हाईकोर्ट ग्वालियर की सख्ती का परिणाम 2 आईएएस को तलब करते ही 24 घंटे के अंदर हुआ भुगतान
ग्वालियर. सीनियर अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते हैं तो आप क्या धारणा बनायेंगे कि कोर्ट एक दंतविहीन टाइगर है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के 2 कर्मचारियों को बढ़े हुए वेतनमान का फायदा नही ंदेने के मामले में एमपी के 2 वरिष्ठ आईएएस ऑफीसर्स वीसी से हाईकोर्ट में पेश हुए चौंकाने वाली बात यह रही कि 6 जनवरी 2023 को हाईकोर्ट ने 3 महीने में याची शाहिद खान व उम्मेद सिंह को आदेश दिनांक से न्यूनतम वेतनमान का फायदा देने के लिये कहा था।
जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी, बुधवार को हाईकोर्ट ने जब सख्ती दिखाते हुए दोपहर 3 बजे तत्कालीन प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह (वर्तमान में मुख्य निर्वाचन अधिकारी) और वर्तमान प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई को तलब करने का आदेश दिया तो 24 घंटे में भुगतार 2.25 लाख-2.25 लाख हो गया है। याची कर्मचारियों की ओर से एडवोकेट देवेश शर्मा ने सटीक तरह से पक्ष रखा।
क्या है मामला
गुरुवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने पूछा- यदि हाई कोर्ट कोई आदेश देता है तो शासन के पास क्या विकल्प बचते हैं? प्रमुख सचिव ने कहा- या तो आदेश के खिलाफ अपील करेंगे या फिर उसका पालन करेंगे। इस पर हाई कोर्ट ने कहा- क्या अधिकारी आदेश का पालन न करते हुए चुपचाप हाथ पर हाथ धरे बैठे रह सकते हैं? यदि नहीं तो फिर राज्य शासन के अधिकारियों ने ये रवैया क्यों अपना लिया है कि हम नहीं करेंगे। जो होता है, होने दीजिए। कोर्ट को अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश देने के लिए विवश करना दर्शाता है कि अधिकारी ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे। प्रमुख सचिव ने इस पर माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा। विभाग ने ऐसे 24 प्रकरण चिन्हित किए हैं, जिसमें कैबिनेट नोट भी तैयार करा लिया गया है। याचिकाकर्ता की पैरवी अधिवक्ता देवेश शर्मा ने की।
कोर्ट की अपेक्षा
केस में चाहे सब इंजीनियर की व्यक्तिगत हाजिरी हो या फिर मुख्य सचिव की। हाईकोर्ट को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। हम आशा करते हैं कि ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आयेगी और आप लोग हमें इस हद तक जाने के लिये मजबूर नहीं करेंगे। यह कोर्ट को हुई असुविधा का सवाल नहीं है। सवाल यह है कि आम जनता कोर्ट के बारे में क्या सोचती है, कोर्ट ही एकमात्र संस्था है जहां आपको राहत मिल सकती है।

