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गुमनामी में है गोले का मंदिर, 3 बीघा 14 बिस्वा जमीन पर है भूमाफियाओं का कब्जा

ग्वालियर. गोले का मंदिर का 400 वर्ष पूर्व निर्माण कराया था ग्वालियर के लोग गोला का मंदिर चौराहा तो जानते हैं लेकिन गोले का मंदिर कहां है यह कोई नहीं जानता है। इसका उदाहरण पिछले दिनों लाल टिपारा स्थित गोशाला में गोवर्धन की पूजा में शामिल होने आये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिला प्रशासन से पूछा कहा है। गोला का मंदिर तो लोग इधर-उधर बगले झांकने लगे है। लेकिन यह कोई नहीं बता पाया कि यहां है गोले का मंदिर। न्यूजमेल टूडे की टीम ने पड़ताल कर इस मंदिर ढूंढ निकाला है।

गुमनामी है गोले का मंदिर
जब इस मंदिर को ढूंढकर निकाला है मौके पर पहुंचकर देखा कि गोले का मंदिर चौराहा से महज 50 मीटर दूर है चारों तरफ अतिक्रमण से घिरा हुआ है। जबकि मंदिर की जमीन 3 बीघा 14 बिस्वा है जो अतिक्रमण की चपेट है। भूमाफियाओं ने मंदिर की जमीन पर कब्जा कर रखा है। वर्तमान में मंदिर के पास 1000 स्वक्वायर फीट की जमीन है। मंदिर में रामजानकी दरबार और हनुमान जी की मूर्ति विराजमान है। मंदिर के आसपास गाय और भैंस पाली जा रही है।
300 वर्षो से पूजा पाठ कर रहा है रामहंस का परिवार
आपको बता दें कि लगभग 1801 से रामहंस शर्मा का परिवार मंदिर की पूजा अर्चना कर रहा है। उसके बाद उनके सुपुत्र नकटूराम शर्मा ने 1885 से मंदिर पूजा अर्चना का दायित्व संभाला था लेकिन नक्टूराम शर्मा की संतान न होने पर उनके भाई किशोरीलाल शर्मा ने मंदिर पूजा अर्चना का संभाला। इसके बाद रामहेत शर्मा ने अपनी 78 वर्ष की आयु में निधन होने के बाद रामजानकी मंदिर में पूजा अर्चना की और अब वर्तमान में रामहेत शर्मा के सुपुत्र मनोज शर्मा मंदिर की पूजा अर्चना कर रहे है। अपने परिवार का संचालन करने के लिये स्कूल में पढ़ाते और इसके बाद सुन्दरकांड की मंडली का संचालन करते है।
अभी में छुट्टी पर हूं
मैं फोटो या स्थिति देखने के बाद ही कुछ कह पाऊंगी।
रूचिका चौहान, कलेक्टर ग्वालियर

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