ग्वालियर की DRDE में जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच, 2 से 3 दिन में मिलेगी जांच रिपोर्ट, GRMC जल्द भेजेगा सैम्पल

ग्वालियर. कोरोना के सैम्पल की जीनोम सीक्वेंसिंग हो सकेगी। इससे जल्दी ही नये वैरिएंट ओमिक्रॉन का पता चल सकेगा। यहां डिफेंस रिसर्च एण्ड डवलपमेंट इस्टेबलिशमेंट (DRDE) में जिनोम सीक्वेंसिंग हो सकेगी। DRDE ने दावा किया है कि इससे 2 से 3 दिनों में रिपोर्ट मिल जायेगी। डीआरडीई के डायरेक्टर ने जीआरएमसी (GRMC) के डीन को पत्रे लिखकर सैम्पल भेजने के लिये कहा है। डीन ने भी इस मामले में भोपाल स्वास्थ्य विभाग से इजाजत मांगी है। भोपाल से सहमति मिलते ही ओमिक्रॉन संदिग्ध केसों के सैम्पल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिये यहां भेजे जायेंगे और इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को दिल्ली की नेशनल लैब के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। यहां भेजे गये सैम्पल की रिपोर्ट डेढ़ माह के बाद भी नहीं मिली है।
2 से 3 दिन में देंगे रिपोर्ट- DRDE

दो दिन पूर्व DRDE  के चंडीगढ़ से वापिस लौटे वैज्ञानिक की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद DRDE  की लैब में उनके सैम्पल का जीनोम सीक्वेंसिंग किया गया था। इसमें मंगलवार की रात ओमिक्रॉन की पुष्टि हुई थी और इसके बाद ही DRDE डायरेक्टर ने गजराराजा मेडीकल कॉलेज ग्वालियर (GRMC) के डीन को पत्र लिखकर जिनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिये सैम्पल भेजने के लिये कहा है कि प्रभारी डीन डीके शाक्य ने बताया है कि उन्होंने सैम्पल जांच के लिये DRDE  भेजने के लिये भोपाल स्वास्थ्य विभाग से इजाजत मांगी है। एक या दो दिन में इजाजत मिलने के बाद ही सैम्पल भेजे जायेंगे।
जीनोम सीक्वेंसिंग क्या है
कोशिकाओं के अन्दर अनुवांशिक पदार्थ होता है। इसे DNA (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड) RNA  (राइबो न्यूक्लिक एसिड) कहते हैं। इस सभी पदाथों को सामूहिक रूप् से जिनोम कहा जाता है एक जीन की तय जगह और दो जीन के बीच की दूरी और उसके आंतरिक हिस्सों के व्यवहार और उसकी दूरी को समझने के लिये कई तरीकों से जिनोम मैपिंग या जिनोम मैपिंग या जिनोम सीक्वेंसिंग की जाती है।

जल्द भेजे जाएंगे सैंपल
DRDE में जिनोम सीक्वेंसिंग की जांच अच्छी बात है। हम भोपाल बात कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई परेशानी होगी। जल्द सैंपल वहां भेजे जा सकते हैं, जिससे ओमिक्रॉन को ट्रेस करने में आसानी होगी।
डॉ. डीके शाक्य, प्रभारी डीन, गजराराजा मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर

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