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सऊदी अरब ने पाक से दशकों पुराने तेल का व्यापारिक संबंध खत्म किया

इस्लामाबाद. सउदी अरब ने पाकिस्तान के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों को खत्म करने का ऐलान कर दिया है। कश्मीर पर विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के एक विवादित बयान के बाद ही दोनों देशों के संबंधों में खटास आनी शुरू हो गई थी। सउदी अरब से साथ न मिलने के बाद कुरैशी ने एक विवादित बयान दिया था जिसके बाद रियाद ने यह फैसला लिया। दो दिन पहले ही रियाद ने इस्लामाबाद को कच्चे तेल की सप्लाई और लोन देने पर रोक लगा दी थी। मीडिल ईस्ट रिपोर्ट की एक खबर के अनुसार रियाद द्वारा लिए गए एकतरफा फैसले के बाद अब पाकिस्तान ने भी संबंधों को खत्म करने के लिए कह दिया है।
10 अगस्त को सऊदी अरब ने पाकिस्तान को दिए एक बिलियन डॉलर के कर्ज को लौटाने को कहा था। पाकिस्तान ने तय समय से चार महीने पहले ही लौटा दिया इसके बावजूद सऊदी अरब का दिल नहीं पसीजा है और पाकिस्तान की तेल सप्लाई रोक दी है।
एक बिलियन डॉलर कर्ज की वसूली भी पाकिस्तान से कर ली
दरअसल सऊदी अरब ने पाकिस्तान के बोझ को कम करने के लिए और विदेशी मुद्रा का खजाना भरने के लिए नवंबर 2018 में 6.2 बिलियन डॉलर की रकम पाकिस्तान को दी थी जिसमें से 3.2 बिलियन डॉलर का इस्तेमाल पेट्रोलियम पदार्थ लेने और उसके भंडारण पर खर्च किया जाता था। ये डील मई 2020 में समाप्त हो गई लेकिन सऊदी अरब ने डील को रिन्यू करने की जगह तेल की सप्लाई ही रोक दी और एक बिलियन डॉलर कर्ज की वसूली भी पाकिस्तान से कर ली। मिडिल ईस्ट मॉनिटर की रिपोर्ट के अनुसार जब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले साल फरवरी में पाकिस्तान की यात्रा की थी तब इस सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे।
पाक को ये झटका उस समय लगा है जब उसे आईएमएफ से भी कोई मदद नहीं मिल पा रही है क्योंकि आईएमएफ ने पछले 5 महीने से किमी को भी मदद नहीं दी हे। ऐसे में सऊदी अरब को पैसे लौटाने के साथ ही अब तेल की खरीदी से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक पर बुरा असर पड़ रहा है जो पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है।

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