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मप्र में फिर छा सकता है अंधेरा, 3 दिन का ही कोयला बचा है

भोपाल. मध्यप्रदेश के थर्मल प्लांट सहित पूरा बिजली उत्पादन 40 फीसदी तक आ गया है, बाकी 60 फीसदी बिजली सेंट्रल सेक्टर से लेनी पड़ रही है। उसकी भी एक लिमिट है उससे ज्यादा बिजली ले नहीं सकते, अगर ली तो कंपनियों पर जुर्माना लगेगा और इसकी भरपाई बिजली महंगी करके होगी। यह भार भी कस्टमर पर ही पड़ेगा, यानी एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई वाला मामला है।

दो वजहों से पनपा कोयला संकट
कोयले की कमी की वजह से दिल्ली और पंजाब सहित कई राज्यों में बिजली संकट गहरा गया है। देश के कई इलाकों में इस साल देर तक हुई वर्षा की वजह से भी कोयला सप्लाई में रूकावट आई है। इन 2 वजहों से बिजली उत्पादन क्षेत्र दोहरे दबाव में हैं। इसके चलते कोयला आधारित बिजली सयंत्र अपनी क्षमता के आधे से भी कम बिजली का उत्पादन कर रहे हैं।

कोयला की कमी से बिजली उत्पादन हुआ प्रभावित
देश में इस वर्ष कोयला का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ हैं। हालांकि देर तक सक्रिय रहे मानसून की कारण कोयला खदानों से पॉवर प्लाुंट्स तक कोयले की सप्लाई काफी प्रभावित रहीं । जिससे गुजरात, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, झारखंड, बिहार, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में बिजली उत्पादन पर गहरा असर पड़ा है।

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