सिंधिया समर्थक मंत्री-विधायकों की सीटों पर टिकट की टक्कर, पुराने नेता बोले हां मैं दावेदार
ग्वालियर. भाजपा में सामान्य तौर पर कोई भी खुद को सार्वजनिक तौर पर टिकट का दावेदार नहीं कहता है, लेकिन 8 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में ये परंपरा टूटने वाली है। खासकर उन 19 सीटों पर जहां सिंधिया समर्थक विधायक भाजपा में आए थे। इनमें से विधानसभा उपचुनाव में 13 जीते थे, 6 को हार का सामना करना पड़ा था। सामने आया कि अधिकतर जगह टिकट के लिए अभी से खींचतान शुरू हो गई है। अधिकतर जगह नई भाजपा V/s पुरानी भाजपा की स्थिति बनी हुई है। सिंधिया समर्थकों की वजह से राजनीतिक वजूद के लिए संघर्ष कर रहे पुराने भाजपा नेता खुलकर कह रहे हैं- हां मैं टिकट का दावेदार हूं। टिकट मांगना लीगल राइट है। सिंधिया समर्थक मौजूदा विधायक-मंत्री कह रहे हैं हमने तो तैयारी शुरू कर दी है। वहीं हारे हुए छह विधायक भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
सिंधिया के साथ आए 19 विधायकों में से 13 जीते थे और 6 हार गए थे उपचुनाव
ये जीते- 1. महेंद्र सिंह सिसोदिया 2. प्रद्युम्न सिंह तोमर 3. डॉ. प्रभुराम चौधरी 4. गोविंद सिंह राजपूत 5. तुलसी सिलावट 6. सुरेश धाकड़ 7. ओपीएस भदौरिया 8. राजवर्धन सिंह दत्तीगांव 9. कमलेश जाटव 10. हरदीप सिंह डंग 11. रक्षा संतराम सिरौनिया 12. जजपाल सिंह जज्जी 13. बृजेंद्र सिंह यादव
ये हारे- 1. इमरती देवी 2. जसवंत जाटव 3. गिर्राज दंडोतिया 4. मुन्नालाल गोयल 5. रघुराज सिंह कंसाना 6. रणवीर जाटव
प्रद्युमन बोले सिंधियाजी और पार्टी तय करेगी टिकट, पवैया ने कहा मैं भी सक्रिय हूं
2008 में पहली बार विधायक बने। 2018 में कांग्रेस सरकार में मंत्री बने। सिंधिया के कट्टर समर्थकों में हैं। सार्वजनिक स्थानों पर भी सिंधिया के पैर छूने से नहीं झिझकते। तब बीजेपी के जयभान सिंह पवैया को 21,044 वोटों से हराया था। उपचुनाव में कांग्रेस के सुनील शर्मा को 33,123 से हराया था।
ये भी टिकट के दावेदार- पूर्व विधायक जयभान सिंह पवैया इस बार भी टिकट के दावेदार हैं। पवैया के मुताबिक वो क्षेत्र में सक्रिय हैं। वो कहते हैं कि पार्टी मेरे हित में जो भी फैसला लेगी स्वीकार होगा।

