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हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता : स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग” प्रभावी ढंग से मूर्तरूप दें 

सुरक्षित भवनों में कक्षाएँ लगाने एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की भी हुई समीक्षा
ग्वालियर – “हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता : स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग” अभियान 3 चरणों में आयोजित होगा। यह अभियान सामूहिक उत्सव और नागरिक एकता की भावना पर आधारित है, जिसमें स्वतंत्रता के सार को स्वच्छता और सुजलता के संकल्प के साथ जोड़ा गया है। सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के तहत विभागवार कार्यक्रम बनाकर इस अभियान को सुव्यवस्थित व प्रभावी ढंग से मूर्तरूप दें। यह बात जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक कुमार ने अंतरविभागीय समन्वय बैठक में कही।
बैठक में “हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता : स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग” अभियान, एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत वृक्षारोपण, असुरक्षित स्कूलों को अन्य भवनों में संचालित करने, पीएम शहरी आवास योजना 2.0, समाधान ऑनलाइन में चर्चित विषय, सीएम हैल्पलाइन,  दस्तक अभियान सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं खाद का वितरण एवं आगामी दिनों के लिये आवश्यकता सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई।
“हर घर तिरंगा, यह गतिविधियाँ होंगीं 
“हर घर तिरंगा, हर घर स्वच्छता : तिरंगा से प्रेरित कला, तिरंगा प्रदर्शनी का प्रदर्शन, तिरंगा रंगोली, तिरंगा राखी निर्माण, तिरंगा बुनाई, तिरंगा पर प्रश्नोत्तरी, तिरंगे के लिए स्वयं सेवा, तिरंगा सजावट और प्रकाश व्यवस्था तथा सैन्य बलों के जवानों और पुलिसकर्मियों को पत्र लेखन आदि गतिविधियां संचालित होगी। द्वितीय चरण में 9 से 12 अगस्त तक लोगों को साथ लाने, व्यापक प्रचार-प्रसार, ध्वजों की उपलब्धता तथा सार्वजनिक स्थलों पर तिरंगे की दृश्यता के लिये कार्य किये जायेंगे। तृतीय चरण में 13 से 15 अगस्त तक घर, कार्यालयों तथा वाहनों पर तिरंगा लगाने, सेल्फ़ी अपलोड, सर्वत्र तिरंगे की दृश्यता तथा संस्कृति मंत्रालय के साथ सूचनाओं का सतत आदान-प्रदान किया जायेगा। हर जगह तिरंगा दृश्यता, तिरंगा के साथ रिकॉर्ड इत्यादि महत्वपूर्ण कार्यक्रम किये जायेंगे।
असुरक्षित भवनों वाले स्कूलों को अन्य सरकारी भवनों में शिफ्ट कराएँ  
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक कुमार ने बैठक में निर्देश दिए कि सर्वे के माध्यम से चिन्हित असुरक्षित स्कूल भवनों में कक्षाएँ न लगाई जाएं। उन्होंने असुरक्षित स्कूल भवनों का संयुक्त निरीक्षण कर अन्य सरकारी भवनों में शिफ्ट कराने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि नजदीक में सरकारी भवन उपलब्ध न होने पर निजी भवनों में स्कूल संचालित कराए जाएं। खुले में अथवा पेड़ के नीचे स्कूल कदापि संचालित नहीं हों।

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