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फुलरीन,कार्बन नैनोट्यूब और ग्राफीन जैसे कार्बन नैनोमटेरियल्स की खोज ने नैनोमैटेरियल्स के शोध  पर जबरदस्त प्रभाव डाला है:-डॉ.मयंक द्विवेदी

ग्वालियर। फुलरीन,कार्बन नैनोट्यूब और ग्राफीन जैसे कार्बन नैनोमटेरियल्स की खोज ने नैनोमैटेरियल्स के शोध और उनके नैनोटेक्नोलॉजिकल अनुप्रयोगों पर जबरदस्त प्रभाव डाला है।कार्बन नैनोट्यूब (एकल दीवार वाले नैनोट्यूब) और बहु- दीवार वाले नैनोट्यूब)ग्राफीन शीट होता है जो नैनोट्यूब सिलेंडर बनाता है।सामान्य तौर पर इन सभी कार्बन नैनोमटेरियल्स में उनकी असामान्य संरचनात्मक समरूपता और संयुग्मित विशेषताएं होती हैं।उनके पास विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक और चुंबकीय गुण, ऑप्टिकल गैर- रैखिकता जैसे आकर्षक गुणों की एक विविध श्रेणी है।इन कार्बन नैनोमटेरियल्स ने अपने विभिन्न उपन्यास अनुप्रयोगों के लिए बहुत अधिक ध्यान आकर्षित किया है।ग्राफीन अपने एक्सफ़ोलीएटेड रूप में पॉलिमर के साथ मजबूत इंटरफेशियल इंटरैक्शन होने से फैलाव को स्थिर करता है और एग्लोमरेशन को रोकता है जिसके परिणामस्वरूप अच्छी तरह से फैला हुआ और समान नैनोकम्पोजिट होता है।पॉलिमर में एक्सफ़ोलीएटेड ग्राफीन की शुरूआत पॉलिमर और थर्मोप्लास्टिक इलास्टोमेर के गुणों में सुधार करने का एक सफल तरीका साबित हुई है, क्योंकि फिलर्स अपनी स्वयं की उच्च कठोरता को शामिल कर सकते हैं।यह बात कानपुर डीएमएसआरडीई के निदेशक डॉ.मयंक द्विवेदी ने जेयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय कांफ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि कही।
अध्यक्षता जेयू के प्रभारी कुलपति प्रो.डीएन गोस्वामी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में आईयूएसी न्यू दिल्ली के निदेशक प्रो.एसी पाण्डेय एवं आईआईटी न्यू दिल्ली के प्रो. भुवनेश गुप्ता उपस्थित रहे।सभी अतिथियों के सामूहिक द्वीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।तत्पश्चात छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना का गायन किया गया। इसके बाद प्रो.राधा तोमर ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो.एसी पाण्डेय ने कहा कि नैनो- संरचना सामग्री विज्ञान समूह में अनुसंधान का एक सक्रिय क्षेत्र है। ऊर्जावान आयन नैनोस्ट्रक्चर के संश्लेषण और इंजीनियरिंग के साथ- साथ नैनोमैटिरियल्स के विकास में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।प्रो.भुवनेश गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा विज्ञान में पॉलिमर बायोमटेरियल्स तेजी से बढ़ रहा हैं। बायोसिस्टम के लिए बेहतर स्वीकार्यता और कार्यक्षमता के साथ बायोमटेरियल की बढ़ती मांग के साथ नए सामग्रियों के विकास पर जोर दिया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जेयू के प्रभारी कुलपति प्रो.डीएन गोस्वामी ने कहा कि वर्तमान कार्य का नवाचार नैनो स्तर पर पॉलिमर की सतह को इस तरह से पुनर्निर्माण करना है कि यह अपने गुणों को बदले बिना रोगाणुरोधी प्रकृति प्राप्त कर लेता है। नैनोकन्स्ट्रक्शन को अंजाम दिया जा सकता है ताकि सामग्री की सतह के रसायन को चुनिंदा रूप से बदल दिया जाए।कार्यक्रम में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।तत्पश्चात स्मारिका सह सार का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया।जिसमें 30 शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन प्रो.राधा तोमर ने किया। डॉ.मेनका शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।इस अवसर पर प्रो.जेएन गौतम, प्रो.आईके पात्रो, प्रो.एसके द्विवेदी, प्रो.नलिनी श्रीवास्तव, प्रो. एसएन महापात्रा, डॉ.एसके श्रीवास्तव, डॉ.शांतिदेव सिसौदिया, डॉ.उमा पाठक सहित ख्यातिप्राप्त विद्वान व शोधार्थी उपस्थित रहे।

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