वेटिकन में पीएम मोदी और पोप फ्रांसिस के बीच 20 मिनट तय थी लेकिन 1 घंटे चली मुलाकात
वेटिकन. पीएम नरेन्द्र मोदी के यूरोप दौरे का आज दूसरा दिन है। उन्होंने वेटिकन सिटी पहुंचकर कैथोलिक क्रिश्चियन के सबसे बड़े धर्म गुरू पोस फ्रांसिस और सेक्रेट्री ऑफ स्टेट कॉर्डिनल पिएत्रो पारोलिन से मुलाकात की। पोप फ्रांसिस से मोदी की पहली मुलाकात थी। पीएम मोदी ने पोप को भारत आने का न्योता दिया। दोनों के बीच जलवायु परिवर्तन, गरीबी हटाने और दुनिया को बेहतर बनाने को लेकर चर्चा हुई। पीएम मोदी और पोप के बीच 1 घंटे तक मुलाकात चली। जबकि मीटिंग का समय 20 मिनट ही तय किया गया था।
पोप से मुलाकात पीएम मोदी के ऑफिशियल शेड्यूल का हिस्सा नहीं थी। क्योकि विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी थी। इसके बाद पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित 3 राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात करेंगे।
डिनर पर भी नजर
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन इस समिट से वर्चुअली शामिल हो रहे हैं। यानी इस बात की कोई संभावना नहीं है कि इस विश्व मंच पर दोनों देशों के नेताओं से पीएम मोदी की मुलाकात होगी। भारत और रूस के बीच दोस्ताना संभावना रिश्ते हैं और मजबूत रक्षा सहयोग है, लेकिन चीन को लेकर न सिर्फ दुनिया फिक्रमंद है। बल्कि भारत को खास तौर पर चीन से खतरा हैं। लद्दाख का मसला अब तक सुलझाा नहीं और 14 दौर की बातचीत के बाद भी पूरी तरह कुछ क्षेत्रों से सैन्य वापिसी नहीं हो सकी है। ऐसे में भारत चाहेगा कि दक्षिण चीन सागर के तमाम सहयोगियों को एक साथ चीन के विस्तारवादी इरादों के खिलाफ लाया जाये। यहां इंण्डोनेशिया भी होगा और सिंगापुर भी। मोदी इन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ मुलाकात करेंगे।
मैक्रों से अहम मुलाकात
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मोदी की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। दोनों के बीच पिछले महीने ‘आकस’ (AUKUS) के मसले पर भी बातचीत हुई थी। हालांकि, तब ये बातचीत फोन पर हुई थी। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच सबमरीन डील को लेकर काफी तनातनी हुई थी और इसका असर सीधे तौर पर कहीं न कहीं AUKUS पर होता नजर आ रहा था। हालांकि, फिलहाल जो बाइडेन और मैक्रों की बातचीत हो चुकी है और मामला ठंडा होता नजर आ रहा है।मोदी की कोशिश होगी कि किसी भी तरह AUKUS देशों के बीच मतभेद न हों, क्योंकि अगर ऐसा होता है तो चीन हिंद और प्रशांत महासागर में इसका फायदा उठा सकता है और कोई भी देश ये नहीं चाहेगा। मोदी-मैक्रों की मुलाकात में आपसी संबंधों पर विस्तार से बातचीत होना तय है।

