NPS कर्मचारियों के परिजनों को मिलेगी फैमिली पेंशन, तलाकशुदा बेटी का भी अधिकार
भोपाल. मध्यप्रदेश सरकार ने पेंशन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया है। पहली बार नेशनल पेंश्ज्ञन् स्कीम (एनपीएस) से जुड़े कर्मचारियों के परिजनों को फैमिली पेंशन का हक दिया है। अब यदि 1 जनवरी 2005 के बाद भर्ती किसी सरकारी कर्मचारी की मौत 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने से पूर्व हो जाती है। उसके आश्रित परिवार को राज्य सरकार अपने वित्तीय संसाधनों से फैमिली पेंशन देगी। यह पेंशन कर्मचारी के अंतिम वेतन का एक तिहाई होगी। अभी तक एनपीएस में असमय मौत की स्थिति में नियमित फैमिली पेंशन का प्रावधान नहीं था। इस फैसले के साथ ने उस खालरी जगह को भर दिया है। जिसे लम्बे समय से एनपीएस की सबसे बड़ी कमी माना जा रहा था।इसी फैसले के साथ राज्य सरकार ने फैमिली पेंशन की परिभाषा को भी व्यापक किया है।
ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) और एनपीएस दोनों में सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद उसकी तलाकशुदा बेटी भी फैमिली पेंशन की हकदार होगी। इसके लिये उम्र की कोई सीमा नहीं होगी। पुनर्विवाह की स्थिति में यह पेंशन बन्द हो जायेगी। इससे पहले फैमिली पेंशन का हक केवल 25 वर्ष की अविवाहित बेटी या बेट तक सीमित था। राज्य सरकार ने अब मानसिक रूप से विकलांग संतान को भी इस दायरे में शामिल कर लिया है। पहले यह सुविधा केवल शारीरिक विकलांग संतान तक सीमित थी। नये प्रावधान के तहत 40 से ज्यादा दिव्यांगता होने पर मेडीकल बोर्ड के प्रमाण पत्र के आधार पर फैमिली पेंशन मिलेगी। इन बदलावों को मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दी गयी है।
1 अप्रैल से एनपीएम में 8 लाख कर्मचारियों को होगा फायदा
सभी नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इसके बाद होने वाली मौतों पर यह व्यवस्था लागू होगी। जल्द वित्त विभाग की ओर से इनका गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।सरकार के इस फैसले से ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत आने वाले लगभग 6 लाख सरकारी कर्मचारियों के परिजनों को लाभ मिलेगा। वहीं नेशनल पेंशन स्कीम के तहत आने वाले 4 लाख राज्य सरकारी कर्मचारियों और निगम, मंडल, प्राधिकरण व अन्य सरकारी उपक्रमों में कार्यरत लगभग 8 लाख कर्मचारी भी फैमिली पेंशन के दायरे में आएंगे।
सरकारी नोटिफिकेशन के बाद निगम और मंडल के कर्मचारियों पर यह नियम स्वतः लागू होंगे। राज्य सरकार के पीएसयू के लिए अलग आदेश जारी किया जा सकता है।नहीं। किस परिजन को कितने समय तक फैमिली पेंशन मिलेगी, यह पात्रता के नियमों के अनुसार तय होगा। विधवा या तलाकशुदा बेटी के पुनर्विवाह के बाद फैमिली पेंशन बंद हो जाएगी।
एनपीएस में ‘अंतिम वेतन का एक-तिहाई’ कैसे तय होगा?
ओपीएस में फैमिली पेंशन पहले 7 साल तक अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत और उसके बाद 30 प्रतिशत होती है। एनपीएस में यह शुरुआत से ही अंतिम वेतन का एक-तिहाई होगी। यदि विधवा या तलाकशुदा बेटी पुनर्विवाह नहीं करती और आर्थिक रूप से अक्षम है, तो आयु की कोई सीमा नहीं होगी। नहीं। इसके लिए कानूनी रूप से तलाक होना जरूरी है। मेडिकल बोर्ड से 40 प्रतिशत से अधिक विकलांगता का प्रमाणपत्र जरूरी होगा।फिलहाल नियमों का गजट नोटिफिकेशन जारी होना बाकी है। उसके बाद सरकार इस पर निर्णय ले सकती है। एनपीएस धारक व्यक्ति यानी जो 1 जनवरी 2005 से सरकार की सेवा में आए हैं। ऐसे अफसर या कर्मचारी की 10 साल में मृत्यु हो जाती है तो उनके लिए मौजूदा पुरानी पेंशन की तर्ज पर परिवार पेंशन की पात्रता होगी। सेवा में रहते हुए मृत्यु पर यह पत्नी को पात्रता होती है। पत्नी के मौजूद न रहने पर 25 वर्ष तक के बेटे या बेटी को यह पात्रता होती है। यदि सेवा में रहते कर्मचारी की मृत्यु 10 साल में हो जाती है तो पत्नि को 30 प्रतिशत पेंशन की पात्रता होगी। यानी सेवा में रहते शासकीय सेवक का अंतिम वेतन 50 हजार रुपए वेतन मिल रहा है तो परिवार पेंशन की राशि पत्नी को 15 हजार रुपए पेंशन राशि मिलेगी। हां हो सकती है, लेकिन इसके लिए कर्मचारी को परिवार पेंशन का विकल्प चुनना होगा। उदाहरण के तौर पर 33 साल की सेवा के बाद कर्मचारी रिटायर होता है और उसकी मृत्यु हो जाती है, उस स्थिति में सरकार का अंश हटाकर जो कर्मचारी के अंश की जमा राशि इकट्ठा हुई है, उसमें परिवार पेंशन मिलेगी।
यह कैसे तय होगा?
एनपीएस में कर्मचारी के वेतन से 10% राशि कटती है, जबकि 14% राशि सरकार मिलाती है। इस राशि से जो कार्पस फंड बनता है, उसमें से सरकार के हिस्से की जमा 14% में जो भी जमा हुआ है उसे हटाकर कर्मचारी के जमा कार्पस में से ही जमा एन्युटी के हिसाब से परिवार पेंशन का भुगतान किया जाएगा।

