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जीवनसाथी चुनने के लिए दिव्यांगजनों ने उत्साहपूर्वक दिया अपना परिचय

ग्वालियर – दिव्यांगजन भी जीवनसाथी चुनकर अपना घर बसा सकें। इस दिशा में मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप ग्वालियर जिले में जिला प्रशासन द्वारा विशेष पहल की गई है। इस पहल के तहत शुक्रवार को शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षणशाला (आईटीआई) में “दिव्यांगजन परिचय सम्मेलन” का आयोजन किया गया। जिला पंचायत की अध्यक्ष दुर्गेश कुंवरसिंह जाटव के मुख्य आतिथ्य और कलेक्टर रुचिका चौहान व जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक कुमार की मौजूदगी में आयोजित हुए इस सम्मेलन में दिव्यांगजनों ने उत्साहपूर्वक अपना-अपना परिचय दिया और अपने व्यवसाय की जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया कि वे अपने जीवनसाथी में कौन-कौन सी खूबियों की अपेक्षा रखते हैं। सम्मेलन में लगभग एक सैकड़ा दिव्यांगजनों ने भाग लिया।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि इस परिचय सम्मेलन में जो जोड़ें तय होंगे उनका विवाह दीपावली के बाद शुभ मुहूर्त पर सामूहिक विवाह सम्मेलन के जरिए कराया जाएगा। साथ ही सरकार द्वारा संचालित दिव्यांगजन विवाह प्रोत्साहन योजना सहित शासन की अन्य योजनाओं का लाभ भी दिव्यांगजनों को दिलाया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर जन सहयोग से भी दिव्यांगजनों की गृहस्थी बसाने के लिए मदद दिलाई जाएगी।कार्यक्रम का संचालन एसबी ओझा ने किया।
दिव्यांग व्यवसायी व राष्ट्रीय स्तर के पैरा खिलाड़ी भी आए सम्मेलन में
दिव्यांगजन परिचय सम्मेलन में दिव्यांग प्रतिभागियों ने सामान्य परिचय देने के साथ अपने व्यवसाय को खासतौर पर रेखांकित किया। झांसी से आए शिवप्रताप सिंह राजपूत का कहना था कि हमारा टेंट का कारोबार है इससे हमें हर माह कम से कम 50 हजार की आमदनी होती है। इसी तरह किसी ने अपनी किराने की दुकान तो किसी ने अन्य व्यवसायिक गतिविधियों के बारे में बताया। राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल कौशल का लोहा मनवा रहे दिव्यांगजन भी सम्मेलन में शामिल हुए। राष्ट्रीय स्तर के पैरा तलवारबाज श्री दीपक शर्मा, वाटर स्पोर्टस के नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट श्री संजीव कोटिया व आर्म्स रेसलर श्री अरविन्द रजक ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया।
आपसी मेलजोल बढ़ाने के लिए खेल गतिविधियां भी हुईं
आईटीआई में शुक्रवार को आयोजित हुए दिव्यांगजन परियन सम्मेलन में दिव्यांगजनों के साथ आए परिजनों के बीच मेलजोल बढ़ाने के लिए खेल गतिविधियां भी आयोजित की गई। दिव्यांगजनों के परिजनों को समूहों में बांटकर यह प्रतियोगिता कराई गई। इस दौरान सभी ने एक-दूसरे से अनौपचारिक माहौल में बातचीत कर अपने दिव्यांग बेटे-बेटियों के विवाह की दिशा में कदम बढ़ाया।

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