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संसद का मानसून सत्र आज से, पेश होंगे 17 अहम बिल

नई दिल्ली. मोदी सरकार को घेरने की अपनी रणनीति के तहत कई विपक्षी दल किसानों के मुद्दे को लेकर सोमवार को संसद के दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे है। सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद विपक्षी दलों ने संसद में रणनीति पर चर्चा के लिए अलग से बैठकें की। विपक्षी दल की बैठक के बाद आरएसपी नेता एन.के. प्रेमचन्द्रन ने बताया कि विभिन्न विपक्षी पार्टियां किसानों के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव लाएंगी। विपक्षी दलों की बैठक में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी राकांपा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी माकपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भाजपा, आईयूएमएल, आरएसपी, शिवसेना और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने हिस्सा लिया। आपको बता दें कि किसान यूनियन पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर केन्द्र के 3 कृषि कानूनों के विरोध में और अपनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे है।
सरकार विभिन्न मुद्दों पर उपयोगी चर्चा करने के पक्ष में- पीएम मोदी
संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक में 33 पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि नियम के अनुसार हर मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार पीएम मोदी ने रविवार को सर्वदलीय बैठक में कहा कि सरकार संसद में विभिन्न मुद्दों पर उपयोगी चर्चा करने के पक्ष में है बाद में जारी आधिकारिक बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ने सदन में विभिन्न दलों के नेताओं से कहा कि देश की स्वस्थ लोकतंत्र की परंपरा, लोगों से जुड़े मुद्दों को सौहार्दपूर्ण तरीके से उठाया जाना चाहिए और सरकार को इन चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देने का विकल्प देना चाहिए।
पेश हो सकते है 17 अहम विधेयक
सरकार ने इस सत्र के दौरान 17 नए विधेयकों को पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया है इनमें से 3 विधेयक हाल में जारी अध्यादेशों के स्थान पर लाए जाएंगे। इनमें से एक अध्यादेश 30 जून को जारी किया था जिसके जरिए रक्षा सेवाओं में शामिल किसी के विरोध प्रदर्शन या हड़ताल में शामिल होने पर रोक लगाई गई है। आवश्यक रक्षा सेवा अध्यादेश 2021 आयुध फैक्टरी बोर्ड के प्रमुख संघों द्वारा जुलाई के अंत में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी देने की पृष्ठभूमि में लाया गया है। संबंधित संघ ओएफबी के निगमीकरण के सरकार के फैसले का विरोध कर रहे है।

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