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मुरार नदी को पुर्नजीवित करने के लिये जनता की भागीदार हो, हाईकोर्ट ने 11 सदस्यीय कमेटी की गठित

ग्वालियर. मुरार नदी (वैशाली) को पुर्नजीवित करने के लिये हाईकोर्ट ने अब सोशल ऑडिट के विचार को अमलीजामा पहनाया है। इसमें निगरानी की पूरी प्रक्रिया में जनता की भागीदानरी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। निगमायुक्त की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय कमेटी गठित की है।इसमें हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि नदी को बचाने की कवायद तब तक कामयाब नहीं हो सकती है, जब तक स्थानीय लोग और विशेषज्ञ सीधेतौर पर इसमें शामिल न हो। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीजन बैंच ने लगभग 12.5 किमी लम्बी इस नदी में 22 जगहों पर कचरा और गन्दा पानी गिरने की बात को गंभीरता से लिया है। यह भी दर्ज किया है कि एनजीटी के पूर्व निर्देशों के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
कमेटी इसलिए खास
हाईकोर्ट ने 11 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ रिटायर्ड जज, इंजीनियर और विधि विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह समिति केवल औपचारिक नहीं, बल्कि ‘सोशल ऑडिट’ के विचार को ग्राउंड लेवल पर लेकर जाएगी।
कमेटी में इन्हें किया शामिल
अध्यक्ष- निगमायुक्त, सदस्य – रिटा. प्रधान जिला जज अरुण प्रताप सिंह तोमर, एडीएम, एएसपी (आईपीएस), इं. गिर्राज गोयल (रिटा. निदेशक नमामि गंगे प्रोजेक्ट), पीके अष्ठाना (रिटा. एसडीओ पीडब्ल्यूडी), जंग बहादुर सिंह कुशवाह (रिटा. एसडीओ पीडब्ल्यूडी),हेमंत खरे (रिटा. इंजीनियर पीएचई), एडवोकेट संजय द्विवेदी, एडवोकेट योगेश चतुर्वेदी, अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी, शासकीय अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह कुशवाह, शासकीय अधिवक्ता सोहित मिश्रा

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