गुरूपूर्णिमा पर गिर्राज मंदिर पर श्रद्धालुओं ने की परिक्रमा, वीडियोकॉल से गुरूओं के किये दर्शन
ग्वालियर. गुरूपूर्णिमा का पर्व ग्वालियर में बड़े की धूमधाम व उत्साह से मनाया गया है। इस दिन गुरू की पूजा की जाती है। बुधवार की सुबह से ही शिष्य अपने-अपने गुरूओं के घर पहुंचे और उनका पुष्पहार पहनाकर पूजन किया और साथ ही गुरूओं ने भी शिष्यों को आर्शीवाद दिया। कुछ शिष्य तो शहर से बाहर थे उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से अपने गुरू के दर्शन किये। इस पर्व को देश में काफी धूमधाम और श्रद्धाभाव से मनाया गया है। यही वजह है कि बुधवार की सुबह से ही शहर स्थित मिर्राज जी मंदिरों पर भक्तों की भीड़ थी। इस बही काफी संख्या में लोग मथुरा-वृंदावन स्थित गिर्राज जी की परिक्रमा करने भी जाते हैं। बुधवार को ग्वालियर में कई मंदिर और आश्रम में भण्डारा प्रसादी बांटी गयी है।
ऐसा माना जाता है कि आज गुरूपूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था और उनकी स्मृति में इस दिन को लोग व्यास जयंती के नाम से भी मनाते हैं। अषाढ़ के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरूपूर्णिमा कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में गुरू को एक खास दर्जा प्राप्त है। एक गुरू हम सभी को नेक राह पर चलने का ज्ञान देता है। अच्छे-बुरे के फर्क को समझने योग्य बनाता है। नेक इंसान बनने की शिक्षा देते हैं। बुधवार को ग्वालियर में गुरूपूर्णिमा पर लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ऐसा इसलिये भी था कि 2 वर्ष बाद गुरूपूर्णिमा पर कोरोना की काली छाया नहीं है। वर्ष 2021 में कोराना की तीसरी लहर की आशंका के बीच यह त्योहार निकल गया था, पर इस बार कोई बंदिश नहीं इसलिये शिष्यों अपने -अपने गुरूओं का पूर्णिमा के अवसर अपने -अपने अंदाज में पूजा है।
मंदिर पर भीड़, श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन भक्त
बुधवार को सुबह 5 बजे से ही मुरार गिर्राज मंदिर, लश्कर ओल्ड हाईकोर्ट स्थित गिर्राज बाबा का मंदिर में भक्त पहुंचना शुरू हो गए थे। सुबह सड़कों तक भक्तों की लाइन थी। पर जैसे-जैसे धूप और उमस तेज होती गई तो भीड़ कम होती चली गई है। शाम को मंदिरों पर फिर भीड़ बढ़ेगी। इसके साथ ही जगह-जगह भंडारे व प्रसादी वितरण के कार्यक्रम हो रहे हैं।

