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महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान महाशिवरात्रि पर स्नान के लिये उमड़ी भीड़, स्नान के साथ ही होगी कुंभ की विदाई

प्रयागराज. शिव और शक्ति के मिलन का खास पर्व है शिवरात्रि, यू तो हर माह के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी और चर्तुदशी के संयोग का शिवरात्रि कहा जाता है। लेकिन फाल्गुन महीने में आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी की तिथि महाशिवरात्रि कहलाती है। इस दिन की विशेष मान्यता है कि यह शिव-पार्वती के विवाह का दिन है। प्रयागराज पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिये यह इसलिये भी खास है। क्योंकि बुधवार को ही महाकुंभ का अंतिम अध्याय यानी अंतिम शाही स्नान भी है। कई अखाड़े तो माघ पूर्णिमा के स्नान के बाद भी विदा ले चुके है। लेकिन शिवरात्रि का दिन महाकुंभ की विदाई का दिन भी होता है। इस दिन भी कुछ अखाड़े स्थान करते हैं और फिर कुंभ समापना की घोषणा होती है।
एक दिवसीय कल्पवास का ले सकते हैं लाभ
जो अभी तक कुंभ में नहीं जा पाये है और कल्पवास नहीं कर सके हैं। वह संगमत ट पर शिवरात्रि का स्नान करके व्रत रखते हुए कल्पवास कर सकते हैं। इसके लिये एक दिन पहले त्रयोदशी तिथि के दिन के वल एक समय ही भोजन ग्रहण करें और फिर शिवरात्रि के दिन, घाट पर पहुंचकर स्नान करें और फिर यहां व्रत का संकल्प लेना चाहिये।
अंतिम शाही स्नान के साथ ही महाकुंभ की विदाई
माघ पूर्णिमा के बाद महाकुंभ का अंतिम स्नान महाशिवरात्रि के दिन यानी कल होगा। इस वर्ष महाशिवरात्रि की तिथि का आरंभ 26 फरवरी की सुबह 11 बजे होगा। इसका समापन 27 फरवरी की सुबह 5.54 बजे होगा। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा रात्रि में की जाती है। अतः व्रत भी 26 फरवरी को रखा जायेगा और इसी दिन महाकुंभ मेले का समापन होगा।
गंगा स्नान का शाही महत्व
शिवरात्रि पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। गंगा नदी को शिवजी से विशेष वरदान प्राप्त है और यह उनका अभिषेक करते हुए ही धरती पर उतरती है। जहां-जहां गंगा बहकर आती है। उस स्थल पर हर जगह पवित्र शिवालय और तीर्थ स्थापित है। महाकुंभ के मौके पर त्रिवेणी में स्नान करके 100 यज्ञों के बराबर फल मिलता है। गंगा के लिये पुराणों में कहा गया है कि गंगा के दर्शन मात्र से मुक्ति मिलती है। ’’गंगे तव दर्शनात् मुक्ति‘‘
शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक शिवरात्रि
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है।  इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।  महाशिवरात्रि के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है. गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।  इस दौरान, स्नान करने से पहले गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का स्मरण करें।  जल अर्पण करते हुए संकल्प लें कि यह स्नान आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जा रहा है. स्नान के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और “हर हर गंगे” मंत्र का जाप करें और 3  या 7  बार डुबकी लगाएं. सूर्य को जल अर्पित करते हुए “ॐ घृणिः सूर्याय नमः” मंत्र बोलें।
शिवरात्रि के दिन कुंभ का आखिरी स्नान है।  इस मौके पर सूर्य का आचमन भी किया जाना चाहिए।  सूर्य को आचमन करते हुए अपने हाथ में दूब या कुशा ले लें और चावल के दानों के साथ सूर्य को आचमन करें. इसके बाद कुंभ को विदाई दें।  स्नान के बाद संगम में दीपदान करते हुए कुंभ को विदाई दी जाती है.।   बता दें कि कुंभ में अब तक लगभग 64 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं।

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