H1N1 वायरस कोविड जैसा खतरनाक, भारत में 13000 से ज्यादा मामले
नई दिल्ली. देश में एच1एन1 इन्फ्लुएंजा वायरस, यानी स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ रहे है। केरल में इन्फ्लुएंजा के 7421 मामले आए और 88 मौतें हो चुकी है। कर्नाटक में 4000 और दिल्ली में 1777 मरीजों में एच1एन1 की पुष्टि हुई है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात में भी कुछ केस आए है। 21 अगस्त को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बैठक बुलाकर एच1एन1 से निपटने की तैयारियों पर चर्चा की है।
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अधिकारियों के साथ मीटिंग की।
सबसे खतरनाक है एच1एन1 वायरस
2009 में इसी वायरस के चलते पूरी दुनिया में महामारी फैली थी और करीब 19000 लोग मारे गए थे। ये डब्ल्यूएचओ का दिया हुआ आंकडा है। असली संख्या कई गुना ज्यादा थी। 2009 में इंसानों में इसकी पहचान सबसे पहले मेक्सिको में हुई थी। हालांकि ये सूअरों में पहले से फैल रहा था, इसिलए इसे स्वाइन फ्लू नाम दिया गया। बाद में डब्ल्यूएचओ ने इसक नाम इन्फ्लुएंजा एच1एन1 रख दिया क्योंकि देखा गया कि ये इंसानों से इंसानों के बीच फैल रहा है। सूअर का मांच खाने या सूअर के संपर्क से वायरस के फैलने का कोई लेना-देना नहीं था। भारत में हर साल जुलाई से सितंबर के बीच इन्फ्लुएंजा के मामले सामने आते है। दूसरे कम खतरनाक इन्फ्लुएंजा टाइप के साथ ही एच1एन1 भी फैलता है।
कोविड की तरह इसमें भी सफाई रखने की सलाह दी
डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार एन1एच1 मुख्य रूप् से उन छोटे-छोटे नमी के कणों से फैलता है जो हम लोग खांसते, छींकते या बात करते समय छोडते है। संक्रमित व्यक्ति से 1 से 2 मीटर के दायरे में दूसरे लोग भी संक्रमित हो सकते है। ये वायरस दरवाजे के हैंडल, मोबाइल फोन जैसी सतहों पर भी 24 घंटे तक जिंदा रह सकता है। इसीलिए कोविड की तरह ही इसमें भी मुंह ढकने और साफ-सफाई रखने की सलाह दी जाती है। सामान्य सर्दी-जुकाम राइनोवायरस जैसे कुछ वायरस होता है। ये आम तौर पर 3 से 7 दिन में ठीक हो जाता है। वहीं इन्फ्लुएंजा, खास तौर पर एन1एच1 का संक्रमण कई हफ्ते तक शरीर में रह सकता है।

