइन बिछाने का कार्य, गुजरात-ओमान के बीच भारत बिछायेगा पाइपलाईन
नई दिल्ली. वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के बीच एनर्जी संकट ने दुनिया को सतर्क कर दिया है। खासकर भारत जैसे देश, जो मिडिल ईस्ट से सप्लाई रूकने के बाद सबसे अधिक प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत तेजी से अपने एनर्जी सप्लाई को निर्बाध करने में जुटा है। भारत ने ओमान से गुजरात केबीच एक लम्बी पाइपलाइन बिछाने के प्रोजेक्ट का ऐलान कर दिया है। यह अरब सागर के पास करीब 2 हजार किमी लम्बी एक गहरे समुद्र में बिछाई जाने वाली गैस पाइपलाइन होगी।
यह ओमान और गुजरात को जोड़ने की लम्बे समय से चर्चित योजना है। क्योंकि भारत तेजी अनिश्चिम भू राजनैतिक तनाव के बीच ज्यादा विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। पिछले 3 दशकों में इस परियोजना की कई बार समीक्षा की गयी है। लेकिन उच्च लागत, तकनीकी बाधाओं और व्यायसायिक परेशानियों की वजह से यह योजना आगे नहीं बढ़ पायी है। अब इस प्रस्ताव को सपोर्ट करने वाले प्रायवेट ग्रुप एसएजीई द्वारा मार्ग और इसकी इंजीनियरिंग चुनौतियों का वैल्यूवेशन करने के लिये समुद्र तल सर्वे के साथ-साथ तकनीकी और वित्तीय अध्ययन पूरा करने के बाद इस परियोजना का नयी गति मिली है।
कैसी दिखेगी ये पाइपलाइन?
प्रस्तावित प्रोजेक्ट, अरब सागर में फैले एक पानी के नीचे के नेटवर्क के माध्यम से ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी. इसकी सबसे खास बात, इसकी गहराई है। मार्ग का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक नीचे होने की संभावना है, जिससे यह अब तक प्रस्तावित सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक बन जाएगी । इतनी गहराई ज्यादातर अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं में पाई जाने वाली गहराइयों से कहीं अधिक है और इसके लिए अत्यधिक विशेष इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता होगी।
गैस आने में कितना होगा खर्च?
इस पाइपलाइन के माध्यम से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के तहत प्राकृतिक गैस का परिवहन होने की उम्मीद है, जिससे संभावित रूप से भारत को अपने ऊर्जा सोर्स में विविधता लाने में मदद मिलेगी। साथ ही ओमान को एक स्थिर निर्यात बाजार भी मिलेगा. परियोजना प्रस्तावों के अनुसार, परिवहन लागत 2-2.25 डॉलर प्रति MMBTU के बीच हो सकती है. हालांकि अंतिम लागत फंडिंग व्यवस्था, निर्माण व्यय और भविष्य में गैस की कीमतों पर निर्भर करेगी।

