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चाचा-भतीजे की हत्या महज 70 हजार रूपयों के लिये की गयी

नई दिल्ली. दीपावली की रात दिल्ली के शाहदरा में हुए चाचा -भतीजे के डबल मर्डर के मामले में नाबालिग आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से हत्या की वजह सामने आयी है।
70 हजार रूपयों की लिये की गयी हत्या
डीसीपी शाहदरा प्रशांत गौतम ने बताया कि जानकारी के अनुसार मृत आकाश ने आरोपी नाबालिग को कोई काम सौंपा था जिसके बदले उसे 70 हजार रूपये देने की बात हुई थी। अब काम पूरा हो जाने पर आकाश न तो पैसे दे रहा था और न ही आरोपी का फोन उठा रहा था। इस कारण से नाबालिग बेहद गुस्से में था। उसने एक कॉन्ट्रैक्ट किलरद को हायर किया और दीपावली के दिन मौका देखकर आकाश ने हत्या को अंजाम दिया।
17 से हत्या की प्लानिंग कर था नाबालिग
उन्होंने बताया कि आरोपी के टारगेट पर सिर्फ आकाश था। लेकिन पहले कृष को गलती से गोली लगी और इसके बाद ऋषभ ने जब आरोपी को पकड़ना चाहा तो उसने ऋषभ को भी गोली मार दी। उन्होंने आगे बताया कि नाबालिग 17 दिन से इस हत्या की प्लानिंग कर रहा था और वह पहले भी कई वारदातों में शामिल रहा है।

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रेलवे पुलिस में भरा पानी तो रोकी ट्रेन

गुना. म्याना इलाके के खजूरी गांव में रेलवे पुलिया में पानी भरा होने की वजह से ग्रामीणों ने आक्रोश फूट पड़ा है। शुक्रवार की सुबह ग्रामीण रेल की पटरी पर बैठ गये और ग्वालियर भोपाल इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन को रोक लिया। ट्रेन ग्वालियर से गुना की ओर आ रही थी।
उन्होंने रेलवे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों की मांग थी कि पुलिस में भरे पानी को जल्द खाली कराया जाये। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची है। इस बीच ट्रेन 40 मिनट तक रूकी रही। रेलवे के अफसर, तहसीलदार ने पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया और इसके बाद वह पटरी से हटे और ट्रेन को रवाना किया। वहीं ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

बता दें कि म्याना इलाके का खजूरी गांव नेशनल हाइवे 46 से तीन किलोमीटर अंदर है। गांव तक पहुंचने में बीच में रेलवे ट्रैक भी पड़ता है। इस ट्रैक पर रेलवे ने अंडर ब्रिज बनाया हुआ है। इसी अंडरब्रिज से होकर ग्रामीणों को गुजरना होता है। इस अंडरब्रिज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां अधिकतर समय पानी भरा रहता है। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। एक पंप ऑपरेटर को पानी निकालने का जिम्मा दिया हुआ है।ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से अंडरब्रिज में कई फीट तक पानी भरा हुआ है। इस कारण यहां से निकलना संभव नहीं हो पा रहा है। कई बार प्रशासन को समस्या से अवगत कराया, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

पुलिया में अभी भी पानी भरा हुआ है।
पुलिया में अभी भी पानी भरा हुआ है।
ग्रामीणों को हटाने की कोशिश करती पुलिस।
ग्रामीणों को हटाने की कोशिश करती पुलिस।
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MP में सबसे अधिक प्रदूषित शहर ग्वालियर, एक्यूआई लेवल 408 दर्ज’ ग्वालियर के सिटीसेंटर में हवा की खराब है स्थिति

ग्वालियर. मध्यप्रदेश के कई बड़े शहरों में प्रदूषण का लेवल लगभग 3 गुना तक बढ़ गया है। जिसमें ग्वालियर के डीडीनगर में शुक्रवार की सुबह लगभग 9.30 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक एक्यूआई 408 दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर इन्दौर के ग्वाल टोली में यह 399 रहा है। भोपाल, रतलाम, जबलपुर, उज्जैन और देवास में  क्रमशः 314, 315, 370, 322 और 316 दर्ज किया गया है। जो खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है। सिटी सेंटर में हवा की स्थिति खराब है, जबकि महाराज बाड़ा पर बहुत ज्यादा खराब है। शहर के डीडी नगर में हवा की स्थिति जानलेवा बताई गई है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ओर से 31 अक्टूबर को प्रदूषण की 6 घंटे के लिए (शा

एमपीपीसीबी के अनुसार,भोपाल में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 यानी धूल के बारीक कण से सबसे अधिक प्रदूषण हो रहा है। - Dainik Bhaskar
ळालांकि कई शहरों में एयरफ्लो की वजह से आतिशबाजी के बावजूद एक्यूआई कम हुआ है। एयर फ्लो से मतलब यह है कि तेज हवा चलने या हवा का दबाव अधिक होने के चलते प्रदूषण कम हो जाता है।
धूल के बारीक कणों से बढ़ रहा है एक्यूआई भोपाल शहर के एक्यूआई की बात करें तो पर्यावरण परिसर में मौजूद लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम पर गुरूवार को 284 एक्यूआई था। सुबह टीटीनगर का एक्यूआई 238 दर्ज किया गया। वहीं, शाहपुरा इलाके में गुरूवार की दोपहर 176 एक्यूआई रहा है। देर रात तक यह 314 पर पहुच गया है।
मध्यप्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (एमपीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार, शहर भर में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 यानी धूल के बारीक कण से सबसे अधिक प्रदूषण हो रहा है। सभी जगहों पर जो एक्यूआई बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण पीएम 2.5 ही है।

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दीवाली के बाद महाराज बाड़े पर लगा कचरे का ढेर, सुबह से पूरा शहर कचरे के आगोश में

ग्वालियर. दीवाली हर्षोल्लास और जोश के साथ मनाई गयी है। शहर के लोगों ने जमकर आतिशबाजी की, लेकिन दीपोत्सव के दूसरे दिन सफाईकर्मियों की छुट्टी का असर पूरे शहर में साफ दिखाई दे रहा है। कचरा गाडि़यों के नहीं चलने से बाजारों से लेकर सड़कों तक कचरा ही कचरा नजर आया है। इसमें सबसे अधिक आतिशबाजी का कचरा है।
शहर के महाराज बाडे पर दीपोत्सव के पहले सड़क पर बैठकर व्यापार करने वाले हॉकर्स के जाने के बाद उनका कचरा चारों ओर बिखरा पड़ा नजर आ रहा है। यही हाल उपनगर ग्वालियर और मुरार के बाजारों के है। अभी तक कचरा शनिवार को झाडू लगने के बाद ही उठेगा। हालांकि अधिकारियों ने कचरा उठवाने के प्रयास किये, लेकिन बाजारों में पड़ा कचरा नहीं उ ठपाये हैं।
सफाई कर्मचारी अवकाश पर हैं
गुरूवार को दीपावली का त्योहार था और शुक्रवार को सफाई कर्मचारी अवकाश पर है। शहर में वार्ड नम्बर 1 से लेकर 66 तक शनिवार को कचरा नहीं उठा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि लगभग 550 से 600 टन कचरा उठकर लैंडफिल साइट पर नहीं पहुंच सका। अब शनिवार को करीब 500 टन कचरा दूसरे दिन का और जुड़ जायेगा। ऐसे में शनिवार का दिन ही कचरा कलेक्शन के लिहाज से खास रहेगा। नगरनिगम पहले से ही दीपोत्सव पर निकल रहा अतिरिक्त कचरा पूरी तरह नहीं उठा पा रहा था। दीपोत्सव के दूसरे दिन सफाई कर्मियों का अवकाश होने से कचरा कलेक्शन करने और उठाने वाले वाहन नहीं निकले और न ही सड़कों पर झाडू लगी है।

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दीवाली पर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाया आकाश, दीपावली की धूम से सजे घर-घर और जले दीप

ग्वालियर. गुरूवार की शाम को दीवाली मनाई गयी है। दीपावली 31 अक्टूबर या 1 नवम्बर की मनाई जाये। इसको लेकर उलझन थी। लेकिन शहर के सभी बड़े मंदिर, आश्रम और सरकारी कार्यालयों में गुरूवार को ही दीपावली का त्योहार मनाया गया है। गुरूवार की रात मे ंरंग-बिरंगी रोशनियों औरे आतिशबाजी से शहर का आसमान जगमग हो गया है। रात 8 बजे शहर के लोगों ने शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन कर दीप जलाये, फिर बच्चों -बड़ों ने जमकर पटाखे चलाये। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाये देते नजर आये। पूरा शहर रंग-बिरंगी रोशनी से नहाया नजर आ रहा है। चारो ओर रोशनी ओर खुशहाली है। दीपावली के दिन भी रात तक बाजारों में खरीदारी करने वाले भी नजर आयें है।
दीवाली पर गुरूवार की सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। शहरवासी सुबह से ही लक्ष्मीजी के पूजन के लिये अपनी दुकानों -मकानों की सफाई करते देखे गये। सुबह से ही शहर में ठेके वाले अशोक के पत्ते, माला आदि लेकर खड़े हो गये थे। लोगों ने पत्ते, फूल आदि खरीदकर दुकानों, मकानों पर संजाये। लोगों ने अपनी दुकानों, मकानों और ऑफिसों में लक्ष्मी जी का पूजन पूरे विधि विधान से किया गया। शाम होते ही दीवाली की असली चमक नजर आई।

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केदारपुरधाम में स्वयं सेवक संघ का प्रचारक वर्ग शुरू, वर्ग के उद्देश्य, सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर 4 दिन होगा मंथन

ग्वालियर. केदारपुरधाम में दीवाली की सुबह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 4 दिवसीय विविध संगठन प्रचारक वर्ग का शुभारंभ हो गया है। गुरूवार की सुबह 8.30 बजे आरएसएस के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने भारत माता व सरस्वती मां के चित्रों पर पुष्प् अर्पित कर प्रचारक वर्ग का शुरू किया है। इस अवसर पर डॉ. मोहन भागवत ने प्रचारक वर्ग के पहले चरण में वर्ग के उद्देश्य को स्पष्ट किया है। प्रचारक वर्ग में 31 विविध संगठन के 554 प्रचारक शामिल हुए है। यहां राष्ट्रीय राजनीति, सामाजिक, मजदूर, किसानों, विद्यार्थियों तथा सामाजिक, धार्मिक एवं ग्रामीण, वनवासी, शहरी क्षेत्र में कार्यो पर चर्चा के साथ ही महिला सशक्तिीकरण पर विचार विमर्श हो रहा है।
7 सत्र में हो रहा है प्रचारक वर्ग
अखिल भारतीय प्रचारक वर्ग प्रति तीन-चार वर्ष में एक बार होता है। वर्ग में स्वाध्याय के साथ सामाजिक जीवन के लिए आवश्यक कार्यों की चर्चा, व्यक्तिगत विकास एवं परस्पर अनुभव साझा किए जाएंगे।
राष्ट्रीय, सामाजिक मुद्दों पर हो रहा मंथन
ग्वालियर केदारपुर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में शुरू हुए चार दिवसीय आरएसएस के विविध संगठन प्रचारक प्रशिक्षण वर्ग में कई मुद्दों पर मंथन होगा। चार दिन में राष्ट्रीय एवं सामाजिक कार्यों से जुड़े मुद्दों, दिव्यांगजन, युवा एवं महिला सशक्तीकरण, स्वावलंबन, सुरक्षा, जैविक कृषि, जल संधारण, पर्यावरण संरक्षण, घुमंतु कार्य, व्यसन मुक्ति जैसे विषयों पर मंथन होगा। प्रशिक्षण वर्ग में निरंतर सक्रिय रहने वाले ये सभी कार्यकर्ता इस वर्ग में शामिल होकर इन मुद्दों पर मंथन करेंगे।
2 नवंबर को सीएम होंगे शामिल आरएसएस के प्रचारक वर्ग में चार दिन के कार्यक्रम के तीसरे दिन दो नवंबर को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आना प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुए कार्यक्रम में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे थे।
सारे इंतजाम संघ के कार्यकर्ता कर रहे
ग्वालियर में आरएसएस के विविध संगठन प्रचारक प्रशिक्षण वर्ग चार दिन तक चलेगा। यहां सभी व्यवस्थाएं संघ के कार्यकर्ता ही संभाल रहे हैं। अंदर की सुरक्षा से लेकर मंच तक का प्रबंधन आरएसएस के कार्यकर्ता ही करेंगे। आने वाले अतिथियों के लिए भोजन से लेकर स्वागत का इंतजाम भी संघ के सदस्यों के जिम्मे रहेगा।

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दीपावली पर ओरछा के लक्ष्मीनारायण मंदिर की चौखट पर माथा टेक कर बिना दर्शन के ही वापिस लौट जाते हैं श्रद्धालु

ओरछा. कभी बुन्देलखंड की राजधानी रही ओरछा रियासत आज मध्यप्रदेश के सबसे छोटे जिले के निवाड़ी की तहसील है। यहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है। जामुनी और बेतवा नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिकस्थल अपने अन्दर कई सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजे हुए हैं। जिसे देखने के लिये देश ही नहीं विदेशी सैलानी भी आते हैं। ओरछा स्थित जहांगीर महल, राजा महल स्टैण्ड, परवीन महल, चतुर्भुज मंदिर, लक्ष्मीनरायण मंदिर काफी अहम है।
इसमें 17वीं सदी की शुरूआत में बना लक्ष्मीनारायण मंदिर अपने आप में खा सहै। यह मंदिर 1600ईसवी में वीरसिंह देव ने बनवाया था। यह मंदिर ओरछा गांव के पश्चिम में एक पहाड़ी बना हुआ है। यह मंदिर पिछलजे 36 वर्षो में मूर्ति विहीन है। इस मंदिर में 17वीं और 19वीं शताब्दी के चित्र बने हुए है। चित्रों के चटकीले रंग इतने जीवंत लगते हैं। जैसे वह हाल ही में बनाये गये हों। मंदिर में झांसी की लड़ाई के दृश्य और भगवान कृष्ण की आकृतियां बनी है।
इसके अलावा 17वीं सदी में बनाये गये इस मंदिर की मान्यता है कि दीपावली के दिन इस सिद्ध मंदिर में दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की पूजा करने से वह प्रसन्न होती है। 1983 में मंदिर में स्थापित मूर्तियों को चोरों ने चुरा लिया था। तब से आज तक मंदिर के गर्भगृह का सिंहासन सूना पड़ा है। ओरछा निवासी 90 वर्षीय साहियकार गणेशप्रसाद दुबे ने कहा है कि मंदिर के महत्व को जानकर बुंदेलखण्ड से आने वाले श्रद्धालु मंदिर की चौखट पर माथा टेकर बिना लां लक्ष्मी के दर्शन किये निराश लौट जाते हैं।

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लाल टिपारा गौशाला में मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में होगा मुख्य आयोजन 

ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में 2 नवम्बर को आदर्श गौशाला लाल टिपारा में आयोजित होने जा रहे गोवर्धन पूजा व मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के जिला स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों की कलेक्टर रुचिका चौहान ने बुधवार को समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस आयोजन में जनप्रतिनिधिगण, प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिकों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें। साथ ही कार्यक्रम स्थल पर सभी व्यवस्थायें बेहतर से बेहतर हों। उन्होंने कहा स्थापना दिवस कार्यक्रम का आयोजन गरिमामय ढंग से हो।
गोशाला के संत ऋषभदेवानंद अफसरों को पूरा प्लान समझाते हुए।
राज्य शासन ने मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस कार्यक्रम में गौशालाओं में गोवर्धन पूजा को भी शामिल किया है। इसलिए लाल टिपारा सहित जिले की अन्य गौशालाओं में भी 2 नवम्बर को गोवर्धन पूजा का आयोजन कराएँ। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोवर्धन पूजा व स्थापना दिवस कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को जरूर आमंत्रित करें।
31 अक्टूबर से 2 नवम्बर तक प्रमुख शासकीय भवनों में रोशनी की जाए। साथ ही स्वच्छता, सजावट, रंगोली इत्यादि गतिविधियाँ भी हों। ऐतिहासिक स्मारकों व महापुरुषों की प्रतिमाओं के परिसर में विशेष तौर पर साफ-सफाई कराई जाए। निर्माण श्रमिकों को मिष्ठान वितरण व आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बस्तियों में दीपोत्सव जैसे कार्यक्रम भी किए जा सकते हैं। उन्होंने दीपावली पर होने वाले आतिशबाजी कचरे को हटाने के लिये सघन स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश भी बैठक में दिए।
स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाएँ
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में कलेक्ट्रेट एवं नगर निगम आयुक्त कार्यालय सहित अन्य स्थानों पर जिले के स्व-सहायता समूहों एवं कुटीर उद्योगों द्वारा निर्मित वस्तुओं की बिक्री के लिये प्रदर्शनी लगाने के निर्देश भी बैठक में दिए। उन्होंने कहा यह काम प्रमुखता से किया जाए।
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जिला कोषालय में कलेक्टर ने किया लक्ष्मी पूजन 

ग्वालियर दीपावली पर्व के पावन अवसर पर कलेक्ट्रेट स्थित जिला कोषालय में लक्ष्मी पूजन किया गया। कलेक्टर रुचिका चौहान ने इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि विधान के साथ लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना की।
कलेक्टर ने इस अवसर पर कहा कि लक्ष्मी पूजन का केवल आध्यात्मिक महत्व ही नहीं है, इस पूजन से समृद्धि, खुशहाली व सामाजिक सदभाव के लिए सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पूजा ग्वालियर जिले के निवासियों के जीवन में सुख-समृद्धि व शांति लायेगी। जिला कोषालय में आयोजित हुए लक्ष्मी पूजन में जिला कोषालय अधिकारी अरविंद शर्मा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।
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इस दीपावली चीन को 1.25 लाख का हो रहा नुकसान, नहीं खरीद रहे चायनीज सामान, ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ का जलवा

नई दिल्ली. पिछले कुछ वर्षो से दीपावली और धनतेरस पर चाइनीज प्रॉडक्टस की मांग पर भारतीय बाजारों में लगातार घटती जा रही हैं। खासतौर डेकोरेटिंग आइट्म्स की बिक्री पहले के मुकाबले काफी घटी है। अधिक मांग कम होने से आयात भी कम हो रहा है। जिससे घरेलू सामानों की बिक्री बढ़ रही है। दरअसल, देश में पीएम नरेन्द्र मोदी के ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ अभियान का असर अब दिखाई देने लगा है। चायनीज सामानों की बिक्री लगातार घट रही है। इस वर्ष अधितर लोग दीवाली पर स्वदेशी सामान खरीदते हुए नजर आ रहे है। खासकर लोग इलेक्ट्रॉनिक्स सजावट के सामान ‘‘मेड इन इंडिया’’ देखकर ही खरीद रहे है।
चायनीज प्रॉडक्ट्स का हो रहा विरोध
एक अनुमान के मुताबिक दीवाली से जुड़े चीनी समानों की बिक्री में तगड़ी गिरावट से चीन को लगभग 1 लाख 25 हजार करोड़ रूपये का नुकसान हो रहा है। क्योंकि लगातार कई वर्षो से दीवाली पर चायनीज प्रॉडक्ट्स का बहिष्कार किया जा रहा है। कुम्हारों से मिट्टी के दिये और सजावट का सामान खरीदकर लोग ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ अभियान को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।