कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं के लिये सबसे कठिन है यात्रा, नेपाल बाढ़ से क्या पड़ा प्रभाव?
नई दिल्ली. नेपाल के रसुवा जिले के भीषण फ्लैश फ्लड ने काफी तबाही मचाई है। जिसमें 133 भारतीय सहित 400 यात्रियों के गायब होने की खबर है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिये जा रहे लगभग 400 तीर्थयात्री रसुवागड़ी में अचानक आई बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर हो गये है। इसका असर नेपाल और चीन के बीच आने-वाले वाले प्रमुख रसुवागढ़ी-केरंग कॉरिडोर पर भी पड़ा है। जहां से लोग कैलाश मानसरोबर तक जाते है। ऐसे में समझते है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर इसका कितना असर पड़ा है और यात्री कितने प्रभावित हुए है।
आपको बता दें कि बुधवार को 390 तीर्थ यात्रियों की सीमा पार करने का कार्यक्रम था। जिसमें 93 नेपाली और अलग- अलग देशों के लोग शामिल है। यह तीर्थ यात्रिी विभिन्न ट्रैवल एजेंसियों के ग्राहक है। सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स के 71 ग्रहक है। लीफ हॉलिडेज के 55, काठमांडू हॉलिडेज के 17, कैलाश र्जी के 31, एक्सप्लोर वेकेशन के 7, ट्रेकर्स सोसायटी के 92, रिचा टूर्स के 12 फिशटेल टूर एंड ट्रेवल्स के 27, हिमालयन ग्लेशियर के 62 और एल्पाइन इको ट्रेक के 16 ग्राहक है।
क्यों खतरनाक है कैलाश यात्रा
समुद्र तल से करीब 14,000 से 19,500 फीट तक की ऊंचाई होने की वजह से और कठिन रास्तों, मौसम की विपरीत परिस्थितियों की वजह से इसे सबसे खतरनाक माना जाता है. इतनी ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम हो जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द, और चक्कर आने जैसी समस्याएं (ऑल्टीट्यूड सिकनेस) होने लगती है। इसके अलावा कैलाश पर्वत की बाहरी परिक्रमा लगभग 52 किलोमीटर लंबी होती है, जिसे पैदल पूरा करने में 3 दिन लगते है। साथा ही रास्ता पथरीला, ऊबड़-खाबड़ और ढलान वाला होता है, जिससे जोड़ों और पैरों पर भारी दबाव पड़ता है।
इसके बीच में एक डोलमा ला पास आता है, जिसकी खतरनाक चढ़ाई पार करना सबसे कठिन हिस्सा है। यहां बिल्कुल सीधी और बर्फीली चढ़ाई होती है, जहां ठंड अत्यधिक होती है और शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म होती है। इसके अलावा यहां का मौसम पल-पल बदलता है. तेज ठंडी हवाएं, बर्फबारी और अचानक तापमान का शून्य से नीचे चले जाना यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर देता है।
बता दें कि नेपाल बाढ़ में अभी तक 22 लोगों की मौत (समय- 17.30 बजे) हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के पीएम बालेन शाह से फोन पर बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई जनहानि पर दुख जताया है। PM मोदी ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता और राहत मदद देने का भरोसा भी दिया है। नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ से मची तबाही के बाद भारत प्रभावित लोगों के लिए जल्द राहत सामग्री भेजने की तैयारी कर रहा है।

