दुष्कर्म की पीडिता को हाईकोर्ट के फैसले से मिली राहत, 10 हफ्ते का गर्भ मेडीकल बोर्ड की निगरानी में समाप्त कराया
ग्वालियर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच की एकल पीठ ने दुष्कर्म पीडि़त के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए उसके गर्भपात (मेडीकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार शुक्रवार 17 अप्रैल की सुबह 10 बजे जीआर मेडीकल कॉलेज में यह प्रक्रिया कराई जायेगी। पीडि़ता की तरफ से दायर याचिका में बताया गया है कि 11 जनवरी को आरोपियों द्वारा उसे घर से ले जाकर दुष्कर्म किया गया। जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती होगयी। वर्तमान में युवती की आयु 18 वर्ष 5 महिना बताई गयी है। परिवार ने अदालत को जानकारी दी है कि वह आर्थक रूप् से बच्चे का पालन पोषण करने में सक्षम नहीं है। गर्भ की वजह से युवती को लगातार शारीरिक पीड़ा, मानसिक आघात और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से मांगी थी रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने कमलाराजा अस्पताल एवं जीआर मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी। मेडिकल जांच के बाद बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पीड़िता का गर्भ 10 सप्ताह 3 दिन का है और सभी आवश्यक मेडिकल पैरामीटर सामान्य हैं।
मेडिकल बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों की निगरानी और आवश्यक सुविधाओं के साथ गर्भपात सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पीड़िता को राहत देते हुए गर्भपात की अनुमति दी, जिससे उसे शारीरिक और मानसिक कष्ट से राहत मिल सके।

