शनि जयन्ती- दुनिया का इकलौता है शनि पर्वत, शनि सिंगणापुर की शिला यही से गयी थी, शनिदेव ने कठिन तप से पुनः शक्ति हासिल की थी

ग्वालियर, रेलवे स्टेशन ग्वालियर से 27 किमी की दूरी पर स्थित गांव ऐंती, यहां का शनि मंदिर देशभर के भक्तों की श्रद्धा का केन्द्र है। शनिश्चरी अमावस्या और शनि और शनि जयंती के मौके पर खासतौर पर देशभर के श्रद्धालु यहां पहुंचते है। मंगलवार को शनि जयन्ती पर 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आने की संभावना है।
मान्यताओं के अनुसार, जब हनुमान जी लंकादहन कर रहे थे। तब उनके प्रयास विफल हो रहे थे तो पता चला कि शनिदेव रावण की कैद में सिंहासन के नीचे दबे हैं। इसके बाद हनुमान जी उन्हें मुक्त कराया। लेकिन दुर्बल होने की वजह से शनि देव तेजी से नहीं चल सके। तब उनके आग्रह पर हनुमान जी ने उन्हें लंका से फेंका और मुरैना के वह ग्राम ऐंती के इसी पर्वत पर आकर गिरे।
ऐंती में विश्व का इकलौता शनिपर्वत
यहीं शनिदेव ने तपस्या कर पुनः शक्ति प्राप्त की और इसी वजह से इसे विश्व के इकलौते शनि पर्वत के नाम से जाना जाता है। तुलसी मानस प्रतिष्ठान मप्र भोपाल की पत्रिका के जनवरी-फरवरी 2011 के अंक में पृष्ठ 60 पर इस प्रसंग का उल्लेख भी लिया गया था। इतिहासकारों के अनुसार ऐंती में सम्राट विक्रमादित्य ने शनि प्रतिमा की स्थापना कराई गयी थी। वहीं संवत् 1806 में महादजी सिंधिया के मामा दौलतराव सिंधिया ने इसका जीर्णोद्वार करवाया था। अब इसे शनिलोक के रूप में विकसित करने की तैयारी भी चल रही है।
120 करोड़ रूपये से तैयार होगा शनिलोक प्रोजेक्ट
पर्यटन विभाग ने केन्द्र की प्रसाद योजना में इसको शामिल करने के लिये 120 करोड़ रूपये का प्रस्ताव भेजा गया है। यहां शनि लोक का निर्माण करना प्रस्तावित है। शनि परिक्रमा मार्ग का निर्माण किया जायेगा। जिसमें सप्तऋषियों की मूर्तियां स्थापित की जायेगी। पुजारी बृजभूषण ने बताया कि पूणे के एक सेठ भक्ति में यही बस गये। लौटे तो एक शिला साथ ले गये। उन्हें लगा, अगली पीढ़ी सेवा नहीं करेगी तो शिला नदी में बहा दी और बाद में शनिदेव ने सिंगणापुर के लोगों को स्वप्न दिया तो शिला निकलवाकर स्थापित करायी गयी। ऐसी मान्यता है कि यहां स्थापित शनिदेव की प्रतिमा आकाश से गिरे उल्कापिंड से बनी है। इसका रंग गहरा काला व चुम्बकीय है। मूर्ति के पास जाने पर विद्युत जैसी ऊर्जा लोग महसूस करते है। यह मंदिर तंत्र साधना के लिये भी प्रसिद्ध है।
ग्वालियर से ऐसे पहुंचते हैं शनि मंदिर
हवाई मार्ग से-ग्वालियर एयरपोर्ट ऐंती मंदिर 15 किमी दूर है। यहां से टैक्सी या निजी वाहन द्वारा जा सकते हैं।
सड़क -रेल मार्ग से- ग्वालियर शहर व रेलवे स्टेशन से करीब 27 किमी दूर है। टैक्सी या निजी वाहन से जा सकते हैं।

