रिफाइनरी, एयरबेस, फ्यूल डिपो, हाईराइज बिल्डिंग्स, एयरपोर्ट …युद्ध के बीच दुश्मन के बड़े टारगेट क्या होते हैं

नई दिल्ली. भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों 1947, 1965, 1971 और 1999 में दोनों देशों की सैन्य रणनीतियों ने दुश्मन के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। इनमें रिफाइनरियां, एयरपोर्ट, एयरबेस, हाई-राइज इमारतें और फ्यूल डिपो जैसे लक्ष्य शामिल थे। सैन्य आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण थे।
प्रमुख लक्ष्यों का महत्व
युद्ध के दौरान कुछ लक्ष्य रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से अहम होते हैं। इनका विनाश दुश्मन की सैन्य क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला और मनोबल को कमजोर करता है। भारत-पाकिस्तान युद्धों निम्नलिखित लक्ष्य प्रमुख रहें।
रिफाइनरियां: रिफाइनरियां ईंधन का प्रमुख स्रोत होती हैं, जो सैन्य वाहनों, विमानों और जहाजों के लिए आवश्यक है। इनका विनाश दुश्मन की सैन्य गतिशीलता को सीमित करता है।
1971 के युद्ध में भारतीय वायुसेना (IAF) ने 6 दिसंबर को अट्टक रिफाइनरी (रावलपिंडी के पास) पर नंबर 20 स्क्वाड्रन के चार हंटर विमानों से हमला किया। इस हमले से विशाल आग और धुआं उठा, जिसने बाद के हमलों के लिए नेविगेशन में मदद की।
प्रभाव : इस हमले ने पाकिस्तान की ईंधन आपूर्ति को प्रभावित किया, जिससे उसकी सैन्य गतिविधियां बाधित हुईं।
एयरपोर्ट और एयरबेस: एयरबेस और हवाई अड्डे वायुसेना के संचालन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. इनका विनाश दुश्मन की हवाई शक्ति को कमजोर करता है. हवाई हमलों को रोकता है।
1965 युद्ध: IAF ने सरगोधा एयरबेस पर हमला किया, जो पाकिस्तान वायुसेना (PAF) का सबसे महत्वपूर्ण और अच्छी तरह से संरक्षित बेस था। इसमें कैनबरा बॉम्बर्स, मिस्टेयर और हंटर विमानों ने हिस्सा लिया।

