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परमाणु प्लांट तक पहुंची इजरायल की बमबारी, बढ़ा रेडिएशन का खतरा

नई दिल्ली. 21 मार्च 2026 को ईरान के खूजिस्तान प्रांत में देजफुल शहर के पास वाहदाती एयरबेस (4) पर जबरदस्त बमबारी हुई है। अमेरिका और इजरायल प्रेसीजन मिसाइलों ने बेस के गोला बारूद के बंकरों को निशाना बनाया है। हमले के बाद बंकरों में स्टोर किये गये हथियार स्वयं फटने लगे। सेकेंडरी एक्सप्लोजन की चेन रिएक्शन शुरू हो गयी है। आसमान में मशरूम क्लाउड उठा और आग की लपहेंट कई किमी दूर से दिखाई दी। स्थानीय लोगों ने मोबाइल व वीडियों बनाया है। जिससे धमाकों की आवाज, पक्षियों की चहचहाहट औरे लगातार रंबलिंग शॉकबेव सुनाई दे रही थी। यह बेस 1980 से ईरान के पुरान एफ-5 टाइगर ।। फायटर जेट्स का घर था।
डिमोना पर हमला अब इजरायल परमाणु प्लांट निशाने पर
इजरायल के डिमोना न्यूक्लीयर रिसर्च सेंटर पर भी हमला हुआ है। यह इजरायल का मुख्य परमाणु रिएक्टर है। जहां परमाणु हथियार से जुडी रिसर्च होती है। ईरान की ओर से मिसाइल या ड्रोन हमला बताया जा रहा है। हमले से रेडिएशन लीक होने का खतरा है। डिमोना पहले भी ईरान के टारगेट पर रहा है। लेकिन इस बार भी यह सीधे हिट हुआ। इजरायल ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया । स्थानीय रिपोर्ट्स में धुएं और आग की खबरें आ रही है।
न्यूक्लियर कितना है खबरनाक
परमाणु प्लांट्स पर बमबारी से रेडियेशन लीका का बहुत ही बड़ा खबरा पैदा हो गया हे। डिमोना और ईरान के प्लांट्स में यूरेनियम और प्लूटोनियम स्टॉक है। अगर रेडिएशन फैला तो आसपास के इलाकों में लोग बीमार हो सकते है। मिट्टी और पानी प्रदूषित हो सकता है। लेकिन अभी तक कोई न्यूक्लियर बम या न्यूक्लियर वेपन का उपयोग नहीं हुआ है।
ईरान के परमाणु सुविधाओं पर हर हमला
ईरान जंग के 22 दिन में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर सेंटर्स पर कई हमले किए…
नतांज – यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट. मार्च 2026 में पांचवीं बार हमला हुआ. सेंट्रीफ्यूज मशीनें तबाह. एंट्रेंस ब्लॉक हो गया है।
फोर्डो – पहाड़ के नीचे अंडरग्राउंड प्लांट. हाई-लेवल यूरेनियम एनरिचमेंट होता था. बंकर बस्टर बम से हमला, लेकिन कुछ हिस्से बच गए है।
इस्फहान – यूरेनियम कन्वर्जन और फ्यूल फैब्रिकेशन सेंटर. 40 साल पुराना. हमलों से मेटल प्रोडक्शन यूनिट नष्ट.
पारचिन – मिलिट्री कॉम्प्लेक्स, टेलघान-2 साइट पर न्यूक्लियर हथियार टेस्टिंग. क्लस्टर मुनिशन से हमला, एक्सप्लोसिव टेस्टिंग लैब्स तबाह.
मिन्जादेही – तेहरान के पास अंडरग्राउंड साइट. न्यूक्लियर वेपन कंपोनेंट डेवलपमेंट पूरी तरह नष्ट. ये सभी साइट्स पर बंकर बस्टर और प्रेसीजन मिसाइलों से हमले हुए. कई टॉप न्यूक्लियर वैज्ञानिक भी मारे गए.
महायुद्ध की तस्वीर क्यों डरावनी लग रही है
देजफुल और डिमोना के हमले से युद्ध की भयावह तस्वीर साफ हो गई है. पहले सिर्फ मिलिट्री बेस टारगेट थे, अब तेल हार्टलैंड और परमाणु साइट्स निशाने पर हैं. ईरान का खूजिस्तान तेल प्रांत है जहां से 90% तेल निकलता है. हमले के बाद एम्यूनिशन डिपो खुद फटने लगा है।
इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर ने अंडरग्राउंड बंकर से कहा स्ट्राइक्स सिग्निफिकेंटली बढ़ाए जाएंगे. 48 घंटे का अल्टीमेटम चल रहा है. नतांज पर पांचवां हमला हो चुका है।  ये सब देखकर दुनिया डर गई है कि कहीं पारंपरिक युद्ध न्यूक्लियर वॉर तक न पहुंच जाए ।

 

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