सम्राट मिहिर भोज पर गुर्जर व क्षत्रिय समाज ने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ रखा पक्ष
ग्वालियर. सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा की पट्टिका पर गुर्जर लिखे जाने के बाद गुर्जर और क्षत्रिय महासभा के बीच शुरू हुए विवाद में अब दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक तथ्य प्रस्तुत कर अपने दावे रखे हैं। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने पत्रकारवार्ता में में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर बताया। वहीं अखिल भारतीय क्षेत्रिय महासभा संयुक्त मोर्चा ने कलेक्टर और नगरनिगम आयुक्त को ऐतिहासिक तथ्योंके साथ ज्ञापन देकर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा से गुर्जर हटाये जाने की मांग की है।
अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के आचार्य वीरेन्द्र विक्रम ने बताया कि चिरवाई नाके पर जो गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा की स्थापना हुई है। यह ग्वालियर शहर के लिये गौरव की बात है। मिहिर भोजर रघुवंशी सम्राट थे और गुर्जर प्रतिहार बंश के सबसे प्रतापी सम्राट थे। जिन्होंने 53 वर्षो तक अखंण्ड भारत पर शासन किया और उनकी पहचान समाज में गुर्जर सम्राट के नाम से ही है।
वहीं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा संयुक्त मोर्चा ने कलेक्टर और नगरनिगम आयुक्त को दिये गये ज्ञापन में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा से गुर्जर शब्द हटाने की मांग की गयी है। संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री राजेन्द्रसिंह भदौरिया तथा जिलाध्यक्ष रघुराज सिंह सतोमर ने कहा है कि विक्कीपीडिया पर इस संबंध में जो तथ्य दिखाये जा रहे हैं वह भ्रामक हैं।

