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जियो साइंस म्यूजियम-छूते ही आयेगा भूकंप और फटेगा ज्वालामुखी

ग्वालियर. अब शहरवासियों एवं ग्वालियर आने वाले पर्यटक भूकंप का बर्चुअली अनुभव कर सकेंगे एवं ज्वालामुखी का फटना देख सकेंगे। इन सबके लिये महाराज बाड़ा स्थित 1910 की ऐतिहासिक विक्टोरिया बिल्डिंग में भारत में भूविज्ञान के विकास और अनुसंधान के अग्रणी राष्ट्रीय संगठन, भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के डिप्टी डायरेक्टर सुब्रतो सरकार की देखरेख में बन रहे देश के पहले जियो साइसं संग्रहालय के पहले फेस का काम अंतिम चरणों में है। सांस्कृतिक मंत्रालय की कंपनी नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम, कोलकाता के अंतर्गत संग्रहालय को संवारने का काम कर रही क्रियटिव म्यूजियम कंपनी की टीम लीडर पल्लवी कर्मकार, डिजाइनर गौतम बनर्जी एवं इंजीनियर शोभित मन के साथ अपने काम को अंजाम दे रही है। शोभित मन का कहना है कि यह संग्रहालय 2 फेस में बनाया जा रहा है जिसके पहले फेसका काम मार्च के अंत तक पूरा हो जायेगा।

छूते ही मिलेगी 4 लाख 50 हजार वर्ष की पूर्व पृथ्वी की उत्पत्ति की जानकारी
क्रियटिव म्यूजियम कंपनी की टीम लीडर पल्लवी कर्मकार के अनुसार यहां पहले फेस में तैयार गैलरी में कुल 7 एनक्लेव बनाये गये हैं जिनमें साढ़े चार लाख वर्ष पहले पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान गठन तक, महाद्वीपों के निर्माण, मानव जीवन के विकास, पहाड़ों, ग्लेशियरों के निर्माण से लेकर पृथ्वी में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों के बारे में, समुद्र, ज्वालामुखीऔर अन्य भू-आकृति, भूकंप की घटनायें, पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का निर्माण, चट्टानों की उत्पत्ति, खनिज और रत्न, उल्कापिंड, धूमकेतू आदि के बारे में थ्रीडी मॉडलों के माध्यम से बताया गया है। यहां आने वाले दर्शक वर्चुअल कियोस्क के माध्यम से टच स्क्रीन पर उंगली रखते ही इन सबके बारे में जानकारी ले सकेंगे। पहले एनक्लेव में अलग-अलग मॉडलों की सहायता से कैसे पृथ्वी आग के गोले से बनकर आज के रूप में आयी। यह बताया गया है कि पृथ्वी के अंदर कितनी गहराई पर चट्टाने, पानी और मेग्मा चेम्ब्र है यह बताया है। दूसरे एन्क्लेव में बताया गया है कि कैसे हजारों-लाखों वर्ष पूर्व पूरी दुनिया की धरती एक भूभाग थी जो चारों ओर से पानी से घिरी हुई है और बाद में टेक्टोनिक एक्टिविटी से यह महाद्वीपों में बंट गयी एवं इनके चारों ओर महासागरों को निर्माण हुआ है।
भूकंप कैसे आता हे दर्शक महसूस करेंगे
यहां चौथे नम्बर के एन्क्लेव में भूकंप कैसे आता है इसे दर्शक वर्चुअली महसूस कर सकेंगे और इसके लिये यहां एक विशेष प्लेटफॉर्म बनाया गया है। जिस पर खड़े होकर स्विच दबाते ही भूकंप के अलग-अलग तीव्रता के झटके महसूस होंगे। इसके तीव्रता मापने के लिये एक डिजिटल एवं एनालॉग सीस्मोग्राफ लगाया गया है जो रिक्टर पर तीव्रता दिखायेगा।
एंट्री गेट पर हाथी स्टेगोडॉन का जीवाश्म
स्ंाग्रहालय में प्रवेश करते ही 50 लाख वर्ष पुराने विलुप्त स्टेगोडॉन प्रजाति के हाथी के दांत जीवाश्म का स्कल्प्चरलगाया गया है। यह डायनासोर के समय में पाये जाते थे जो डायनासोर के साथ जलवायु परिवर्तन के कारण अचानक विलुप्त हो गये थे। इनके दांत 13 फीट तक लम्बे होते थे।
बेशकीमती रत्नों की गैलरी भी
यहां सातवें एन्क्लेव में जीएसआई को गिफ्ट किये गये एवं कलेक्शन कियेगये बहुमूल्य रत्नों हीरा, खदानसे निकले हीरे से बना एक हार, जिसके बारे में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने शिलान्यास के दौरान कहा था को भी यहां प्रदर्शित किया जायेगा।
34 करोड़ की लागत
इस म्यूजियम के निर्माण पर लगभग 34 करोड रूपये खर्च हुए हैं। यहां आम जनता से लेकर शोध विद्वानों तक हर कोई प्राकृतिक विज्ञान की झलक पा सकेगा। यहां व्याख्यान कक्ष, आधुनिक लायब्रेरी, प्रयोगशाला आदि की व्यवस्था रखी गयी है।
नरेन्द्रसिंह ने किया था शिलान्यास
संग्रहालय का शिलान्यास 4 वर्ष पूर्व तत्कालीन केन्द्रीय खान मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने 9 मार्च 2019 को किया था जिसके लिये 5 सितम्बर 2017 को जीएसआई और नगरनिगम के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये थे।
छूते ही फटेगा ज्वालामुखी
थर्ड एन्क्लेव में लगे कियोस्क की स्क्रीन छूते ही सामने बड़ी एलईडी स्क्रीन पर ज्वालामुखी विस्फोट के साथ ही कैसे उसका लावा फैलता है उसे जा सकेगा।

 

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