संस्कार मंजरी की शीत सगुन गोष्ठी संपन्न
ग्वालियर- संस्कार मंजरी द्वारा शीत सगुन नाम से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार अनंगपाल सिंह अनंत ने की मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांत अध्यक्ष अखिलेश शर्मा मुरैना उपस्थित रहे वरिष्ठ साहित्यकार राजेश शर्मा विशेष अतिथि के रुप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में संस्कार मंजरी के अध्यक्ष राधा कृष्ण, खेतान श्रीमती नीलम गुप्ता डॉक्टर मुक्ता सिकरवार राजहंस त्यागी, जगदीश गुप्त, अनूप गुप्ता, सुरेंद्र पाल सिंह कुशवाहा एवं आलोक शर्मा ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन आलोक शर्मा ने किया आभार श्रीमती नीलम गुप्ता ने व्यक्त किया।
सीख लो उस दिए से खुद को जलाया था। आंखों को जिसने आंसुओं से ही सजाया था।
आहट होते ही सूरज की बुझा देते हैं उसको, सारी रात जिस चिराग ने रास्ता दिखाया था।
आलोक शर्मा ग्वालियर
मिल गया तो और की चाहत नहीं रही। दुनिया से पहले जैसी मोहब्बत नहीं रही।
मुझको तेरे करम ने मालामाल कर दिया, कुछ और मांगने की जरूरत नहीं रही।
डॉक्टर मुक्ता सिकरवार
भारत मां की पीर बताने घर घर डोल रहा हूं। शेर सो रहे मांदो में पट उनके खोल रहा हूं।
इस माटी की सदा रही है परंपरा बलिदानी, वीर प्रसूता चंबल मां का पानी बोल रहा हूं।
कवि अखिलेश शर्मा अखिल
विवेकानंद हिंद के गौरव का गान है। विवेकानंद युवाओं के शौर्य का सम्मान है।
राजहंस त्यागी
मेरे ऋण का भार नित बढ़ता जाता है। हे प्रभु आज प्रेम के हाथों मुझे बेच दो
अनंगपाल सिंह अनंग
कुछ गीत सगुन के गाये जाएं। कुछ गीत सगुन के बनाए जाएं।
जो कुछ छूट गया है तुमसे कोरोना कॉल में, 2022 में उनको भी जिंदगी में कुछ करना सिखाया जाए।
अनूप गुप्ता

