वकीलों की हड़ताल का असर, कोर्ट में नियमित बैठ रहे जज
ग्वालियर. 25 चिह्नित मामलों को तीन महीने में निराकृत किए जाने के चीफ जस्टिस के आदेश के बाद हाईकोर्ट में 23 मार्च से वकील हड़ताल पर है और कोर्ट का बहिष्कार कर रहे हैं। हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लाख हिदायत के बाद भी वकील काम पर लौटने को तैयार नहीं है। एक ओर जहां एडवोकेट कार्य से खुद को दूर रखे हुए हैं तो वहीं न्यायाधीश नियमित दिनों की तरह कोर्ट में बैठ रहे हैं और सुनवाई कर रहे हैं। वकील के बिना पहुंच रहे पक्षकार से ही उनकी बात को सुन रहे हैं और फैसला कर रहे हैं। हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ और जिला एवं सत्र न्यायालय में भी यह नजारा देखा जा सकता है, लेकिन यह 5 से 10 प्रतिशत केस में ही हो पा रहा है। 95 फीसदी मामलों में पक्षकार वकील के भरोसे ही हैं और परेशान हो रहे हैं। सोमवार को स्टेट बार काउंसिल की बैठक होगी। इसमें तय किया जाएगा कि तीन महीने में प्रकरण निराकृत करने के आदेश का आगे किस तरह से विरोध किया जाए। चीफ जस्टिस ने प्रदेशभर की 200 बार एसोसिएशन को अवमानना के नोटिस जारी किए हैं। कार्य से विरत रहने के फैसले को अवैधानिक करार दिया है। कोर्ट में आने वाले पक्षकार और उनकी सुनवाई इस तरह हो रही है।
खुद जज के सामने रखी बात
मारपीट के मामले में एक अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। सोमवार को सेशन कोर्ट मंे सुनवाई थी। अग्रिम जमानत की मांग करने वाले राजकुमार सिंह के पिता दयानंद सिंह पहुंचे। वकील हड़ताल पर थे तो वह कोर्ट उपस्थित हुए। यहां जज ने उनसे पूछा कि वह अपना पक्ष रखें। इस पर उनका कहना था कि उनके बेटे को झूठा फंसाया गया है। अभी तक उसका कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उसका पड़ोसी से सामान्य मुंहबाद ही हुआ था। कोर्ट उसे जमानत का लाभ दे, इस पर कोर्ट ने आवेदन करने वाले को जमानत का लाभ देने का आदेश दिया है।

