OPS vs NPS-पुरानी और नयी पेंशन स्कीम में क्या है अन्तर, कर्मचारियों को किसमें अधिक लाभ?
नई दिल्ली. केन्द्र सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम (NPS) के रिव्यू के लिये कमेटी बनाने का ऐला किया है। देश में लम्बे समय से पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) और नयी पेंशन स्कीम को लेकर केन्द्र सरकार और विपक्ष के बीच खींचतान चल रही है। गैर-भाजपा राज्यों में पुरानी पेंशन स्कीम अहम मुद्दा रही है। कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान पुरानी पेंशन स्कीम को बड़ा मुद्दा बनाया था। कांग्रेस जब जीतकर सत्ता में आयी है तो उसने ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने का ऐलान किया।
केन्द्र सरकार का रूख इस स्कीम को लेकर हमेशा विपक्ष से उलट रहा है। मोदी सरकार इसे लागू करने के पक्ष में अभी तक नजर नहीं आयी है। लेकिन अब सरकार ने नयी पेंशन स्कीम को रिव्यू करने के लिये कमेटी गठित करने का ऐलान किया है, तो ऐसे में आइये समझते है कि नयी और पुरानी पेंशन स्कीम अंतर क्या है। इस वर्ष जनवरी के माह में योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर बड़ी बात कहीे थी। उनका कहना था कि कुछ राज्य सरकारों द्वारा पुरानी पेंशन योजना को फिर से शुरू करना वित्तीय दिवालियापन की रेसिपी है। मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा था कि इस कदम को आगे बढ़ाने वालों के लिये बड़ा लाभ यह है कि दिवालियापान 10 वर्ष के बाद आयेगा।
कब से लागू की गयी थी न्यू पेंशन स्कीम
देश में नयी पेंशन स्कीम एक जनवरी 2004 से लागू की गयी है। पुरानी और नयी पेंशन स्कीम में काफी अन्तर है। दोनों के कुछ फायदे और नुकसान है। पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) के तहत रकम का भुगतान सरकार के खजाने से होता है। वहीं पुरानी पेंशन स्कीम में पेंशन के लिये कर्मचारियों के वेतन से कोई पैसा कटने का प्रावधान नहीं हैं। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के तहत रिटायरमेंट के समय वेतन की आधी राश्ज्ञि कर्मचारियों को पेंशन के रूप में दी जाती है। क्योंकि पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) का निर्धारण सरकारी कर्मचारी की अंतिम बैसिक सैलरी और महंगाई दर के आंकड़ों के अनुसार होता है। जबकि नयी पेंशन स्कीम योजना (NPS) में निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है। क्योंकि यह शेयर बाजार पर आधारित है। जिसमें बाजार की चाल के अनुसार भुगतान किया जाता है।
शेयर मार्केट पर आधारित है NPS
पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी की सैलरी से कोई कटौती नहीं होती थी । NPS में कर्मचारियों की सैलरी से 10 फीसदी की कटौती की जाती है। नई पेंशन स्कीम में GPF की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि पुरानी पेंशन स्कीम में ये सुविधा कर्मचारियों को मिलती है। अगर नई पेंशन स्कीम की बात करें, तो इसमें रिटर्न बेहतर रहा, तो प्रोविडेंट फंड (Provident Fund) और पेंशन (Pension) की पुरानी स्कीम की तुलना में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय अच्छा पैसा मिल सकता है। चूंकि ये शेयर मार्केट पर आधारित स्कीम है। इसलिए कम रिटर्न की स्थिति में फंड कम भी हो सकता है।
पुरानी पेंशन स्कीम में 20 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी की रकम मिलती है। वहीं, रिटायर्ड कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को पेंशन की राशि मिलती है। सबसे अहम बात ये है कि पुरानी पेंशन स्कीम में हर 6 महीने बाद मिलने वाले DA का प्रावधान है, यानी जब सरकार नया वेतन आयोग (Pay Commission) लागू करती है, तो भी इससे पेंशन की रकम में बढ़ोतरी होती है।
क्या सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ?
केंद्र सरकार अब तक कहती रही है कि ओल्ड पेंशन स्कीम सरकार पर भारी बोझ डालती है। यही नहीं, पुरानी पेंशन स्कीम से सरकारी खजाने पर ज्यादा बोझ बढता है। रिजर्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने से राजकोषीय संसाधनों पर अधिक दबाव पड़ेगा और राज्यों की सेविंग पर नेगेटिव प्रभाव पड़ेगा।

