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धूमेश्वर महादेव मंदिर की अनदेखी की वजह से दीवारों से झड़ रहा चूना, जर्जर हो रही दीवारें

ग्वालियर. भितरवार स्थित सिंध नदी के किनारे स्थित प्राचीन धूमेश्वर महादेव मंदिर की दीवारों और छतरी से चूना और पत्थर झड़ने लगा है। मंदिर की हालत खराब होती जा रही है । मंदिर के महंत अनि द्धधवन महाराज और ग्राम पंचायत के सरपंच ने इसकी मरम्मत के लिये पुरातत्व विभाग को 3 बार पत्र लिख चुके है। इसके बावजूद अभी तक कोई कार्यवाहीं नही हुई है। यह मंदिर ओरछा नरेश वीरसिंह जूदेव ने 1605 में बनवाया था। वर्ष 1936-37 मेें ग्वालियर के जीवाजीराव सिंधिया के शासनकाल में इसका जीर्णोद्वार कराया गया था।
मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिय आते है। महाशिवरात्रि और श्रावणमास में लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते है। इस मंदिर की छतरी और बाहरी दीवारों जर्जर हो चुकी है। छतरी से चूना टपक रहा है। दीवारों का चूना हटने के ईंटें दिखाई देने लगी है। वर्षा के पानी रिसने से गर्भगृह की स्थिति खराब हो रही है। मंदिर का गर्भगृह पुरातत्व विभाग के अधीन है। वर्षो से मंदिर की अनदेखी हो रही है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि मंदिर में स्थित शिवलिंग सिंध नदी के गर्भ से स्वयं प्रकट हुआ था। मंदिर का नाम ‘धूमेश्वर’ इसलिए पड़ा क्योंकि सिंध नदी का जल चट्टानों से टकराकर झरने के रूप में गिरता है, जिससे जलकणों की धुंध (धूम) उत्पन्न होती है, जो शिवलिंग का प्राकृतिक अभिषेक करती प्रतीत होती है। ​
स्थापत्य और पुनर्निर्माण
मंदिर की स्थापत्य कला में प्राचीन भारतीय वास्तुकला की झलक मिलती है। इसका पुनर्निर्माण विभिन्न कालखंडों में हुआ है:​
13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के आक्रमण में मंदिर को क्षति पहुंची।​
17वीं शताब्दी में ओरछा नरेश वीर सिंह देव ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।​
18वीं शताब्दी में मराठा सेनापति महादजी सिंधिया के नेतृत्व में मंदिर का पुनरुद्धार हुआ।​
19वीं शताब्दी में ग्वालियर के महाराज जयाजीराव सिंधिया ने मंदिर को भव्य स्वरूप प्रदान किया। ​
धार्मिक महत्व और आयोजन
धूमेश्वर महादेव मंदिर में वर्ष भर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, विशेषकर श्रावण मास, सोमवती अमावस्या और महाशिवरात्रि के अवसर पर। मंदिर में विभिन्न धार्मिक आयोजनों का आयोजन होता है, जैसे:​
सवा पांच लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण और अभिषेक।​
भव्य चुनरी यात्रा, जो धूमेश्वर धाम से माता लखेश्वरी मंदिर तक आयोजित होती है।​
विश्वशांति और मानव कल्याण के लिए गोवर्धन धाम तक पदयात्रा।​
मंदिर के वर्तमान महंत एवं महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 अनिरुद्ध वन जी महाराज हैं, जो धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। ​
दर्शन और संपर्क
धूमेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर से लगभग 70 किमी दूर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए डबरा या भितरवार से सड़क मार्ग का उपयोग किया जा सकता है।​

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