रोपवे परियोजना को मिली मंजूरी-केदानाथ, हेमकुण्ड और वैली ऑफ फ्लावर्स तक पहुुंचना होगा आसान
नई दिल्ली. पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट और आर्थिक मामलों की मंत्री मंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में कुछ अहम फैसले लिये गये है। इस बीच कैबिनेट ने राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम और पर्वतमाला परियोजना के तहत उत्तराखंड में रोपवे की 2 अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी। इसमें सोनप्रयाग से केदारनाथ 12.9 किमी तक रोपवे परियोजना और गोविंदघाट सो हेमकुण्ड साहिब जी 12.4 किमी तक रोपवे परियोजना का विकास शामिल है।
लगभग 7 हजार करोड़ रूपये का खर्च रोपवे परियोजनाओं में आयेगा
गोविंदघाट से हेमकुण्ड साहिब जी तक 12.4 किमी रोपवे परियोजना का डिजायन, निर्माण, संचालन, वित्त और हस्तान्तरण (डीबीएफओटी) मोड पर विकसित किया जायेगा। जिसकी पूंजीगत लागत 2,730.13 करोड़ रूपये होगी। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 12.9 किमी रोपवे परियोजना को सार्वजनिक/निजी भागीदारी में विकसित करने की योजना है। परियोजना को डिजायन, निर्माण, संचालन, वित्त और स्थानांन्तरण (डीबीएफओटी) मोड पर 4.081,28 करोड़ रूपये की कुल लागत पर विकसित किया जायेगा।
केदारनाथ से सोनप्रयाग तक पहुंचेंगे प्रतिदिन 18 हजार यात्री
केदारनाथ 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग में से एक है जो रूद्रप्रयाग जिले में 3,583 मीटर (11968फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह मंदिर साल में अक्षय तृतीया, (अप्रैल-मई) से दीपावली (अक्टूबर-नवम्बर) तक करीब 6 से 7 माह तीर्थयात्रियों के लिये खुला रहता है और इस मौसम के बीच वार्षिक करीब 20 लाख तीर्थयात्री यहां आते है।
यह रोपवे सबसे उन्नत ट्राई केवल डिटेवेशन गोंडोला (3एस) तकनीक पर आधारित होगा। इसकी डिजायन क्षमता 1800 यात्री प्रति घंटे प्रति दिशा (पीपीएचपीडी) होगी। जो प्रतिदिन 18 हजार यात्रियों का ेले जायेगी। रोपवे परियोजना केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिये वरदान होगी। क्योंकि यह पर्यावरण-अनुकूल, आरामदायक और तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और एक दिशा में यात्रा का समय करीब 8-9 घंटे से घटाकर करीब 36 मिनट कर देगी।
रोपवे परियोजना निर्माण और संचालन के साथ-साथ आतिथ्य, यात्रा, खाद्य और पेय पदार्थ (एफ एंड बी) और पर्यटन जैसे संबंद्ध पर्यटन उद्योगों में पूरे वर्ष रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध करायेगी। गौरीगुण्ड से केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा 16 किमी की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है। यहां फिलहाल इसे पैदल या टट्टू, पालकी और हेलीकाप्टर द्वारा तय किया जाता है। प्रस्तावित रोपवे की योजना मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा प्रदान करने और सोनप्रयाग तथा केदारनाथ के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिये बनाई गयी है।

