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ग्वालियर. 18 वर्ष पूर्व शादी हुई, 2 बच्चे हैं। कुछ साल तक सब ठीक चला और इसके बाद पत्नी धोखा देने लगी। बच्चों की परवरिश के बहाने शहर में रहती है। किसी दूसरे से मिलती जुलती, वह किसी और को चाहने लगी थी। छिप-छिप कर बातें करती। उसे कई बार मोबाइल पर बाल करते पकड़ा। जो लगातार मुझे इग्नोर कर रही थी। जबकि किसी और से हंस-हंस कर बातें करती थी।
ग्वालियर के जौरासी गांव के रहने वाले सोनू उर्फ जनवेदसिंह किरार ने एक दिन पत्नी प्रगति को किसी से फोन पर बात करते हुए पकड़ लिया। दोनों मेंबहस हुई और सोनू को इतना गुस्सा आया कि पत्नी की हत्या कर ली। जुर्म छिपाने के लिये ऐसी साजिश रची कि खुलासा होने पर पुलिस भी हैरान रह गयी। उसका पूरा प्लान दृश्यम मूवी की तरह था।
क्या है पूरा मामाला
सोनू बोला- वो छटपटा रही थी, मैंने उसकी गर्दन नहीं छोड़ी
8 जुलाई को मैं घर आया तो रोज की तरह प्रगति किसी से हंस-हंसकर बात कर रही थी। मैंने पूछा कि वो कौन है। हमेशा की तरह उसने रूखा सा जवाब…आपको क्या करना। हमारी बहस हुई। मैं गुस्से में था। दोनों में हाथापाई होने लगी। मेरा हाथ गर्दन पर पहुंच गया। वो मुझे लगातार थप्पड़ मारे जा रही थी।
मैं उसकी गर्दन पर अपनी पकड़ मजबूत करता गया। वो तड़पती रही, मुझसे छूटने की कोशिश करती रही, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। थोड़ी ही देर में उसका शरीर शांत पड़ गया। गर्दन से हाथ हटाया तो वो जमीन पर लुढ़क गई। मैंने उसकी नब्ज टटोली। उसकी धड़कन सुनने की कोशिश की, लेकिन सब खत्म हो चुका था। वो मर चुकी थी।
प्रगति की जब हत्या की, तब घर में कोई नहीं था। बच्चे नाना के घर गए थे। मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया। प्रगति के शरीर की तरह मेरा गुस्सा भी ठंडा पड़ चुका था। अब आगे क्या करना है, कुछ समझ नहीं आ रहा था। पछतावा हुआ तो अपने भाई को बुलाया। इसके बाद पिता और चाचा को सूचना दी।
कई ऐसी कहानी देखी-सुनी थी, जिसमें शव को ठिकाने लगाने के तरीके बताए गए हैं। मैंने भी ऐसा ही एक तरीका निकाला। तय किया कि दृश्यम मूवी की तरह शव पुलिस को नहीं मिलने देंगे। जब तक शव नहीं मिलेगा, कोई कुछ नहीं कर पाएगा। 8 जुलाई की रात शव के पास सो गया।