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कलेक्टर न्यायालय का फैसला-ग्राम सातऊ में स्थित 24 बीघा जमीन सरकारी घोषित 

ग्वालियर -कलेक्टर न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए ग्राम सातऊ स्थित लगभग 24 बीघा (4.996 हेक्टेयर) बेशकीमती जमीन को फिर से सरकारी घोषित कर दिया है। कलेक्टर रुचिका चौहान के न्यायालय द्वारा  संबंधित तहसीलदार को भूमि को वापस शासन के खाते में दर्ज करने और उसे अतिक्रमण मुक्त कराने के आदेश जारी किए गए हैं। इस भूमि के संबंध में पूर्व में अनुविभागीय राजस्व अधिकारी द्वारा पारित आदेश को भी कलेक्टर न्यायालय द्वारा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 50 के तहत निरस्त कर दिया गया है।
एसडीओ लश्कर द्वारा की गई स्थलीय जांच में पाया गया कि यह जमीन मुख्य हाईवे से जुड़ी हुई है। वर्तमान में इस खाली भूमि पर दो तरफ अस्थाई सीमेंट की बाउंड्रीवॉल बनी हुई है और संबंधित पक्ष द्वारा इस पर कृषि कार्य कर कब्जा किया गया है।
पक्षकारों को विधिवत सुनवाई का मौका देकर लिया गया निर्णय संबंधित पक्षकार भी भूमि पर अपने मालिकाना हक (स्वत्व) से जुड़ा कोई भी कानूनी दस्तावेज या आदेश प्रस्तुत नहीं कर सके। विधिवत सुनवाई के बाद कलेक्टर न्यायालय ने इस भूमि को उसके मूल स्वरूप यानी ‘शासकीय’ घोषित करने का आदेश पारित किया है।
15 दिन में कब्जा हटाने के निर्देश
संबंधित तहसीलदार को आदेशित किया गया है कि वे राजस्व रिकॉर्ड में इस सुधार को अमल में लाएं, अर्थात जमीन को शासन के नाम दर्ज करें। साथ ही मौके पर काबिज कृषक से अगले 15 दिनों के भीतर भूमि का कब्जा वापस लेकर, सरकारी ‘कब्जा रसीद’ कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत करें।

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