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एलिवेटेड रोड -1300 करोड़ रूपये की लागत से तैयार हो रही एलिवेटेड रोड का गर्डर गिरा, घटना खेरापति मंदिर के पास घटी, एक श्रमिक घायल

ग्वालियर. निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड का गर्डर (स्लंेब) ट्रोला से गिरते ही दो टुकड़े हो गये, स्लैब का एक हिस्सा लगभग 2.30 बजे के आसपास गिरा था जिसमें 2 श्रमिकों के घायल होने की खबर है। जिसे पास के ही नजदीकी अस्पताल में इलाज के लिये भर्ती करा दिया गया। यह घटना खेड़ापति मंदिर के पास हुई। सीमेंट का गर्डर 35 फीट लम्बा है। घटना के बाद प्रशासन का अमला वहां पहुंच गया। खबर लगते ही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्नसिंह तोमर भी घटनास्थल पर पहुंचे और निरीक्षण किया।
ऐसा बताया गया है कि पुल के ऊपर 35 फीट का एक हिस्सा नीचे गिरते ही 2 टुकड़े हो गये। संतुलन बिगड़ने की वजह यह हिस्सा अचानक स्वर्ण रेखा नाले में जा गिरा। घटना के वक्त जोरदार धमाका हुआ। जिसे इलाके के निवासियों ने भी सुना है। प्रत्यक्षदर्शी अरबिद कुशवाह के अनुसार हादसा 2.30 बजे हुआ है। घायल मजदूर का नाम लल्ला टूटू बताया है।

देखिए तस्वीरें…

सीमेंट का गर्डर सीधे नीचे की ओर गिरा है।
सीमेंट का गर्डर सीधे नीचे की ओर गिरा है।
गर्डर के गिरने के दौरान वहां मजदूर काम कर रहे थे।
गर्डर के गिरने के दौरान वहां मजदूर काम कर रहे थे।
आसपास चल रहा निर्माण कार्य।
आसपास चल रहा निर्माण कार्य।
प्रशासन का अमला भी मौके पर पहुंचा।
प्रशासन का अमला भी मौके पर पहुंचा।
ऊर्जा मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर मौके पर पहुंचे।
ऊर्जा मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर मौके पर पहुंचे।

एलिवेटेड रोड के केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया गया है। यह एलिवेटेड रोड 1300 करोड़ रूपये की लागत से तैयार हो रही है। अधिकारियों के अनुसार, जिस रास्ते पर यह घटना घटी। उसे काम चलने की वजह से पहले से ही रास्ता बन्द कर दिया गया था। यदि यह रास्ता खुला होता या मंगलवार होता तो लोग खेड़ापति मंदिर पर दर्शन करने के श्रद्धालु आते है तो यह हादसा बड़ा हो सकता था। इसलिये मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच कराई जायेगी। जो भी तथ्य सामने आयेंगे उसके आधार पर जिम्मेदारों लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा ने निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जहां यह हादसा हुआ है, वहां से लोग गुजरते रहते हैं और यह आम रास्ता है। भले ही रास्ता बंद था, लेकिन अगर रास्ता चालू होता तो यह हादसा और भी बड़ा हो सकता था। यह प्रशासनिक लापरवाही है।

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