कृषि मेला संपन्न-कृषि मेला ज्ञान का कुंभ, जहां पर आधुनिक तकनीक की बहती गंगा में लगाएं डुबकी
ग्वालियर। कृषि मेला ज्ञान का कुंभ है। जिस तरह से लोग प्रयागराज कुंभ स्नान करने के लिए जा रहे हैं। ठीक वैसे ही राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय प्रांगण में चल रहे चार दिवासीय मेला में भी भाग लें। क्योंकि यह मेला ज्ञान का कुंभ है जिसमें आधुनिक तकनीक की गंगा बह रही है। जिसमें डुबकी लगाकर किसान भाई अपनी समृद्धि का रास्ता तय करें। यह बात अखिल भारतीय कृषि औद्योगिक प्रदर्शनी एवं किसान मेला-2025 के समापन अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलपति प्रो. राजकुमार आचार्य ने कही।
श्री आचार्य ने कहा कि मेले की सार्थकता को साधुवाद देते हुए कहा कि हम बदलते भारत की तस्वीर का हिस्सा बने है। ठीक उसी तरह से जिस तरह से जब राम सेतु बन रहा था उस समय एक गिलहरी ने भी अपना योगदान दिया था। ठीक उसी प्रकार आज छोटे से छोटा किसान आज देश की प्रगति और उन्नति में भाग दे रहा है। यही कारण है कि आज हमारा देश विश्व में अपना एक अलग मुकाम हासिल कर रहा है और तेजी से हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और देश विकसित हो रहा है।
इस मौके पर झाबुआ से आए आदिवासी कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि एवं समस्त विशिष्ट अतिथियों ने विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया। जिसमें वैदिक गांव और आधुनिक तकनीक के संगम को देखा और विश्वविद्यालय के कुलपति डा अरविंद कुमार शुक्ला एवं उनकी टीम की प्रशंसा की। एरोपोनिक यूनिट, हाइड्रोपोनिक यूनिट, हाईटेक नर्सरी, ट्री-हाउस आदि को देखा और सराहना की।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के निदेशक अनुसंधान सेवायें डॉ. एस.के. चतुर्वेदी ने कहा कि यह कृषि मेला एक कृषि कुंभ है जो किसान वरदान साबित होगा। क्योंकि यहां पर आधुनिक तकनीक, कृषि उपकरण, उन्नत बीज, खाद आदि की जानकारी उपलब्ध या यूं कहें कि इनके ज्ञान की गंगा बह रही है। इसलिए मैं यहां पर यही कहूंगा कि आप लोग भी इस ज्ञान की गंगा में स्नान करने आये है वे इस ज्ञानार्जन में खेती की उन्नत तकनीकों को अवश्य सीखें। तभी निश्चित रूप से आपके कृषि कार्य में पूर्ण उन्नति होगी।
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