अफसरों का ढुलमुल रवैया से स्वच्छता में पिछड़ा ग्वालियर
ग्वालियर. स्वच्छता सर्वेक्षण में ग्वालियर के हर मोर्चे पर पिछड़ने की वजह अफसरों का ढुलमुल रवैया, मैदानी अमले से कोई समन्वय न होना रहा है। साल 2021 की शुरूआत ही सफाई कर्मचारियों का हड़ताल से हुई थी। साल के पहले दिन पूरा शहर कचरा-कचरा था। 6 दिन बाद हड़ताल उस समय टूटी थी जब भोपाल से ही खुद सीएम शिवराज सिंह ने तत्कालीन निगमायुक्त संदीप माकिन को हटाने के लिए कह दिया था। उसी समय स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम ग्वालियर में थी इसके बाद बार-बार सफाई कर्मियों की हड़ताल, सड़कों पर फैला कचरा, अफसरों का ढुलमुल रवैया और नदियों में दौड़ता सीवर का पानी ग्वालियर के स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ने और खराब परिणाम की वजह बनी है।
स्वचछ सर्वेक्षण 2021 का परिणाम घोषित हो गया है। इसमें ग्वालियर 10 लाख की आबादी वाले शहरों की सूची में 15 वें नंबर पर रहा है, जबकि साल 2020 में 13 वें नंबर पर था। वहीं देशभर के शहरों की बात करें ताे ग्वालियर की स्थिति और भी ज्यादा खराब रही है। इसमें ग्वालियर 14 पायदान नीचे खिसक कर 42 वें नबंर पर पहुंच गया है। बीते वर्ष वह 28वें नंबर पर था। स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 के परिणाम जारी होने के बाद नगर निगम की पहले से बेहतर रैंक लाने की उम्मीद तो टूटी है, लेकिन उससे ज्यादा शहरवासियों को निराशा हुई है, क्योंकि स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर नगर निगम ने शहर में काफी प्रयास किए थे, लेकिन परिणाम से उसके अनुरूप नहीं आए हैं।
अफसरों का गंभीर न होना
ग्वालियर के स्वच्छता रैंक में पिछड़ने की एक बहुत बड़ी वजह यहां के अफसरों का सफाई को लेकर गंभीर न होना है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण साल 2021 की शुरूआत में ही देखने को मिला था। जब नए साल के पहले ही दिन से शहर में सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू की। इस समय स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम शहर में आने वाली थी। तत्कालीन नगर निगम आयुक्त हालात को लेकर गंभीर नहीं थे। नतीजा सीएम ने सार्वजनिक तौर पर हटाने की घोषणा की। इसके बाद भी अफसर सफाई कर्मचारियों से तालमेल नहीं बैठा पाए। कई बार हड़ताल हुई नतीजा सामने है।

