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रामजानकी मंदिर भूमि विवाद में आया न्यायालय का अहम फैसला, रजिस्ट्री अवैध घोषित, कॉलोनाइजर की 2 रजिस्ट्री अवैध

ग्वालियर. बहुचर्चित रामजान की भूमि विवाद में पंचम जिला न्यायधीश अशोक त्रिपाठी ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अदालत से जुड़ी सरकारी/माफी संपत्ति की फर्जी बिक्री को पूरी तरह से अवैध करार देते हुए वर्ष 2015 में हुई 2 रजिस्ट्रियों को शून्य घोषित कर दिया और साथ ही विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण, विक्रय या हस्तांतरण पर स्थाई निषेधाज्ञा जारी की है। अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता मिनी शर्मा ने बताया है कि कलेक्टर की तरफ से दायर वाद में यह स्पष्ट किया गया कि लश्कर के फालका बाजार इलाके के सर्वे नम्बर 733 की 5.40 हेक्टर भूमिक रामजानकी मंदिर की माफी संपत्ति है। यह भूमि दशकों से शासकीय अभिलेखों में मंदिर के नाम दर्ज है।
न्यायालय ने राजस्व अभिलेख, माफी रजिस्टर, मंदिर निरीक्षक रजिस्टर, गवाहों केबयान और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच की। अदालत ने पाया है कि मंदिर का अस्तित्व 1930 के पहले का है। भूमि सदैव माफी/मंदिर संपत्ति के रूप् मे ंदर्ज रही है। विक्रेताओं को इस संपत्ति को बेचने का कोई अधिकार नहीं था। इसलिये 21 अक्टूबर 2015 को निष्पादितों दोनों विक्रय पत्र कानूनन शून्य और निष्प्रभावी है।
इस मामले में पहले शासकीय अधिवक्ता द्वारा कॉलोनाइजर के साथ मध्यस्थता (मीडिएशन) की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस पर तत्कालीन तहसीलदार ने शिकायत दर्ज कराई थी। कलेक्टर ने भी अर्धशासकीय पत्र लिखा, जिसके बाद शासकीय अधिवक्ता बदल दिए गए। इसके उपरांत यह फाइल मिनी शर्मा को सौंपी गई, जिन्होंने पूरे मामले में प्रभावी पैरवी की।
वाद के अनुसार, मंदिर के तत्कालीन महंत के कथित उत्तराधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज और गलत नामांतरण के आधार पर इस भूमि को निजी संपत्ति बताकर एक कॉलोनाइजर को बेच दिया था। इसी बिक्री के आधार पर वर्ष 2015 में दो रजिस्ट्रियां की गई थीं।

 

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