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‘‘मेरा मिजाज खुशनुमा, मैं खुशगवार हूं, रखती हूं साथ, मै साहित्यकार हूं-ज्योति दिनकर

ग्वालियर. कवि सम्मेलन में अ्र्रर्तराष्ट्रीय स्तर के कवि वेदव्रत बाजपेयी लखनऊ, ग्वालियर की उभरती कवियंत्री ज्योति दिनकर, डॉ. रामकिशोर उपाध्याय, रविन्द्र रवि ने वीर रस और हास्य की कविताओं पर जमकर तालियां बजाई। कार्यक्रम की शुरूआत ग्वालियर की डॉ. कीर्ति काले सरस्वती वंदना के साथ की। कवि सम्मेलन को लेकर लोगों में खासा उत्साह भी देखने को मिला। हाथरस डॉ. विष्णु सक्सैना, उज्जैन दिनेश दिग्गज, इटावा गौरव चौहान,गोरखपुर श्वेता सिंह, प्रयागराज डॉ. विनम्र सेनसिंह , रीवा अमित शुक्ला आदि कवियों ने शिरकत की । इस बीच बड़ी संख्या में लोग कवितायें सुनने के लिये पहुंचे।

कवि सम्मेलन में प्रस्तुती देतीं कवियित्री।
कवि सम्मेलन आगे बढ़ोते हुए पहली प्रस्तुति ग्वालियर की कवियत्री ज्योति दिनकर ने रचना से की, इस बीच उन्होंने शहीद भगतसिंह को याद करते हुए काव्य पाठ प्रारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने ‘‘मेरा मिजाज खुशनुमा, मैं खुशगवार हूं, रखती हूं साथ, मै साहित्यकार हू। श्रृंगार का दर्पण समझ के ताकना नहीं, औरत के साथ, मैं खांडे की धार हूं। वीर रस से ओतप्रोत कविता सुनाई तो श्रोताओं ने जमकर तालिया बजाई।
कार्यक्रम में कवि रविन्द्र रवि ने राजा काम आयेगा न रानी काम आयेगी रगों में दौड़ते खूनं की रवानी काम आयेगी, जरूरत जब पड़ेगी देशहित बलिदान देने की हमारे देश की तब तब जवानी काम आयेगी।
इसके साथ ही कवियत्री श्वेता सिंह ने जिनके चेहरे बहुत भोले भाले मिले, उनके मन के सभी पृष्ठ काले मिले, विषवमन की हुई जांच जब, नेवले ही यहां सांप पाले मिले कविता सुनाई। कवि अमित शुक्ला ने गलती नहीं है बेटा इसमें तुम्हारी कोई, जान लो यह प्रभु हमें दुःख क्यों दिखाये है, चार-चार बेटियों की भ्रूण हत्या करने के, बाद हम तुम जैसे बेटे को जो पाये हैं। कविता सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया।
तो वहीं डाॅ. विष्णु सक्सेना ने जो हाथ थाम लो वो फिर न छूटने पाये, प्यार की दौलतें कोई न लूटने पाये, जब भी छूलो बुलंदियां तो ध्यान ये रखना, ज़मीं से पांव का रिश्ता न टूटने पाये कविता की प्रस्तुति दी। कवि सम्मेलन में इटावा से आए कवि गौरव चौहान ने ना ही किसी मज़हब न खुदाओ पे टिका है , ना तो ये सियासत की ख़ताओं पे टिका है, भारत के दुश्मनों में नहीं दम जो हिला दें ,
ये मुल्क शहीदों की चिताओं पे टिका है, कविता की प्रस्तुति दी।
इसके साथ कवि वेद व्रत वाजपेयी ने अभी तीरगे के रंगो का ठीक से उड़ना बाकी है। कटे फटे इस चित्र का पूरा जुड़ना बाकी है पंजा साहब ननकाना में शक्ति प्रदर्शन करना है। हमको भी तो हिंगलाज माता के दर्शन करना है। तिब्बत वाले बौद्ध मठों से आशीषों की आशा है। मानसरोवर का पावन जल पीने की जिज्ञासा है। कविता का पाठ कर लोगों को जोश से भर दिया।कवि सम्मेलन में आए लोगों ने कवियों का तालियां बजाकर जमकर स्वागत किया तो वही उनकी रचनाओं के लिए उनकी जमकर तारीफ भी की।

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