ट्रेन से कंबल, तकिया या तोलिया चुराने की सजा 5 साल की जेल
नई दिल्ली. भारतीय रेल दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। जिसमें प्रतिदिन लाखों लोग यात्रा सकतरे है। इसे संभालने के लिये 12 लाख कर्मचारी काम करते हैं। जो किसी भी देश के रेलवे सिस्टम में सबसे अधिक है। यह लगभग -लगभग देश के कोने-कोने को एक -दूसरे से जोड़ता है। इसलिये इसे देश की लाइफ लाइन भी कहा जाता है।
हम सभी आवश्यक और शौक के अनुसार इस रेल में गाहे-बगाहे यात्रा करते हैं। सफर के दौरान रेलवे की ओर से मिलने वाली सुविधाओं का भी लाभ उठाते हैं। इनमें से कुछ सुविधाओं का चार्ज सीधे तौर पर तो कुछ के लिये इन डायरेक्टली देना होता है। ऐसी ही एक सुविधा है। ट्रेन में एसी क्लासेस (थर्ड एसी, सेकण्ड एसी और फर्स्ट एसी) के कोचेस में मिलने वाले बेड रोल की, जिसमें शामिल होते हैं-कम्बल, चादर, ताकिया और टॉवेल।
कंबल, चादर, तकिया या टॉवेल को चुराने पर सजा
अगर कोई यात्री ट्रेन से रेलवे के कंबल, चादर, तकिया या टॉवेल ले जाते रंगे हाथों पकड़ा जाए तो उसे ₹1000 का जुर्माना देना होगा और अगर वह जुर्माने के तौर पर 1 हजार रुपये देने से इनकार करता है या असमर्थता जताता है तो 1 साल की जेल की हवा खाने का भी प्रावधान कानून में है। तो कभी भूल से भी ऐसा कभी न करें।
बता दें, भारतीय रेलवे में कंबल, चादर, तकिया वगैरह रेलवे की संपत्ति मानी जाती है. इसे चुराने पर रेलवे संपत्ति अधिनियम, 1966 के तहत कार्रवाई हो सकती है। पहली बार पकड़े जाने पर एक साल तक की जेल या 1000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। गंभीर मामलों में यानी एक से अधिक बार इस अपराध को दोहराने पर 5 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। रेलवे का नियम कहना है कि चोरी के सामान के साथ पकड़े जाने पर रेलवे पुलिस (GRP) या रेलवे सुरक्षा बल (RPF) यात्री के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा के दौरान मिलने वाले सामान को अपनी सीट पर ही छोड़ दें या अटेंडेंट को वापस कर दें।
